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Delhivery ने Ecom Express के अधिग्रहण का किया ऐलान, 1407 करोड़ रुपये में हुआ सौदा
Delhivery एक लिस्टेड कंपनी है, जिसका मार्केट कैप 19,200 करोड़ रुपये है. ईकॉम एक्सप्रेस लिमिटेड अगस्त 2012 में इनकॉरपोरेट हुई थी. कंपनी का 31 मार्च 2024 तक टर्नओवर 2607.30 करोड़ रुपये था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लॉजिस्टिक्स फर्म डेल्हीवरी (Delhivery) अपनी प्रतिद्वंद्वी ईकॉम एक्सप्रेस लिमिटेड (Ecom Express Limited) का अधिग्रहण करेगी. Delhivery ने घोषणा की है कि उसने 1,400 करोड़ रुपये में ईकॉम एक्सप्रेस में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह अधिग्रहण, जिसमें 99.4 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है, भारत के फ्रेगमेंटेड लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सबसे बड़े कंसोलिडेशन में से एक है.
डेल्हीवरी ने शेयर बाजार को दी जानकारी
डेल्हीवरी ने एक बयान में बताया है कि कंपनी के बोर्ड ने शेयर परचेज एग्रीमेंट के एग्जीक्यूशन को मंजूरी दे दी है और डेफिनिटिव एग्रीमेंट साइन हो गया है. सौदे के तहत ईकॉम एक्सप्रेस में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी जाएगी. खरीद के पूरा होने के बाद ईकॉम, डेल्हीवरी की सहायक कंपनी बन जाएगी. डेल्हीवरी ने शेयर बाजारों को बताया है कि अगर शेयर परचेज एग्रीमेंट को एक्सटेंड नहीं किया जाता है तो यह खरीद इस एग्रीमेंट के एग्जीक्यूशन की तारीख से 6 महीने के अंदर पूरी हो जाएगी. इस सौदे को अभी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से मंजूरी मिलना बाकी है.
कंपनी के अधिकारियों ने क्या कहा?
डेल्हीवरी के एमडी और सीईओ साहिल बरुआ ने बयान में कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था को कॉस्ट एफिशिएंसी, स्पीड और लॉजिस्टिक्स की पहुंच में लगातार सुधार की जरूरी है. हमारा मानना है कि यह खरीद हमें इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, नेटवर्क और लोगों में लगातार बोल्ड इनवेस्टमेंट्स के माध्यम से दोनों कंपनियों के ग्राहकों को बेहतर सर्विस देने में सक्षम बनाएगी, ईकॉम एक्सप्रेस के फाउंडर्स और मैनेजमेंट ने एक हाई क्वालिटी वाला नेटवर्क और टीम बनाई है, जो डेल्हीवरी के ऑपरेशंस में इंटीग्रेट होने के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही है."
ईकॉम एक्सप्रेस के फाउंडर के. सत्यनारायण ने कहा, "डेल्हीवरी भारत की एक दिग्गज फुली इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर्स से एक है. यह ईकॉम एक्सप्रेस के विकास के अगले चरण के लिए आदर्श शेयरहोल्डर होगी. इस खरीद और इसके अंतर्निहित तालमेल से, भारत भर के कारोबारों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को भी दो समान विचारधारा वाली कंपनियों के साथ आने से बहुत फायदा होगा."
2012 में बनी थी ईकॉम एक्सप्रेस
2012 में स्थापित ईकॉम एक्सप्रेस ने एक समय सॉफ्टबैंक, सीडीसी ग्रुप (ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट) और पार्टनर्स ग्रुप सहित प्रमुख निवेशकों को आकर्षित किया था. वित्त वर्ष 2024 में ईकॉम एक्सप्रेस ने 2,607 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया. जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई और फंडिंग खत्म होती गई, कंपनी को अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा. अधिग्रहण का समय भी सवाल उठाता है. ईकॉम एक्सप्रेस पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसके डिस्क्लोजर जांच के दायरे में आने के बाद इसका आईपीओ प्लान को चुपचाप स्थगित कर दिया गया.
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