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बजट 2026-27 में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव, CCUS के लिए ₹20,000 करोड़, नए फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्ग और हाई-स्पीड रेल का ऐलान
इन पहलों से न केवल लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और संतुलित क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में पेश आम बजट 2026-27 में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बहुस्तरीय रणनीति का ऐलान किया. बजट में कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीक के लिए अगले पांच वर्षों में ₹20,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही नए फ्रेट कॉरिडोर, अंतर्देशीय जलमार्ग और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की गई है.
CCUS तकनीक को मिलेगा ₹20,000 करोड़ का समर्थन
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में CCUS तकनीकों को विकसित करने और उन्हें व्यावसायिक स्तर पर लागू करने के लिए ₹20,000 करोड़ का निवेश करेगी. इसका उद्देश्य उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र को कम-कार्बन प्रणाली की ओर ले जाना है, खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां उत्सर्जन घटाना चुनौतीपूर्ण है.
सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को जलवायु लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी मजबूती देगी.
नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्ग
पर्यावरण के अनुकूल माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की है. यह कॉरिडोर पूर्व में पश्चिम बंगाल के दानकुनी से लेकर पश्चिम में गुजरात के सूरत तक विकसित किया जाएगा. इसके अलावा अगले पांच वर्षों में 20 नए अंतर्देशीय जलमार्गों को परिचालन में लाया जाएगा. इसकी शुरुआत ओडिशा के नेशनल वाटरवे-5 से होगी.
नेशनल वाटरवे-5 से खनिज और उद्योग क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
नेशनल वाटरवे-5 के तहत ओडिशा के तालचेर और अंगुल जैसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों से जोड़ा जाएगा. यह जलमार्ग पारादीप और धामरा बंदरगाहों से भी कनेक्ट होगा, जिससे निर्यात और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलेगा. अंतर्देशीय जल परिवहन को समर्थन देने के लिए वाराणसी और पटना में इनलैंड शिपिंग के लिए विशेष शिप रिपेयर इकोसिस्टम भी विकसित किया जाएगा.
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रहेगा फोकस
शहरी बुनियादी ढांचे पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को जारी रखेगी. इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विकास का लाभ सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित न रहे.
सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव
बजट में टिकाऊ यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की गई है. ये कॉरिडोर प्रमुख शहरों को ग्रोथ कनेक्टर के रूप में जोड़ेंगे.
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी तक होंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि ये कॉरिडोर पर्यावरण के अनुकूल यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रमुख शहरी केंद्रों के बीच आर्थिक संपर्क को मजबूत करेंगे.
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर
कुल मिलाकर बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे के विस्तार को पर्यावरणीय लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर खास जोर दिया गया है. CCUS जैसी कम-कार्बन तकनीकों, रेलवे और जलमार्गों में निवेश से लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ने, उत्सर्जन घटने और क्षेत्रीय विकास को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर आम बजट 2026-27 में सरकार ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने की स्पष्ट कोशिश की है. CCUS जैसी उन्नत तकनीकों में निवेश, नए फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्गों का विस्तार और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की योजना यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख होगा.
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