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भारत के विंड पावर सेक्टर में नई छलांग, 2030 तक 100 GW का लक्ष्य; मैन्युफैक्चरिंग, ऑफशोर और रिपावरिंग पर बढ़ा फोकस
58.14 GW पहुंची भारत की पवन ऊर्जा क्षमता, FY26 में रिकॉर्ड 6.05 GW जुड़ी; 43 GW से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन और 1,164 GW तक आंकी गई क्षमता
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 54 minutes ago
भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र अब सिर्फ क्लीन एनर्जी का जरिया नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और एनर्जी सिक्योरिटी का भी अहम आधार बनता जा रहा है. देश की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर 58.14 गीगावाट (GW) पहुंच गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 GW नई क्षमता जुड़ी, जो अब तक की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है. सरकार ने 2030 तक पवन ऊर्जा क्षमता को 100 GW और 2035 तक 155 GW करने का लक्ष्य रखा है.
इसी बढ़ते बाजार और सेक्टर की अगली विकास यात्रा पर चर्चा के लिए Windergy India 2026 का 8वां संस्करण 7 से 9 अक्टूबर 2026 तक चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित किया जाएगा. इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) के मुताबिक, 100 GW के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत को हर साल करीब 10 GW नई पवन क्षमता जोड़नी होगी. फिलहाल 43 GW से अधिक की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 150 मीटर हब हाइट पर देश की संभावित पवन ऊर्जा क्षमता 1,164 GW तक आंकी गई है.
100 GW के लक्ष्य के लिए उद्योग को साथ आना होगा
IWTMA के मानद सचिव और Suzlon Energy Ltd के प्रेसिडेंट - कॉरपोरेट अफेयर्स एंड रिटेल बिजनेस, दिनेश जगदाले ने कहा, "भारत के विंड सेक्टर ने साबित कर दिया है कि वह एक शुरुआती उद्योग से बढ़कर 58 GW से अधिक की स्थापित क्षमता और दुनिया भर में टर्बाइन निर्यात करने वाले मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस तक पहुंच सकता है. अब आगे का रास्ता स्पष्ट है - 2030 तक 100 GW और 2035 तक 155 GW. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मैन्युफैक्चरर्स, डेवलपर्स, नीति निर्माताओं और इनोवेटर्स के बीच सहयोग जरूरी है." उन्होंने कहा कि सेक्टर को अगले चरण में तेजी से विस्तार के लिए मिलकर काम करना होगा.
24 GW हुई घरेलू टर्बाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
विंड पावर की बढ़ती मांग के साथ भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी तेजी से मजबूत हुई है. देश में विंड टर्बाइन बनाने की वार्षिक क्षमता 2014 के करीब 10 GW से बढ़कर अब 24 GW हो गई है. इसमें 70-80 फीसदी तक घरेलू वैल्यू एडिशन है.
भारत अब सिर्फ घरेलू जरूरत पूरी करने वाला बाजार नहीं रहा. वित्त वर्ष 2025-26 में विंड इक्विपमेंट का एक्सपोर्ट 12,000 करोड़ रुपये को पार कर गया, जो करीब 50 फीसदी की वृद्धि है. इससे भारत के ग्लोबल विंड मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं.
Envision Energy India के ग्लोबल बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख और IWTMA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य सुमन नाग ने कहा, "जैसे-जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियां भारत से मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ा रही हैं, हम देश को ग्लोबल विंड एक्सपोर्ट हब के रूप में मजबूत करने और भारत के व्यापक एक्सपोर्ट लक्ष्य में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
WT-MARUT से सप्लाई चेन को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने IWTMA के साथ मिलकर WT-MARUT पहल शुरू की है. इसे भारत का पहला विंड सप्लाई-चेन पोर्टल बताया जा रहा है. इसका उद्देश्य विंड सेक्टर में तकनीकी क्षमता, सप्लाई चेन, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना है.
दिल्ली में Windergy India 2026 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम में MNRE के जॉइंट सेक्रेटरी राजेश कुलहरी ने कहा, "भारत का एनर्जी ट्रांजिशन अब सिर्फ मेगावाट जोड़ने तक सीमित नहीं है. यह एक पूरा इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने के बारे में है, जो कुशल रोजगार पैदा करे, विंड मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करे और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके सिस्टम लागत घटाए."
अब सिर्फ कम टैरिफ नहीं, प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता भी अहम
विंड सेक्टर के लिए टैरिफ और कॉस्ट ऑफ एनर्जी भी Windergy India 2026 के प्रमुख एजेंडे में रहेंगे. उद्योग का मानना है कि अब परियोजनाओं की व्यवहारिकता केवल सबसे कम बोली वाले टैरिफ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. समय पर पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA), ट्रांसमिशन की उपलब्धता और ऐसे बिडिंग स्ट्रक्चर जरूरी हैं, जो विंड, हाइब्रिड और फर्म रिन्यूएबल पावर से मिलने वाली अतिरिक्त सिस्टम वैल्यू को ध्यान में रखें.
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी बाजार में स्टैंडअलोन विंड और सोलर से आगे बढ़कर विंड-सोलर हाइब्रिड, स्टोरेज-बैक्ड और Firm & Dispatchable Renewable Energy (FDRE) परियोजनाओं की भूमिका बढ़ रही है. इससे बिजली की उपलब्धता को ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है.
लॉजिस्टिक्स और ग्रिड कनेक्टिविटी बनेगी अहम कड़ी
विंड टर्बाइन और उनके बड़े कंपोनेंट्स की आवाजाही के लिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी सेक्टर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. रूट प्लानिंग, परमिट, हेवी-लिफ्ट मूवमेंट, वेयरहाउसिंग और स्पेयर-पार्ट लॉजिस्टिक्स में दक्षता परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन और रखरखाव के लिए जरूरी है.
डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स सिस्टम से सप्लाई चेन में विजिबिलिटी बढ़ाने के साथ उपकरणों की आवाजाही को भी अधिक कुशल बनाया जा सकता है. वहीं, जमीन, ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी और विभिन्न मंजूरियों से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना भी सेक्टर की तेज ग्रोथ के लिए जरूरी होगा.
रिपावरिंग से पुराने प्रोजेक्ट्स की क्षमता बढ़ाने का मौका
भारत में 19,000 से अधिक विंड टर्बाइन जनरेटर (WTG) पहले से स्थापित हैं, जिनमें बड़ी संख्या पुरानी और 1 MW से कम क्षमता वाली टर्बाइनों की है. खासकर हाई-विंड जोन में मौजूद इन पुराने प्रोजेक्ट्स को आधुनिक टर्बाइन टेक्नोलॉजी से रिपावर करने की बड़ी संभावना है.
उद्योग के मुताबिक, रिपावरिंग के जरिए पुराने टर्बाइनों की क्षमता उपयोग दर (CUF) को मौजूदा 14-15 फीसदी से बढ़ाकर करीब 30 फीसदी तक ले जाया जा सकता है. इससे बिना बड़े पैमाने पर नई जमीन की जरूरत के मौजूदा विंड साइट्स से ज्यादा बिजली उत्पादन संभव होगा.
ऑफशोर विंड बनेगा अगला बड़ा फ्रंटियर
भारत के विंड सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी ऑफशोर विंड एनर्जी हो सकती है. सरकार और उद्योग की ओर से ऑफशोर विंड परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है और 1 GW के पायलट प्रोजेक्ट को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ऑफशोर विंड के विस्तार से भारत के तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्वच्छ बिजली उत्पादन के साथ-साथ नए मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं.
Windergy India बनेगा ग्लोबल विंड इंडस्ट्री का मंच
IWTMA और PDA Ventures Pvt. Ltd. द्वारा आयोजित Windergy India 2026 को Ministry of Power और MNRE का समर्थन प्राप्त है. आयोजन में 20,000 से अधिक प्रतिभागियों, 400 से ज्यादा डेलीगेट्स और 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है. करीब 350 प्रदर्शक अपनी तकनीक, उत्पाद और समाधान पेश करेंगे.
PDA Ventures Pvt. Ltd. के चेयरमैन एवं CEO प्रदीप देवैया ने कहा, "Windergy India एक इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और कॉन्फ्रेंस के रूप में पूरे विंड इकोसिस्टम को एक मंच पर लाने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है. भारत जब अपनी क्षमता से जुड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, तब हम इस उद्योग को कनेक्ट और ग्रो करने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे."
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम 'Wind – Powering India's Energy Resilience' रखी गई है. दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के साथ Academia Session भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विंड सेक्टर की बढ़ती कुशल वर्कफोर्स जरूरतों पर चर्चा होगी. आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब भारत की विंड इंडस्ट्री घरेलू क्षमता विस्तार, एक्सपोर्ट, ऑफशोर विंड और रिपावरिंग के जरिए अपने अगले बड़े ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रही है.
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