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गलत जानकारी हटाएं, वरना मानहानि की कार्रवाई: सुभाष चंद्रा की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी
प्लेटफॉर्म्स से 26 से 29 अगस्त के बीच प्रकाशित कथित गलत पोस्ट हटाने और अपना स्पष्टीकरण प्रकाशित करने को कहा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 15 minutes ago
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि अगर उनके बारे में प्रसारित की जा रही कथित गलत जानकारी को नहीं हटाया गया, तो उनके खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी और विभिन्न संस्थाओं की ओर से लिए गए कर्ज से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई है.
एक सप्ताह में सुधारात्मक कार्रवाई की मांग
‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से 26 से 29 अगस्त के बीच अलग-अलग खातों से प्रकाशित कथित गलत जानकारी हटाने और इस मामले में उनका स्पष्टीकरण प्रकाशित करने को कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म्स को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है.
इस घटनाक्रम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ता द्वारा तैयार की गई सामग्री में किसी व्यक्ति या कंपनी से जुड़े विवादित दावों की सत्यता और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है.
व्यक्तिगत कर्ज लेने से किया इनकार
सुभाष चंद्रा इससे पहले सोशल मीडिया पर #PaisaWapasKaro हैशटैग के साथ साझा की जा रही पोस्ट को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया है. उनके अनुसार, बकाया राशि से जुड़े दावे अलग-अलग उधार लेने वाली संस्थाओं से संबंधित हैं.
30 अगस्त को उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, चंद्र ने कुल करीब 22,000 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे. इनमें करीब 4,800 करोड़ रुपये की गारंटी उस समय दी गई थी, जब संबंधित संस्थाओं ने कर्ज लिया था. बाकी गारंटी कर्ज चूक होने के बाद दी गई थी. बयान में कहा गया, “मेरे द्वारा उधार लिया गया कर्ज, डॉ. सुभाष चंद्र: 0 रुपये.” इसमें जोर दिया गया कि संबंधित कर्ज अलग-अलग कंपनियों ने लिया था, न कि चंद्रा ने व्यक्तिगत क्षमता में.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर सवाल
यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने मौजूद उस व्यापक चुनौती को भी रेखांकित करता है, जिसमें उन्हें गलत या विवादित जानकारी को लेकर सुधार की मांगों पर तेजी से कार्रवाई करनी होती है. साथ ही, उन्हें उपयोगकर्ता द्वारा प्रकाशित सामग्री, मध्यस्थ की जिम्मेदारियों और जानकारी की सटीकता को लेकर अलग-अलग दावों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है.
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