होम / बिजनेस / गणेश राजू: Ken42 के जरिए उच्च शिक्षा को नए रूप में ढालने की कोशिश
गणेश राजू: Ken42 के जरिए उच्च शिक्षा को नए रूप में ढालने की कोशिश
गणेश राजू के जन्मदिन पर उच्च शिक्षा में तकनीक के जरिए बदलाव लाने और संस्थानों को अधिक सक्षम बनाने की उनकी पहल चर्चा में
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत में उच्च शिक्षा संस्थान तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में चर्चा अब केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है. विश्वविद्यालय तेजी से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रौद्योगिकी उन्हें छात्रों को बेहतर ढंग से समझने, संस्थागत दक्षता बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में किस तरह मदद कर सकती है. Ken42 के संस्थापक गणेश राजू इसी बदलाव के केंद्र में काम कर रहे हैं.
उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने की कोशिश
Ken42 के जरिए राजू का काम विशेष रूप से उच्च शिक्षा पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को अलग-अलग प्रणालियों और संस्थागत प्रक्रियाओं को एक साथ लाने में मदद करना है. 2019 में स्थापित Ken42 खुद को आधुनिक विश्वविद्यालयों के लिए एआई आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में पेश करता है, जो प्रवेश, अकादमिक गतिविधियों, प्रशासन और छात्र सहभागिता जैसे क्षेत्रों को एक ही मंच से जोड़ता है.
इस मंच के पीछे व्यापक विचार यह है कि विश्वविद्यालयों को हर काम के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. प्रवेश, अकादमिक गतिविधियां, परीक्षाएं, छात्र सेवाएं, प्लेसमेंट और पूर्व छात्रों से जुड़ी गतिविधियां अक्सर अलग-अलग संचालित की जाती हैं. इससे संस्थानों के लिए किसी छात्र की पूरी यात्रा की तस्वीर तैयार करना मुश्किल हो जाता है.
संस्थानों में डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
राजू ने विश्वविद्यालयों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में इस बिखराव को भी गिनाया है. उनके अनुसार, जब अलग-अलग संस्थागत प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ा जाता है और उनसे तैयार होने वाले डेटा का सार्थक इस्तेमाल किया जाता है, तब प्रौद्योगिकी कहीं बड़ी भूमिका निभा सकती है.
उनका दृष्टिकोण विश्वविद्यालयों को केवल जानकारी दर्ज करने से आगे ले जाकर यह समझने पर केंद्रित है कि संस्थान में क्या हो रहा है और परिणामों को प्रभावित करने का समय रहते उस पर प्रतिक्रिया कैसे दी जा सकती है.
एआई के जरिए छात्रों को व्यक्तिगत सहायता
इसी दृष्टिकोण ने Ken42 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में भी आगे बढ़ाया है. कंपनी ने KAI विकसित किया है, जो छात्रों और कैंपस से जुड़े अन्य लोगों को संदर्भ के अनुसार सहायता देने के लिए तैयार किया गया एआई सहायक है.
इस मंच का उद्देश्य संस्थानों के साथ बातचीत को अधिक तत्काल और व्यक्तिगत बनाना है, साथ ही संस्थागत प्रणालियों में पहले से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करना है.
शिक्षा में बदल रही है प्रौद्योगिकी की भूमिका
Ken42 का काम शिक्षा में प्रौद्योगिकी की भूमिका में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाता है. प्रौद्योगिकी को केवल प्रशासनिक सुविधा के रूप में देखने के बजाय राजू का दृष्टिकोण इसे संस्थागत निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र के करीब लाता है.
इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को डेटा, स्वचालन और एआई के इस्तेमाल के जरिए आवेदकों, छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करना है.
सॉफ्टवेयर से आगे शिक्षा क्षेत्र में पहल
शिक्षा क्षेत्र में राजू का योगदान सॉफ्टवेयर तक ही सीमित नहीं है. अगस्त 2026 में Ken42 ने उदयपुर में 42 Degrees के पहले संस्करण की मेजबानी की. यह उच्च शिक्षा नेतृत्व शिखर सम्मेलन था, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के नेताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने विश्वविद्यालयों के भविष्य पर चर्चा की.
राजू ने इस पहल को संस्थान निर्माण और उच्च शिक्षा की बदलती जरूरतों पर गहन बातचीत के लिए मंच तैयार करने की कोशिश के रूप में बताया.
प्रौद्योगिकी साधन है, अंतिम लक्ष्य नहीं
यह पहल राजू की शिक्षा क्षेत्र की यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाती है: उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी अपने आप में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है. इसका इस्तेमाल संस्थानों को अधिक जवाबदेह, आपस में जुड़ा हुआ और छात्रों की बेहतर सेवा करने में सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए.
विश्वविद्यालयों में संस्थागत समझ बढ़ाने पर फोकस
भारतीय उच्च शिक्षा प्रौद्योगिकी आधारित बदलाव के लिए तैयार हो रही है. ऐसे में ध्यान तेजी से उन बुद्धिमान प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है, जो संस्थागत डेटा को वास्तविक दुनिया के निर्णयों से जोड़ सकें. Ken42 के जरिए गणेश राजू विश्वविद्यालय के पूरे तंत्र के केंद्र में प्रौद्योगिकी, एआई और संस्थागत समझ को रखकर इस बदलाव में योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं.
शिक्षा के भविष्य में तकनीक की बढ़ती भूमिका
उनके जन्मदिन पर उनकी यह यात्रा याद दिलाती है कि शिक्षा का भविष्य केवल कक्षाओं के भीतर ही तय नहीं होगा, बल्कि उन प्रणालियों से भी आकार लेगा जो संस्थानों को अपने छात्रों को समझने, उनका सहयोग करने और उन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करती हैं.
टैग्स