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कैबिनेट ने ₹1,878 करोड़ की राजमार्ग और ₹1,332 करोड़ की रेलवे परियोजनाओं को दी मंजूरी
मोदी सरकार ने ज़ीरकपुर बायपास और आधुनिक सिंचाई योजनाओं को मंजूरी दी – इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती को बढ़ावा देने की बड़ी पहल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. एक रेलवे नेटवर्क को हल्का करने के लिए और दूसरा सिंचाई सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए.
जिरकपुर बाईपास से उत्तरी शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक कम होगा
कैबिनेट ने पंजाब और हरियाणा में 19.2 किलोमीटर लंबा, छह लेन वाला जिरकपुर बाईपास बनाने की मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट की लागत 1,878.31 करोड़ रुपये है और इसे हाइब्रिड एन्युटी मोड में पूरा किया जाएगा. यह बाईपास NH-7 (जिरकपुर-पटियाला) को NH-5 (जिरकपुर-परवाणू) से जोड़ेगा, जिससे जिरकपुर और पंचकुला जैसे शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक कम होगा. इससे दिल्ली, पटियाला, मोहाली एयरोसिटी और हिमाचल प्रदेश जैसे प्रमुख इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी घटेगा.
यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंडीगढ़-मोहाली-पंचकुला के शहरी क्षेत्र में एक रिंग रोड बनाना है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह बाईपास पंजाब सरकार की मास्टर प्लान के अनुरूप है और क्षेत्र में ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद करेगा.
दक्षिण भारत में रेलवे के लिए नई सुविधाएं
कैबिनेट ने लंबे समय से रुकी हुई 104 किलोमीटर लंबी तिरुपति–पाकला–कटपड़ी रेलवे लाइन को डबल करने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के हिस्सों में फैला है और इसकी लागत 1,332 करोड़ रुपये है. इस अपग्रेड से रेल यात्रा की क्षमता बढ़ेगी और व्यस्त रेलवे मार्ग पर ट्रैफिक कम होगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई की सेवाओं की गति और क्षमता में सुधार होगा.
PMKSY के तहत 1,600 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना
कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2025–2026 के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का नाम है "आधुनिक कमांड एरिया विकास और जल प्रबंधन (M-CADWM)" और इसके लिए शुरू में 1,600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस योजना का मकसद है खेतों तक पानी पहुँचाने की पक्की और आधुनिक व्यवस्था बनाना. इसके तहत नहरों और अन्य जल स्रोतों से खेतों तक दबाव वाली पाइप लाइनों के जरिए पानी पहुँचाया जाएगा। इससे सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation) को बढ़ावा मिलेगा.
यह योजना देश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए चलाई जाएगी और राज्य सरकारों को इसमें भाग लेने के लिए चुनौती आधारित तरीका (challenge fund approach) अपनाया जाएगा. इस योजना में स्थायी सिंचाई व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पानी उपयोगकर्ता समितियों (Water User Societies - WUS) को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) से जुड़ी होंगी.
इसके अलावा, सरकार चाहती है कि युवा भी खेती की ओर आकर्षित हों, इसलिए इस योजना में आधुनिक और किफायती सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इन सभी परियोजनाओं से यह साफ होता है कि सरकार का ध्यान बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ग्रामीण कृषि विकास दोनों पर है, ताकि आने वाले समय में देश की खेती और ढांचा दोनों मजबूत हो सकें.
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