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‘AI सुझाव दे सकता है, लेकिन हाथ से होने वाला काम नहीं कर सकता’: फैशन, फिल्मों और कड़ी प्रतिस्पर्धा पर रोमा जैन

फैशन डिजाइनर और स्टाइलिस्ट रोमा जैन ने अपने लेबल की शुरुआत, तेलुगु सिनेमा में काम करने, फैशन में AI के बढ़ते इस्तेमाल, Gen Z के स्टाइलिंग ट्रेंड्स और इंडस्ट्री में टिके रहने की चुनौतियों पर बात की

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

करीब एक दशक से फैशन इंडस्ट्री में काम कर रहीं हैदराबाद की फैशन डिजाइनर और स्टाइलिस्ट रोमा जैन के लिए सफलता का मतलब केवल किसी सेलिब्रिटी के साथ काम करना, किसी फिल्म से जुड़ना या बड़ी कलेक्शन लॉन्च करना नहीं है. उनके लिए किसी ग्राहक का दोबारा लौटकर आना भी एक बड़ी उपलब्धि है.

जैन ने BW Disrupt से बातचीत में कहा, “अगर मैं किसी क्लाइंट के लिए कस्टमाइजेशन कर रही हूं और वह दोबारा आकर मुझसे कुछ और करवाने को कहता है, तो यह भी मेरे लिए एक माइलस्टोन है.”

2014 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद जैन ने करीब सात से आठ महीने तक डिजाइनर शिवाली सिंह के साथ काम किया. इसके बाद उन्होंने स्वतंत्र रूप से काम शुरू किया और करीब 2016 में अपना लेबल शुरू किया.

समय के साथ उनका काम व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए डिजाइनिंग से आगे बढ़कर कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की स्टाइलिंग तक पहुंच गया.

2017 में जैन ने तेलुगु सिनेमा में फिल्म ‘Anando Brahma’ के साथ कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर काम शुरू किया. इसके बाद उन्होंने अभिनेता निखिल सिद्धार्थ के साथ एक अन्य तेलुगु फिल्म में काम किया. वह म्यूजिक वीडियो और एक डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट से भी जुड़ी हैं, जो अभी रिलीज नहीं हुआ है.

जैन ने अभिनेत्री तापसी पन्नू को भी स्टाइल किया है. अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने ब्यूटी पेजेंट की विजेताओं के साथ भी काम किया.

हालांकि फैशन और सिनेमा की चमक-दमक के पीछे एक ऐसी इंडस्ट्री भी है, जिसे जैन के मुताबिक अब संभालना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. जब उनसे फैशन में काम करने की सबसे बड़ी चुनौती के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था—“Surviving यानी टिके रहना.”

उनके मुताबिक पिछले एक दशक में खुद को डिजाइनर और स्टाइलिस्ट बताने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ी है. वहीं, टेक्नोलॉजी ने इंस्पिरेशन हासिल करने और नए आइडिया तैयार करने की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है.

उन्होंने कहा, “पहले हमारे पास बहुत ज्यादा डिजाइनर नहीं थे. लेकिन अब वे हर जगह हैं.”

AI फैशन बदल रहा है, लेकिन डिजाइनरों की जगह नहीं ले सकता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने फैशन इंडस्ट्री में हो रहे बदलाव को एक नया आयाम दिया है. अब कोई डिजाइनर किसी AI सिस्टम को किसी परिधान के बारे में बताकर कुछ ही समय में उसके विजुअल रेफरेंस या कॉन्सेप्ट हासिल कर सकता है. जब जैन ने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब इसके लिए काफी ज्यादा मैनुअल काम करना पड़ता था.

हालांकि, जैन नहीं मानतीं कि AI के आने से इंसानी डिजाइनरों की जरूरत खत्म हो जाएगी.

उन्होंने कहा, “अगर आप बहुत क्रिएटिव हैं और डिजाइनिंग में आपकी बहुत रुचि है, तो मुझे नहीं लगता कि AI आपका बिजनेस छीन सकता है.”

उनका तर्क आइडिया तैयार करने और उसे वास्तव में बनाने के बीच के अंतर पर आधारित है.

जैन ने कहा, “AI टाई एंड डाई नहीं कर सकता. AI हाथ से कढ़ाई नहीं कर सकता. AI DIY नहीं कर सकता.”

उनके मुताबिक फैशन में टेक्सटाइल, गारमेंट डिजाइन, स्टाइलिंग और क्राफ्ट्समैनशिप जैसी कई अलग-अलग चीजें शामिल हैं. AI रेफरेंस और सुझाव दे सकता है, लेकिन किसी डिजाइन को वास्तविक रूप देने और उस पर क्रिएटिव जजमेंट लगाने के लिए इंसानों की जरूरत अभी भी है.

उन्होंने कहा, “AI आपको सिर्फ सुझाव दे सकता है. AI आपको सिर्फ तस्वीरें दिखा सकता है, लेकिन बाकी काम हमें ही करना है.”

जेनरेटिव AI, वर्चुअल ट्राय-ऑन और 3D डिजाइन जैसी तकनीकों के फैशन इंडस्ट्री में तेजी से प्रवेश के बीच यह अंतर आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, जैन का मानना है कि टेक्नोलॉजी आखिरकार क्रिएटिविटी को खत्म नहीं कर सकती.

Gen Z फैशन को हमारी सोच से बेहतर समझता है

अगर टेक्नोलॉजी फैशन बनाने के तरीके को बदल रही है, तो युवा ग्राहक इस बात के नियम बदल रहे हैं कि फैशन को पहना कैसे जाए.

जैन Gen Z को लेकर खास तौर पर सकारात्मक हैं. इस पीढ़ी को अक्सर अलग-अलग तरह के कॉम्बिनेशन, लेयरिंग और तेजी से बदलते फैशन ट्रेंड्स के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है.

जैन ने कहा, “Gen Z के लोग हमसे कहीं ज्यादा स्मार्ट हैं.”

उनके मुताबिक जो चीजें पुरानी पीढ़ी को असामान्य लग सकती हैं, उनके पीछे अक्सर सोच होती है.

उन्होंने कहा, “वे जो भी पहन रहे हैं, उसे अच्छी तरह कैरी कर सकते हैं. अगर वे लेयरिंग कर रहे हैं, तो उन्हें बिल्कुल पता होता है कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं और यह अच्छा लगेगा या वे इसे कैरी कर पाएंगे या नहीं.”

जैन यह भी देखती हैं कि युवा डिजाइनर और ग्राहक अब अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़कर नए प्रयोग कर रहे हैं. इनमें इंजीनियरिंग और फैशन का मेल भी शामिल है. उनके मुताबिक ऐसी चीजें अब बनाई जा रही हैं, जिनकी कल्पना पिछली पीढ़ियां शायद ही कर पातीं.

यह प्रयोग सोशल मीडिया के कारण आए एक और बड़े बदलाव के साथ हो रहा है.

जिन डिजाइनरों ने उस दौर में अपना करियर बनाया था, जब इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या पेशेवर पहचान का पैमाना नहीं थी, उनके लिए पहचान के मानदंड बदल गए हैं.

जैन ने कहा, “अभी लोग यह नहीं देखते कि आपने कितना काम किया है. लोग देखते हैं कि आपके कितने फॉलोअर्स हैं, कितने कॉन्टैक्ट्स हैं या आप कितने लोकप्रिय हैं.”

हालांकि, वह नहीं मानतीं कि इंफ्लुएंसर्स प्रोफेशनल डिजाइनरों और स्टाइलिस्टों की जगह ले सकते हैं.

फैशन का मतलब आराम है, यह नहीं कि आप कितना शरीर दिखा रहे हैं

सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत ने सेलिब्रिटी आउटफिट्स, बॉडी इमेज और समाज की नजर में स्वीकार्य फैशन को लेकर बहस भी बढ़ा दी है.

जैन का मानना है कि कपड़े आखिरकार उस व्यक्ति के लिए सही होने चाहिए, जो उन्हें पहन रहा है.

सेलिब्रिटी आउटफिट्स पर होने वाली आलोचना को लेकर उन्होंने कहा कि लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह तय नहीं किया जाना चाहिए कि कोई आउटफिट सही है या नहीं.

उन्होंने कहा, “सैकड़ों लोग सैकड़ों बातें कहेंगे.”

जैन के लिए आराम सबसे महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा, “फैशन आराम के बारे में है, यह इस बारे में नहीं है कि आप कितना शरीर दिखा रहे हैं.”

यही सोच उनके अपने लेबल में भी दिखाई देती है.

जैन के मुताबिक फैशन की शुरुआत चीजें बनाने के जुनून के साथ हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह एक बिजनेस में बदल गया. अब चुनौती अपनी क्रिएटिव सोच और ग्राहकों की पसंद के बीच संतुलन बनाने की है.

उन्होंने कहा, “जब मैं अपने क्लाइंट के लिए कुछ कर रही होती हूं, तो मैं यह सुनिश्चित करती हूं कि वह उनकी कम्फर्ट जोन में भी हो, लेकिन उसमें कुछ creativity भी शामिल हो.”

इससे वह अपनी क्रिएटिव पहचान को बनाए रखते हुए ऐसा परिधान तैयार कर पाती हैं, जिसे ग्राहक आराम से पहन सके.

ज्यादा लोगों तक फैशन पहुंचाना चाहती हैं जैन

जैन फिलहाल हैदराबाद में हैं और अपने लेबल का भौगोलिक विस्तार करने की तत्काल योजना नहीं है. हालांकि, अगले पांच वर्षों में ब्रांड को बड़े स्तर पर विकसित करना उनकी महत्वाकांक्षा है.

उन्होंने कहा, “मैं हर किसी को स्टाइल करना चाहती हूं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ ऊंचे या निचले वर्ग या मिडिल क्लास के लोग.”

उनका मानना है कि फैशन को सिर्फ सेलिब्रिटी या अमीर लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.

उन्होंने कहा, “हर कोई इसे कर सकता है. आपको बस थोड़ी जानकारी और थोड़ी गाइडेंस की जरूरत है.”

रैपिड-फायर राउंड में जब जैन से उनकी अपनी स्टाइल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो शब्द चुने, “Pocket friendly” और “comfort”. ये दोनों शब्द उनकी बिजनेस फिलॉसफी को भी काफी हद तक दर्शाते हैं.

उनकी व्यक्तिगत फैशन पसंद भी भारतीय है. उन्होंने यूरोपीय लग्जरी के बजाय Indian couture को चुना और मनीष मल्होत्रा के बजाय सब्यसाची को पसंद किया. उन्होंने सब्यसाची को उस लग्जरी ब्रांड के तौर पर चुना, जिसे वह पसंद करती हैं.

सेलिब्रिटीज में जैन ने कृति सेनन को सबसे अच्छी ड्रेस पहनने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री बताया, जबकि पुरुष कलाकारों में शाहिद कपूर को चुना. दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जोनस में उन्होंने प्रियंका को चुना, जबकि शाहरुख खान और रणवीर सिंह में रणवीर सिंह उनकी पसंद रहे.

जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें किसी एक भारतीय आइकन को स्टाइल करने का मौका मिले, तो वह किसे चुनेंगी, उनका जवाब था, “रेखा जी.”

वह रेखा की वॉर्डरोब को भी सबसे ज्यादा पसंद करती हैं.

उन्होंने कहा, “मुझे उनकी साड़ी कलेक्शन बहुत पसंद है. मुझे उनका खुद को कैरी करने का तरीका पसंद है.”

एल्गोरिदम, वायरलिटी और तेजी से बदलते ट्रेंड्स से प्रभावित होती फैशन इंडस्ट्री के बीच जैन की सोच अब भी कुछ पारंपरिक चीजों पर टिकी है, क्राफ्ट्समैनशिप, आराम और व्यक्तिगत पहचान.

टेक्नोलॉजी रेफरेंस दे सकती है और सोशल मीडिया ऑडियंस दे सकता है, लेकिन जैन के लिए इनमें से कोई भी कपड़ों के पीछे मौजूद डिजाइनर की जगह नहीं ले सकता.


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