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एयर इंडिया को FY26 में 2.8 अरब डॉलर का भारी घाटा, बढ़ती चुनौतियों का दबाव जारी

भू-राजनीतिक तनाव, एयरस्पेस प्रतिबंध और बढ़ती ईंधन लागत ने टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन एयर इंडिया के पुनर्गठन प्रयासों पर भारी दबाव डाला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

एयर इंडिया (Air India) ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में लगभग 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर का भारी वार्षिक घाटा दर्ज किया है, जो कंपनी के सामने मौजूद परिचालन और वैश्विक चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाता है. यह जानकारी सिंगापुर एयरलाइन्स (Singapore Airlines) द्वारा साझा की गई, जिसके पास एयर इंडिया में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है. कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष मार्च 2026 तक एयर इंडिया को 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर का नुकसान हुआ. यह घाटा निजीकरण के बाद एयर इंडिया के सबसे बड़े नुकसान में से एक माना जा रहा है और इसके चल रहे बहु-वर्षीय टर्नअराउंड प्लान की जटिलताओं को उजागर करता है.

परिचालन दबाव में तेजी

एयर इंडिया का प्रदर्शन कई उद्योग-स्तरीय समस्याओं से प्रभावित हुआ है, जिनमें सप्लाई चेन बाधाएं, एयरस्पेस प्रतिबंध और जेट ईंधन की ऊंची कीमतें शामिल हैं. भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान संघर्ष और पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद रखने के कारण एयरलाइंस को लंबे रूट अपनाने पड़े हैं. इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इन परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता में भी कटौती करनी पड़ी है, जिससे कई विदेशी रूट्स को सीमित या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है.

टर्नअराउंड रणनीति पर असर

बढ़ता घाटा एयर इंडिया के पुनर्गठन रोडमैप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसमें बेड़े का आधुनिकीकरण, नेटवर्क विस्तार और सेवा सुधार शामिल हैं. ऑडिटर्स ने सिंगापुर एयरलाइन्स के निवेश को लेकर “मूल्यह्रास (impairment)” के संकेत भी बताए हैं और मौजूदा अनिश्चितता व चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों की ओर इशारा किया है. हालांकि वित्तीय दबाव के बावजूद सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया के साथ अपनी दीर्घकालिक साझेदारी पर भरोसा दोहराया है और भारत को तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बताया है. 

प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी

एयर इंडिया की सीमित क्षमता का फायदा वैश्विक एयरलाइंस जैसे Lufthansa और Cathay Pacific उठा रही हैं. इससे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है. साथ ही, कंपनी को विमान डिलीवरी में देरी, मेंटेनेंस बाधाएं और सप्लाई चेन समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे विस्तार की गति प्रभावित हुई है.

आने वाले समय में उच्च ईंधन लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितता लाभप्रदता पर दबाव बनाए रख सकती है. हालांकि एयर इंडिया ने बेड़े के उन्नयन, ग्राहक अनुभव और परिचालन दक्षता में सुधार किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी मुनाफे के लिए बाहरी परिस्थितियों का स्थिर होना और टर्नअराउंड योजना का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक होगा.

एयर इंडिया का अगला वित्तीय प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या वह वैश्विक विमानन क्षेत्र में अपनी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी को फिर से हासिल कर पाएगी या नहीं.
 


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