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डॉलर जमा पर घटा ब्याज! RBI की स्पेशल स्वैप विंडो खत्म, बैंकों ने FCNR रेट में की भारी कटौती

NRI ग्राहकों को अब डॉलर जमा पर पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा. RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा खत्म होने के बाद बैंकों ने FCNR(B) डिपॉजिट पर मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज वापस लेना शुरू कर दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए भारत में डॉलर जमा कर आकर्षक ब्याज कमाने का दौर अब खत्म होता दिख रहा है. RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप विंडो बंद होने के बाद HDFC Bank, ICICI Bank और SBI समेत देश के प्रमुख बैंकों ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR-B) डिपॉजिट की ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है. खास तौर पर 3 से 5 साल की लंबी अवधि वाली डॉलर जमा पर ब्याज दरों में 310 बेसिस पॉइंट तक की कमी की गई है. नई दरें 1 सितंबर से लागू हो गई हैं.

HDFC Bank और ICICI Bank ने इतनी की कटौती

HDFC Bank ने 5 साल की अमेरिकी डॉलर FCNR(B) जमा पर ब्याज दर को 6.25 फीसदी से घटाकर 3.15 फीसदी कर दिया है. यानी इसमें 310 बेसिस पॉइंट की कटौती हुई है. इसी तरह ICICI Bank ने 5 साल की डॉलर जमा पर ब्याज दर 6 फीसदी से घटाकर 2.90 फीसदी कर दी है. इस तरह यहां भी ब्याज दर में 310 बेसिस पॉइंट की कमी हुई है.

SBI में भी घटा NRI डिपॉजिट पर रिटर्न

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने भी FCNR(B) जमा पर ब्याज दरें कम कर दी हैं. बैंक की 5 साल की नियमित FCNR(B) दर अब 3.05 फीसदी है. इससे पहले 10 लाख डॉलर तक की जमा पर एडवांटेज स्कीम के तहत 5.75 फीसदी तक ब्याज मिल रहा था. वहीं, 10 लाख डॉलर से अधिक की जमा पर 6 फीसदी तक रिटर्न उपलब्ध था. अब इन दरों में क्रमशः 270 बेसिस पॉइंट और 295 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है.

क्यों घटा FCNR जमा पर ब्याज?

FCNR ब्याज दरों में इस तेज कटौती की मुख्य वजह RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा का खत्म होना है. RBI ने 8 जून को बैंकों के लिए यह सुविधा शुरू की थी, जिससे उन्हें विदेशी मुद्रा जुटाने में अपेक्षाकृत कम लागत आती थी. इसका फायदा उठाते हुए बैंकों ने NRI ग्राहकों को FCNR जमा पर सामान्य से काफी ज्यादा ब्याज देना शुरू किया था.

इस सुविधा के तहत बैंकों ने महज 10 हफ्तों में 65.4 अरब डॉलर का विदेशी फंड जुटा लिया. ओवरसीज उधारी समेत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह करीब 73 अरब डॉलर तक पहुंच गया. तय लक्ष्य से ज्यादा फंड आने के बाद RBI ने इस सुविधा की अवधि 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दी. विंडो बंद होने के साथ ही बैंकों ने FCNR जमा पर दिया जा रहा अतिरिक्त प्रीमियम भी वापस लेना शुरू कर दिया.

छोटी अवधि की जमा पर ज्यादा असर नहीं

हालांकि, बैंकों ने लंबी अवधि की FCNR जमा पर ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है, लेकिन छोटी अवधि की जमा पर दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं. इससे संकेत मिलता है कि RBI की विशेष सुविधा खत्म होने के बाद बैंक लंबी अवधि के डॉलर डिपॉजिट के लिए पहले जैसा ऊंचा प्रीमियम देने के इच्छुक नहीं हैं.

रेटिंग एजेंसी केयरएज के मुताबिक, विशेष स्वैप सुविधा से बैंकों को विदेशी मुद्रा फंडिंग का एक अतिरिक्त स्रोत मिला था, जिससे उनकी लिक्विडिटी स्थिति बेहतर हुई. अब सुविधा खत्म होने के बाद लंबी अवधि की विदेशी मुद्रा जमा पर मिलने वाला अतिरिक्त लाभ धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट सकता है.

 


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