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7.8% की GDP ग्रोथ ने बढ़ाया भारत का कद, IMF ने सर्विस सेक्टर और निर्यात को दिया श्रेय
7.8% की GDP ग्रोथ ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. हालांकि, आगे की वृद्धि के लिए वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग पर नजर बनी रहेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.8% की रियल GDP ग्रोथ दर्ज की है. यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान से बेहतर रहा. IMF ने मजबूत ग्रोथ के पीछे सर्विस सेक्टर और निर्यात में तेजी को अहम वजह बताया है. साथ ही, महंगे कच्चे तेल के झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया है.
7.8% की ग्रोथ ने चौंकाया
दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बीच भारत की 7.8% GDP ग्रोथ को मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है. IMF की प्रवक्ता जूली कोजैक के मुताबिक, दूसरी तिमाही का यह आंकड़ा IMF के स्टाफ के अनुमान से काफी बेहतर रहा. IMF के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की इस रफ्तार में सर्विस सेक्टर की मजबूत गतिविधियों और निर्यात में बढ़ोतरी की अहम भूमिका रही. मजबूत घरेलू मांग ने भी आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया.
सर्विस सेक्टर और निर्यात बने ग्रोथ के प्रमुख आधार
भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है. दूसरी तिमाही में इसी क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों ने समग्र आर्थिक वृद्धि को गति देने में मदद की. इसके अलावा निर्यात में मजबूती भी ग्रोथ के लिए सकारात्मक रही. घरेलू मांग के साथ वैश्विक मांग में सुधार ने भारतीय कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों को समर्थन दिया.
महंगे कच्चे तेल के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. IMF ने कहा कि एनर्जी प्राइस शॉक के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि उसकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है. वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है.
आर्थिक आंकड़ों में सुधार का IMF ने किया स्वागत
IMF ने भारत में किए गए सांख्यिकीय सुधारों का भी स्वागत किया है. सरकार ने GDP के नए आंकड़ों में नए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) को शामिल किया है. इन बदलावों का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए ज्यादा व्यापक और सटीक आंकड़े उपलब्ध कराना है. बेहतर आंकड़ों से नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने और नीतिगत फैसले लेने में मदद मिल सकती है.
भारत बना हुआ है अहम ग्रोथ इंजन
IMF की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है. ऊंची ऊर्जा कीमतें, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भारत की मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही हैं. 7.8% की GDP ग्रोथ ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. हालांकि, आगे की वृद्धि के लिए वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग पर नजर बनी रहेगी.
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