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डेटा सेंटर में ₹250 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश, फिर भी 2030 तक GDP में योगदान सिर्फ 0.13%

मूडीज के मुताबिक भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में भारी निवेश के बावजूद आर्थिक वृद्धि और रोजगार पर सीमित असर पड़ेगा. 2030 तक डेटा सेंटर से GDP में करीब 0.13% और रोजगार में महज 0.02% की बढ़ोतरी का अनुमान है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

भारत में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणाएं हो चुकी हैं. हालांकि, इतनी बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं के बावजूद 2030 तक इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) के मुताबिक, 2030 तक डेटा सेंटर सेक्टर भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सिर्फ 0.13% का योगदान दे सकता है.

Moody’s का अनुमान है कि अगले चार वर्षों में डेटा सेंटर उद्योग से रोजगार में केवल 0.02% की बढ़ोतरी होगी. एजेंसी के मुताबिक, यह योगदान मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों के अनुमानित योगदान से भी कम है.

सरकार के अनुमान के मुताबिक, भारत 2030 तक 7.3 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इस आधार पर GDP में 0.13% योगदान करीब 9.5 अरब डॉलर के बराबर होगा.

डेटा सेंटर में तेजी से बढ़ रहा निवेश

डेटा सेंटर भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं. घरेलू कारोबारी समूहों, वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों और स्वतंत्र ऑपरेटरों की ओर से इस सेक्टर में बड़े निवेश की घोषणाएं की गई हैं. पिछले 12 महीनों में डेटा सेंटर क्षेत्र में 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश का ऐलान हुआ है. गूगल और अडानी ने विशाखापत्तनम में 1 गीगावाट (GW) क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. वहीं, Tata Consultancy Services (TCS) ने अक्टूबर 2025 में 1 GW क्षमता वाले HyperVault प्रोजेक्ट के लिए 7 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी. रिसर्च फर्म Wood Mackenzie ने 27 जुलाई को अनुमान लगाया था कि भारत की नेट एक्टिव डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 12 GW तक पहुंच सकती है.

सरकार भी दे रही है बढ़ावा

भारत को ग्लोबल डेटा सेंटर हब बनाने के लिए सरकार की ओर से भी कई कदम उठाए गए हैं. 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 2047 तक पूरी टैक्स छूट देने का ऐलान किया था. यह सुविधा भारत के डेटा सेंटर में डेटा होस्ट करने या वर्कलोड चलाने वाली कंपनियों के लिए है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच डेटा सेंटर की अहमियत और बढ़ गई है. AI के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और स्टोरेज क्षमता की जरूरत होती है. इसी वजह से Tata Sons, Reliance Industries, Adani Enterprises, Larsen & Toubro और Bharti Enterprises जैसे बड़े कारोबारी समूह भी इस सेक्टर में उतर चुके हैं.

बड़े निवेश के बावजूद GDP पर सीमित असर क्यों?

Moody’s के मुताबिक, डेटा सेंटर में होने वाला निवेश और निर्माण से पैदा होने वाला रोजगार रकम के लिहाज से काफी बड़ा है, लेकिन देश की पूरी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में इसका प्रभाव छोटा है. Moody’s के विश्लेषकों Deborah Tan और अन्य ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डेटा सेंटर में प्रस्तावित निवेश रणनीतिक और स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलहाल यह इतना बड़ा नहीं है कि देश की कुल आर्थिक वृद्धि की तस्वीर में बड़ा बदलाव ला सके.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत की कुल नेट राष्ट्रीय बिजली खपत में डेटा सेंटर की हिस्सेदारी 5% से कम रहने का अनुमान है. इसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों की खपत पर भी इसका असर सीमित रहने की संभावना है.

पूंजी-आधारित उद्योग होने से रोजगार कम

डेटा सेंटर उद्योग के GDP और रोजगार पर सीमित प्रभाव की एक बड़ी वजह इसका पूंजी-आधारित बिजनेस मॉडल है. डेटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए जमीन, बिजली, कूलिंग सिस्टम और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च करना पड़ता है. इसके बावजूद इन सुविधाओं में निवेश के आकार की तुलना में कर्मचारियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है. यही वजह है कि डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में अरबों डॉलर का निवेश होने के बावजूद GDP और रोजगार में उसी अनुपात में बढ़ोतरी जरूरी नहीं है.

कुल मिलाकर, भारत में डेटा सेंटर सेक्टर AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोनॉमी की बढ़ती जरूरतों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन रहा है. हालांकि, Moody’s के आकलन के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस सेक्टर का राष्ट्रीय GDP और रोजगार पर प्रत्यक्ष प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित ही रहने की संभावना है.


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