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पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर फूटा गिग वर्कर्स का गुस्सा, देशभर में 5 घंटे की हड़ताल
वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 43 minutes ago
देशभर में ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स ने बढ़ती ईंधन कीमतों और कम भुगतान दरों के खिलाफ शनिवार को 5 घंटे की अस्थायी हड़ताल का आह्वान किया है. गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेवाएं बंद रखने की अपील की है. इस हड़ताल का असर कैब बुकिंग और फूड डिलीवरी जैसी सेवाओं पर पड़ सकता है.
यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और ऐप कंपनियों की कम भुगतान दरों के कारण हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है.
सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन की अपील
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर देशभर के गिग वर्कर्स से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की. यूनियन ने कहा कि ऐप कंपनियां किराए और इंसेंटिव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं. जबकि ड्राइवरों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. GIPSWU के मुताबिक. बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा भुगतान ढांचा वर्कर्स के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी
हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है. वहीं हैदराबाद में पेट्रोल 110.8 रुपए प्रति लीटर और डीजल 98.9 रुपए प्रति लीटर हो गया है.
बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है.
‘कमाई से ज्यादा खर्च बढ़ रहा है’
कैब ड्राइवर्स का कहना है कि हर बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर सबसे ज्यादा असर ड्राइवरों पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि ईंधन की लागत बढ़ने के बावजूद किराए में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती. उनका कहना है कि कमीशन और ईंधन का खर्च निकालने के after बहुत कम पैसा बचता है. कई बार घर चलाना भी मुश्किल हो जाता है. कई डिलीवरी वर्कर्स ने भी कहा कि उनका ज्यादातर समय सड़क पर गुजरता है. ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे उनकी कमाई को प्रभावित करती हैं.
तेल कंपनियों पर भी बढ़ा दबाव
तेल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक. हालिया बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियां अभी भी अपनी लागत पूरी तरह वसूल नहीं कर पा रही हैं. क्रिसिल के अनुमान के अनुसार. सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर करीब 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की लागत फरवरी के 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मई में 106 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है. इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 75 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है.
बड़े आंदोलन की चेतावनी
गिग वर्कर्स का कहना है कि इस अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य सरकार और ऐप कंपनियों तक अपनी समस्याएं पहुंचाना है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और कम भुगतान के बीच परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है. वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली. तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है.
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