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रुपये में जोरदार रिकवरी, एक महीने के हाई पर पहुंचा; RBI सपोर्ट और मजबूत GDP से मिला सहारा
डॉलर के मुकाबले 94.87 पर पहुंची भारतीय करेंसी, मजबूत घरेलू ग्रोथ, विदेशी निवेश और RBI के हस्तक्षेप से मिला सपोर्ट
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 53 minutes ago
भारतीय रुपये में मंगलवार को जोरदार रिकवरी देखने को मिली. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.87 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब एक महीने का उच्चतम स्तर है. घरेलू करेंसी 95 रुपये प्रति डॉलर पर खुली थी, लेकिन कारोबार के दौरान 94 के दायरे में आ गई. बाजार के जानकारों के मुताबिक, मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप और विदेशी निवेश से रुपये को मजबूती मिली है.
RBI के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को मिला सहारा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करेंसी मार्केट के ट्रेडर्स का मानना है कि लोकल स्पॉट मार्केट खुलने से पहले RBI की ओर से डॉलर की संभावित बिक्री ने रुपये को सपोर्ट दिया. ऊंची तेल कीमतों और मजबूत डॉलर जैसे बाहरी दबावों के बावजूद घरेलू करेंसी ने मजबूती दिखाई है.
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, मजबूत घरेलू ग्रोथ, फिस्कल स्लिपेज पर नियंत्रण, RBI का समर्थन और पोर्टफोलियो इनफ्लो ने अगस्त के अंत में रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई.
7.8% GDP ग्रोथ ने बढ़ाया भरोसा
रुपये की मजबूती को भारत की आर्थिक ग्रोथ के बेहतर आंकड़ों से भी सपोर्ट मिला है. अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो बाजार की उम्मीदों से बेहतर है. इसने RBI और निजी अर्थशास्त्रियों के अनुमानों को भी पीछे छोड़ दिया. मजबूत आर्थिक वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण में रहने से भी घरेलू करेंसी को सहारा मिला है.
MSCI से जुड़े इनफ्लो का भी असर
बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी रुपये के लिए सकारात्मक रहा है. MSCI से जुड़े इनफ्लो के साथ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की घरेलू इक्विटी में खरीदारी ने भी करेंसी को सपोर्ट किया है. FPIs जुलाई और अगस्त में लगातार दो महीने भारतीय इक्विटी बाजार में नेट खरीदार रहे. अगस्त में उन्होंने 29,631 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 20,200 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, साल की शुरुआत से तस्वीर अलग है. जनवरी से अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से 2.24 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. यह पिछले साल दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये के आउटफ्लो से भी ज्यादा है.
डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त
मंगलवार को डॉलर इंडेक्स 0.07 फीसदी बढ़कर 99.47 पर पहुंच गया. हालांकि, अगस्त में इसमें कुल 0.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को मापता है. डॉलर में कमजोरी आम तौर पर उभरते बाजारों की करेंसी और परिसंपत्तियों को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती है.
शेयर बाजार की तेजी से भी रुपये को सपोर्ट
मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों में भी तेजी रही. इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 206.95 अंक यानी 0.27 फीसदी बढ़कर 77,165.73 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 24,118.35 पर कारोबार करता दिखा. शेयर बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ना आम तौर पर रुपये के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि विदेशी निवेशकों को भारतीय परिसंपत्तियों में निवेश के लिए रुपये की जरूरत होती है.
आगे रुपये में और मजबूती की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर घरेलू आर्थिक आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहता है और RBI रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करता रहता है, तो आने वाले दिनों में भारतीय करेंसी को और मजबूती मिल सकती है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक स्तर पर मजबूत डॉलर और विदेशी पूंजी के संभावित आउटफ्लो जैसे जोखिम रुपये पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
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