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नोएल टाटा को बड़ी राहत, टाटा संस के 833 शेयरों के हस्तांतरण की जांच बंद; धर्मार्थ आयुक्त ने दी क्लीन चिट
1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नेवल एच. टाटा को शेयर हस्तांतरित करने के मामले में महाराष्ट्र के धर्मार्थ आयुक्त का फैसला, कानून के मुताबिक हुई थी पूरी प्रक्रिया
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 46 minutes ago
टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा को एक पुराने शेयर हस्तांतरण विवाद में बड़ी राहत मिली है. महाराष्ट्र के धर्मार्थ आयुक्त ने 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नेवल एच. टाटा को टाटा संस के 833 शेयरों के हस्तांतरण की जांच की मांग वाली शिकायत को बंद कर दिया है. 2 सितंबर 2026 को जारी आदेश में धर्मार्थ आयुक्त ने कहा कि यह हस्तांतरण उस समय लागू कानून के मुताबिक किया गया था और मामले में आगे किसी जांच की जरूरत नहीं है.
यह शिकायत नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह ने 10 जून 2026 को ईमेल के जरिए दाखिल की थी. उन्होंने शेयर हस्तांतरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी. धर्मार्थ आयुक्त ने शिकायत, ट्रस्ट के जवाब और इससे जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद यह फैसला सुनाया.
कानून के मुताबिक हुआ था शेयरों का हस्तांतरण
टाटा ट्रस्ट के मुताबिक, धर्मार्थ आयुक्त ने पाया कि शेयरों की बिक्री उस समय लागू वैधानिक जरूरतों के कारण आवश्यक थी और इसके लिए उचित दस्तावेज भी मौजूद थे. शेयरों के लिए भुगतान की गई राशि आयकर आयुक्त द्वारा तय मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित की गई थी.
ट्रस्ट को इस लेनदेन से मुनाफा भी हुआ था, जिसे 31 मार्च 1989 को समाप्त वित्त वर्ष की तुलन-पत्र में दर्ज किया गया था. शेयरों का हस्तांतरण इस शर्त के साथ किया गया था कि इन्हें किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचा जाएगा और ये प्राप्तकर्ता के परिवार के भीतर ही रहेंगे.
धर्मार्थ आयुक्त ने निष्कर्ष दिया कि यह हस्तांतरण उस समय लागू कानून के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप था. इसलिए महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत इस मामले में आगे किसी कार्यवाही की जरूरत नहीं है.
ट्रस्टी के आचरण पर भी धर्मार्थ आयुक्त की टिप्पणी
धर्मार्थ आयुक्त ने शिकायत दाखिल करने वाले ट्रस्टी विजय सिंह के आचरण पर भी टिप्पणी की. टाटा ट्रस्ट के बयान के अनुसार, आयुक्त ने कहा कि सिंह ने 10 जून को भेजे गए अपने ईमेल को ट्रस्ट के सामने उपलब्ध नहीं कराया. इससे यह संकेत मिलता है कि उनका उद्देश्य इस मामले को "अन्य ट्रस्टियों और पूरे ट्रस्ट से छिपाना" था.
आदेश में सिंह के आचरण को नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और साख को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया. आयुक्त के मुताबिक, उनका व्यवहार "नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के लिए अशोभनीय" था.
बैठक के दो दिन बाद दाखिल की शिकायत
धर्मार्थ आयुक्त ने सिंह की ओर से उठाए गए कदमों के क्रम पर भी हैरानी जताई. आदेश के मुताबिक, सिंह ने 8 जून को हुई ट्रस्ट मंडल की बैठक में हिस्सा लिया था. इस बैठक में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से धर्मार्थ आयुक्त के समक्ष मामले का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके महज दो दिन बाद, 10 जून को सिंह ने खुद शेयर हस्तांतरण की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए शिकायत दाखिल कर दी. धर्मार्थ आयुक्त ने इस घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए.
इस आदेश के साथ 1989 में हुए टाटा संस के 833 शेयरों के इस पुराने हस्तांतरण को लेकर चल रही जांच की मांग पर फिलहाल विराम लग गया है. अब इसमें अंग्रेजी के शब्दों जैसे ट्रांसफर, चैरिटी कमिश्नर, बोर्ड, बैलेंस शीट, गुडविल, क्लीन चिट आदि को भी हिंदी रूप में रखा गया है.
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