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भारत की आर्थिक ताकत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा, 35 साल बाद JCR ने दी ‘A-’ रेटिंग
मजबूत आर्थिक ग्रोथ, घटता राजकोषीय घाटा और बेहतर होती बैंकिंग व्यवस्था के बीच JCR ने भारत की सॉवरेन रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी है. एजेंसी ने रेटिंग का आउटलुक ‘स्टेबल’ रखा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत की आर्थिक साख को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR ने करीब 35 साल बाद भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर ‘A-’ कर दिया है. एजेंसी ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- की है और आउटलुक ‘स्टेबल’ रखा है. JCR ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, राजकोषीय स्थिति में सुधार, मजबूत वित्तीय प्रणाली और बेहतर बाहरी स्थिति को प्रमुख वजह बताया है. यह अपग्रेड ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं.
35 साल बाद मिली A- रेटिंग
JCR के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में करीब 7 फीसदी की मजबूत विकास दर बनाए रखी है. निजी खपत और सरकारी निवेश से ग्रोथ को लगातार समर्थन मिला है. पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो RBI के 7 फीसदी के अनुमान से अधिक है. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा घटकर GDP के 4.4 फीसदी पर आ गया, जो एक साल पहले 4.7 फीसदी था.
मजबूत इकोनॉमी बनी अपग्रेड की बड़ी वजह
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक विकास और उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत कदम उठाए हैं. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, GST जैसे सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता पूंजीगत खर्च अर्थव्यवस्था की बुनियाद को मजबूत कर रहे हैं. JCR को उम्मीद है कि भारत चालू वित्त वर्ष में भी 6 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकता है.
बैंकिंग सेक्टर की बेहतर सेहत का भी असर
JCR ने भारत की वित्तीय प्रणाली में आए सुधार को भी रेटिंग अपग्रेड का अहम आधार माना है. दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC), सरकारी पूंजी निवेश और RBI की निगरानी से बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है. इससे भारतीय बैंकिंग सिस्टम पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हुआ है.
फिस्कल डेफिसिट और सरकारी कर्ज पर फोकस
सरकार लगातार राजकोषीय घाटे और कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में काम कर रही है. वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटा GDP के 4.3 फीसदी के बराबर रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, केंद्र का कर्ज-GDP अनुपात 2025-26 के 56.1 फीसदी से घटकर 2026-27 में 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है. सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक इस अनुपात को 50 फीसदी तक लाना है.
विदेशी मुद्रा भंडार ने भी दिया सहारा
भारत की बाहरी स्थिति को भी JCR ने मजबूत बताया है. एजेंसी के मुताबिक चालू खाते का घाटा नियंत्रण में है और सेवाओं के निर्यात से मिलने वाला अधिशेष इसे सहारा देता है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त स्तर पर है. 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया था.
दूसरी रेटिंग एजेंसियां भी भारत पर भरोसा जता रहीं
JCR का यह अपग्रेड ऐसे समय हुआ है जब कई अन्य रेटिंग एजेंसियां भी भारत की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार कर चुकी हैं. S&P Global Ratings, Morningstar DBRS और जापान की R&I समेत कई एजेंसियों ने पिछले समय में भारत की रेटिंग में सुधार किया है या सकारात्मक आकलन दिया है. हालांकि, JCR ने राजकोषीय घाटे, राज्यों के बीच आर्थिक असमानता और चुनावों के दौरान राजकोषीय प्रबंधन जैसे जोखिमों को अभी भी चुनौती बताया है.
कुल मिलाकर, JCR की A- रेटिंग भारत की मजबूत होती आर्थिक बुनियाद, बेहतर राजकोषीय स्थिति और वित्तीय प्रणाली पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है. रेटिंग में सुधार से भारत की अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होने के साथ भविष्य में विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी समर्थन मिल सकता है.
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