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वित्त वर्ष 2035 तक जीवन बीमा उद्योग में 14.5% की सालाना वृद्धि का अनुमान
कम बीमा पहुंच, बढ़ती आय और ग्राहकों की बदलती आवश्यकताएं विस्तार को मजबूती देंगी। नियामकीय बदलाव और उत्पादों में विविधता से बीमा पॉलिसियों की सुलभता बढ़ेगी और दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत का जीवन बीमा उद्योग वित्त वर्ष 2023 से 2035 के बीच लगभग 14.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की संभावना है. PL कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि देश की मजबूत आर्थिक स्थिति, वित्तीय समावेशन में सुधार और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के कारण होगी.
हालांकि पिछले वर्षों में उद्योग में स्थिर वृद्धि देखी गई है, फिर भी वित्त वर्ष 2024 में भारत में बीमा की पहुंच GDP का सिर्फ 2.8 प्रतिशत रही, जो विकसित देशों के 5.6 प्रतिशत के मुकाबले काफी कम है. प्रति व्यक्ति बीमा घनत्व (Insurance Density) भारत में मात्र 70 अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह 3,182 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है. यह अंतर भारत के बीमा उद्योग के लिए आने वाले दशकों में बड़े अवसर की ओर इशारा करता है. इसके साथ ही भारत की नाममात्र GDP में लगभग 10.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि और घरेलू बचतों का वित्तीय उत्पादों की ओर झुकाव इस संभावना को और मजबूत कर रहा है.
संरचनात्मक कारक जैसे कि मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र की कमी, बढ़ता मध्यवर्ग और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, बीमा उत्पादों की मांग को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे. विशेष रूप से प्रोटेक्शन प्लान और एन्युटी जैसे उत्पाद, जो वर्तमान में कम प्रचलित हैं, भविष्य में इस क्षेत्र की वृद्धि में बड़ा योगदान दे सकते हैं.
बीमा उत्पादों का स्वरूप भी बदल रहा है. अब तक यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स (ULIPs) बाजार में अग्रणी रहे हैं, लेकिन भविष्य में इनकी हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम होने की संभावना है. गारंटीड रिटर्न देने वाले नॉन-पार्टिसिपेटिंग (NPAR) उत्पाद लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. स्विस रे की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 83 प्रतिशत प्रोटेक्शन गैप है, जिसके चलते प्रोटेक्शन प्लान्स में फिर से रुचि बढ़ रही है. साथ ही, रिटायरमेंट और लंबी उम्र को ध्यान में रखते हुए एन्युटी योजनाओं की मांग भी बढ़ेगी.
बीमा वितरण के चैनल भी विविध हो रहे हैं. बैंकाश्योरेंस (Bancassurance), जो कुल बिक्री का 30 से 60 प्रतिशत तक हिस्सा रखता है, अब भी प्रमुख माध्यम है, लेकिन बीमा कंपनियां अब एजेंट नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों का विस्तार कर रही हैं. इसका उद्देश्य एक ही बैंक पर निर्भरता को घटाना और टियर-2 व टियर-3 शहरों में बीमा पहुंच बढ़ाना है.
नियामकीय सुधार भी इस क्षेत्र को नया आकार दे रहे हैं. हाल ही में सरेंडर वैल्यू और प्रबंधन खर्च (Expense of Management) से संबंधित दिशा-निर्देशों ने पारदर्शिता को बढ़ाया है. इसके अलावा, GST काउंसिल ने यह निर्णय लिया है कि सितंबर 2025 से जीवन बीमा प्रीमियम पर GST नहीं लगेगा. इससे बीमा कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, जिससे अल्पकालिक मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
PL कैपिटल का अनुमान है कि इससे वित्त वर्ष 2026 की एम्बेडेड वैल्यू (EV) में 20 से 100 आधार अंकों की कमी आ सकती है. हालांकि, बीमा कंपनियों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे मूल्य निर्धारण, कमीशन में बदलाव और संचालन में दक्षता के जरिए इस प्रभाव की भरपाई करेंगी. यह छूट ग्राहकों के लिए बीमा को अधिक सुलभ बनाएगी, पॉलिसी बनाए रखने की दर में सुधार लाएगी और बाजार में बीमा की पहुंच को मजबूत करेगी.
नई पॉलिसियों से होने वाली आय (Value of New Business या VNB) के मार्जिन, जो हाल ही में बेहतर पॉलिसी स्थायित्व और उत्पादों की विविधता के कारण बढ़े हैं, आने वाले वर्षों में भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है. PL कैपिटल का अनुमान है कि FY25 से FY28 के बीच जैसे-जैसे प्रोटेक्शन और NPAR उत्पादों का विस्तार होगा, मार्जिन में और वृद्धि देखने को मिलेगी.
बीमा क्षेत्र के मूल्यांकन में भी गिरावट आई है. वर्तमान में यह क्षेत्र एक साल आगे की P/EV के आधार पर लगभग 2 गुना के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 में 2.6 गुना था. यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकती है जो इस क्षेत्र में दीर्घकालिक वृद्धि की संभावना को देखते हुए निवेश करना चाहते हैं.
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