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‘विक्सित भारत 2047’ के साथ कॉरपोरेट इंडिया का बढ़ा तालमेल, डिफेंस-ऑटो-बैंकिंग आगे: SBI रिसर्च

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में 33 कंपनियों की 66 वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़े साझा क्षेत्र

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत के ‘विक्सित भारत 2047’ के लक्ष्य के साथ कॉरपोरेट जगत का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है. डिफेंस, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर इस दिशा में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं. कंपनियां अब निवेश, तकनीक, क्षमता विस्तार और कारोबार बढ़ाने की रणनीतियों में देश के विकास से जुड़े लक्ष्यों को शामिल कर रही हैं. यह जानकारी एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की एक रिपोर्ट में सामने आई है.

‘Building Viksit Bharat Together: Understanding Corporate India’s Strategic Role In Such Journey’ नाम से जारी रिपोर्ट में 33 कंपनियों की 66 वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया है. इसके लिए प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) आधारित आकलन का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग सेक्टरों में प्राथमिकताएं भले ही अलग हैं, लेकिन शासन व्यवस्था और डिजिटल बदलाव ऐसे विषय हैं, जो कई क्षेत्रों में समान रूप से नजर आते हैं.

डिफेंस, ऑटो और बैंकिंग सबसे आगे

एसबीआई रिसर्च के ‘विक्सित भारत डिस्क्लोजर इंडेक्स’ में एयरोस्पेस और डिफेंस, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर सबसे आगे रहे हैं. इन क्षेत्रों की कंपनियों ने अपनी कारोबारी रणनीतियों को ‘विक्सित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ने पर अपेक्षाकृत अधिक जोर दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का फोकस मुख्य रूप से डिजिटल बदलाव पर है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और पावर सेक्टर में स्थिरता पर जोर दिखाई देता है. बैंकिंग में बेहतर शासन व्यवस्था के साथ डिजिटल बदलाव और मानव पूंजी भी महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं.

सरकार की सात विकास प्राथमिकताओं के साथ कॉरपोरेट रणनीतियों के मेल को देखें तो तकनीक और नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग, कनेक्टिविटी एवं इंफ्रास्ट्रक्चर तथा हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत साझा क्षेत्र हैं. वहीं डिफेंस, कृषि एवं खाद्य उत्पादन और सॉफ्ट पावर का महत्व कुछ खास सेक्टरों तक अधिक सीमित है.

डिफेंस बना रणनीतिक विकास का अहम क्षेत्र

रिपोर्ट में डिफेंस सेक्टर को रणनीतिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है. देश में स्वदेशी डिजाइन, घरेलू उत्पादन और रक्षा निर्यात पर बढ़ते जोर के बीच इस क्षेत्र में कंपनियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं. एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया.

कई रणनीतिक क्षेत्रों में परियोजनाओं का विस्तार भी देखने को मिला है. पावर प्रोजेक्ट्स की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,074 हो गई, जो पहले 1,926 थी. वहीं डिफेंस प्रोजेक्ट्स की संख्या वित्त वर्ष 2020 में चार से बढ़कर 45 हो गई. ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट्स भी 17 से बढ़कर 69 हो गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों की रणनीति अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और जमीन पर नई परियोजनाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

बैंकिंग और ऑटो सेक्टर का भविष्य पर ज्यादा फोकस

एसबीआई रिसर्च ने कंपनियों की भविष्य से जुड़ी घोषणाओं का भी आकलन किया. इसमें निवेश, विस्तार, तकनीकी उन्नयन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और रणनीतिक बदलाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया. बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस एवं डिफेंस सेक्टर में भविष्य को लेकर सबसे अधिक स्पष्टता दिखाई दी. इसके बाद मेटल्स और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का स्थान रहा.

रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों की कंपनियां भविष्य के निवेश और कारोबारी रणनीतियों को तकनीक अपनाने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और देश की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ रही हैं.

पावर और इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में अभी और गुंजाइश

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि ‘विक्सित भारत’ के एजेंडे के साथ कंपनियों का जुड़ाव केवल व्यापक विषयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसे कारोबारी रणनीति, पूंजीगत खर्च, तकनीक अपनाने, सप्लाई चेन, कर्मचारियों के कौशल विकास और मापने योग्य स्थिरता लक्ष्यों में शामिल किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट में पावर और इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत तालमेल की जरूरत बताई गई है. इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण, बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट उपकरण, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कर्मचारियों के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. वहीं बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र वित्तीय सहायता, डिजिटल समाधान, स्वच्छ तकनीक, नवाचार और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

कंपनियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय करने की सिफारिश

एसबीआई रिसर्च ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं में अपने योगदान को स्पष्ट करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य, परिणाम आधारित संकेतक और पारदर्शी रिपोर्टिंग व्यवस्था अपनाएं.

‘विक्सित भारत 2047’ का लक्ष्य भारत को 2047 तक एक विकसित, समावेशी, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाना है. इसके लिए तकनीकी प्रगति, उत्पादन क्षमता, स्थिरता, मानव पूंजी और मजबूत संस्थागत व्यवस्था को अहम आधार माना गया है.

एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण से पता चलता है कि इन लक्ष्यों के कई हिस्से अब कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट और कारोबारी रणनीतियों में दिखाई देने लगे हैं. हालांकि, अलग-अलग सेक्टरों में ‘विक्सित भारत’ के साथ जुड़ाव का स्तर और उसका तरीका काफी अलग है.


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