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एआई कंपनियों को प्राडक्ट लॉन्च करने से पहले यहां से लेना होगा ग्रीन सिग्नल
सरकार की ओर से ये एडवाइजरी डीपफेक वीडियो और एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वालों को रोकने के लिए उठाया जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के फायदों से परे अभी तक जो साइड इफेक्ट सामने आए हैं उसे देखते हुए भारत सरकार ने सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है. अब एआई कंपनियों को किसी भी प्रोडक्ट को लॉन्च करने से पहले उस पर सरकार का ग्रीन सिग्नल लेना होगा. इसे लेकर सरकार का मानना है कि इससे वो ज्यादा अनुशासित बन पाएंगी और कस्टमर को भी सही प्रोडक्ट मिल पाएगा.
केन्द्रीय मंत्री ने कही ये अहम बात
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केन्द्रीय आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस बारे में बताते हुए कहा कि इस तरह की एडवाइजरी से किसी भी कंपनी को नए प्रोडक्ट को प्रयोगशाला से प्लेटफॉर्म पर लाने में ज्यादा अनुशासित बनाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि ये बिना किसी गार्डरेल और डिस्क्लेमर के साथ बाजार में आए जिससे उपभोक्ता को ये पता चल सके कि आखिर क्या वास्तविक है. उन्होंने ये भी कहा कि एआई कंपनियों को ये सलाह दी गई है कि किसी भी तरह की गलत जानकारी (मिसइनफॉरर्मेशन) जैसे डीप फेक बनाने वाले या उसके पहले क्रिएटर की आईडी या नाम उस पर लेबल होकर आए.
टेस्टिंग मॉडल के लिए भी लेनी होगी अनुमति
केन्द्रीय आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि अगर वो किसी गलती पकड़ने वाले टूल(error prone) मॉडल को भी प्लेटफॉर्म पर लॉन्च करना चाहते हैं तो उसके लिए उन्हें सरकार की अनुमति लेनी होगी, और उसके लिए यूजर की सहमति की भी आवश्यकता होगी कि ये एक गलती पकड़ने वाला टूल है. ऐसा नहीं हो सकता है कि वो बाद में आकर कहें कि ये टूल टेस्टिंग में है.
कई डीपफेक वीडियो आ चुके हैं सामने
दरसअल डीपफेक वीडियो को लेकर जो समस्या सरकार के सामने आई है उससे निजात पाने के लिए सरकार ये कदम उठा रही है. जब कभी भी इंटरनेट पर डीपफेक वीडियो आता है और उसकी जांच की जाती है तो उसके क्रिएटर का ही पता नहीं चल पाता है. इस बारे में जब कंपनियों से पूछताछ होती है तो वो यही कह देती हैं कि ये टूल जांच के दौरान है. इसलिए पिछले कुछ मामलों से सबक लेते हुए अब सरकार ये कदम उठा रही है, जिससे भविष्य में अगर कोई ऐसा मामला आए तो उस पर कार्रवाई की जा सके.
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