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कैनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट्स से वसूले ₹510 करोड़, डीआरटी के आदेश के बाद चुकाया पूरा बकाया
2020 में एनपीए बने खाते से जुड़ी लंबे समय से चल रही वसूली प्रक्रिया खत्म, दिवालिया प्रक्रिया और संपत्ति बिक्री की कार्रवाई के बीच बैंक को मिली पूरी रकम
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
कैनरा बैंक ने सोने और आभूषण निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स से करीब ₹510 करोड़ की बकाया राशि वसूल कर ली है. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के आदेश के बाद कंपनी ने बैंक का पूरा बकाया चुका दिया. इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ बैंक की लंबे समय से चल रही वसूली प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है.
राजेश एक्सपोर्ट्स का बैंक खाता 2020 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए बन गया था. इसके बाद कैनरा बैंक ने बकाया वसूली के लिए कई कानूनी रास्ते अपनाए. बैंक ने 2021 में ऋण वसूली न्यायाधिकरण का रुख किया था. इसके अलावा राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की गई थी. बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन कानून यानी सरफेसी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की थी.
डीआरटी ने कैनरा बैंक के पक्ष में दिया फैसला
ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने अंततः कैनरा बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स को बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया था. आदेश में कहा गया था कि यदि कंपनी बकाया नहीं चुकाती है तो बैंक अपनी गिरवी रखी संपत्तियों को बेच सकता है.
इस आदेश को लागू कराने के लिए कैनरा बैंक ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया. उच्च न्यायालय ने डीआरटी के आदेश को लागू करने की अनुमति दे दी. इसके बाद राजेश एक्सपोर्ट्स की ओर से बैंक को बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया.
राजेश एक्सपोर्ट्स का सबसे बड़ा कर्जदाता था कैनरा बैंक
कैनरा बैंक, राजेश एक्सपोर्ट्स का सबसे बड़ा कर्जदाता था. बैंक का बकाया करीब ₹509-510 करोड़ था. दिवालिया प्रक्रिया के जरिए खाते के समाधान की कोशिशों में अड़चन आने के बाद बैंक ने वसूली के लिए कई कानूनी विकल्पों का सहारा लिया.
इस साल की शुरुआत में कैनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर अपने ₹509.37 करोड़ के कर्ज को संकटग्रस्त कर्ज में निवेश करने वाले निवेशकों को बेचने की पेशकश भी की थी. बैंक की दिवालिया याचिका पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था. ऐसे में ₹510 करोड़ की ताजा वसूली बैंक की उस योजना से अलग है, जिसमें संकटग्रस्त कर्ज को बेचने का विकल्प अपनाया गया था.
सोने के आयात के लिए जारी साख पत्रों से जुड़ा था मामला
डीआरटी में चल रहा मामला राजेश एक्सपोर्ट्स के सोने के आयात के लिए कैनरा बैंक की ओर से जारी किए गए साख पत्रों से जुड़ा था. साख पत्रों की अवधि पूरी होने पर बैंक को संबंधित भुगतान करना पड़ा था, जबकि इसके बाद कंपनी को बैंक की राशि वापस करनी थी. 2020 में कंपनी की भुगतान क्षमता पर दबाव बढ़ने के बाद इन देनदारियों का संकट बढ़ गया और बैंक खाता एनपीए हो गया.
सेबी की कार्रवाई के बीच हुई ₹510 करोड़ की वसूली
राजेश एक्सपोर्ट्स से यह वसूली ऐसे समय हुई है जब कंपनी नियामकीय जांच का भी सामना कर रही है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने जून 2026 के अपने अंतरिम आदेश में कंपनी में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया था.
सेबी की जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया था कि कंपनी की ओर से रिपोर्ट किए गए राजस्व का 97-99 फीसदी तक हिस्सा कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है. इसके अलावा सेबी ने राजेश मेहता को कंपनी की प्रतिभूतियों में लेनदेन करने से भी रोक दिया था. कैनरा बैंक की ताजा वसूली के साथ 2020 में एनपीए बने खाते से जुड़ा करीब ₹510 करोड़ का पूरा बकाया बैंक को वापस मिल गया है.
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