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वैश्विक संकट के बीच भी भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर, अप्रैल में 13.8% की छलांग
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में भारत का वस्तु निर्यात 13.8% बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का सर्वोच्च स्तर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 39 minutes ago
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद भारत के विदेश व्यापार ने अप्रैल में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. वस्तु निर्यात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन इसी दौरान सोने-चांदी के भारी आयात ने व्यापार घाटे को भी बढ़ा दिया. वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के अनुसार, यह स्थिति भारत के बाहरी व्यापार में तेजी और असंतुलन दोनों को दर्शाती है.
अप्रैल में निर्यात 4 साल के उच्च स्तर पर
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में भारत का वस्तु निर्यात 13.8% बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का सर्वोच्च स्तर है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज हुई है जब पश्चिम एशिया में संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित थी. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, कमोडिटी कीमतों में तेजी और भारतीय उद्योगों द्वारा नए बाजारों में विस्तार की रणनीति ने निर्यात को मजबूती दी.
आयात में भी उछाल, व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर
आयात में भी अप्रैल के दौरान 10% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 71.94 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले छह महीनों का उच्च स्तर है. इस बढ़ोतरी का बड़ा कारण सोना और चांदी का भारी आयात रहा. इसके चलते व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है.
पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स ने संभाली निर्यात की रफ्तार
निर्यात वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की अहम भूमिका रही. पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 34.7% बढ़कर 9.59 अरब डॉलर हो गया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात 40.3% की छलांग लगाकर 5.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
सोने-चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी
आयात के मोर्चे पर सबसे बड़ा असर कीमती धातुओं से पड़ा. सोने का आयात 81.7% बढ़कर 5.63 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात दोगुने से अधिक होकर 41.10 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया. इस वृद्धि ने कुल आयात बिल को काफी बढ़ा दिया.
सेवाओं के व्यापार में भी मजबूत प्रदर्शन
सेवा क्षेत्र में भी भारत ने सकारात्मक प्रदर्शन किया. अप्रैल में सेवाओं का निर्यात 13.4% बढ़कर 37.24 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का आयात घटकर 16.66 अरब डॉलर रह गया. इससे भारत को लगभग 20.58 अरब डॉलर का सेवा व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अंतिम आंकड़े बाद में जारी किए जाएंगे.
वैश्विक तनाव का क्षेत्रीय व्यापार पर असर
पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के कुछ प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी दिखा. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ व्यापार में निर्यात और आयात दोनों में 30% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. कच्चे तेल के आयात में भी 10% की गिरावट रही और यह 18.63 अरब डॉलर पर आ गया.
अमेरिका अप्रैल में भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जहां निर्यात 8.48 अरब डॉलर तक पहुंचा. वहीं आयात 4.7% घटकर 5.27 अरब डॉलर रहा. सिंगापुर को निर्यात लगभग तीन गुना बढ़कर 3.20 अरब डॉलर हो गया. चीन को निर्यात 27% बढ़कर 1.77 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन से आयात 20.9% बढ़कर 11.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा.
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