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मोबाइल PLI स्कीम से 12 लाख को रोजगार, ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव पर अश्विनी वैष्णव का जवाब
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया, जबकि सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स और ₹3 लाख करोड़ का GST मिला.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार सरकार की मेक इन इंडिया पहल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है. अब दुनिया के हर चार में से एक आईफोन का निर्माण भारत में हो रहा है. हालांकि, भारत के इस मॉडल की आर्थिक उपयोगिता को लेकर सवाल भी उठे हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता का जिक्र करते हुए भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की तुलना चीन से की गई थी. इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत मिले टैक्स और रोजगार के आंकड़े सामने रखे हैं.
रिपोर्ट में क्या उठाए गए सवाल?
एक मीडिया रिपोर्ट में भारत में आईफोन निर्माण की बढ़ती हिस्सेदारी का जिक्र किया गया. इसके साथ ही सवाल उठाया गया कि महंगे आयातित पुर्जों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता के बीच इस मॉडल से भारत को कितना आर्थिक लाभ मिल रहा है.
रिपोर्ट में यह तर्क भी सामने आया कि चीन के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को अपनाना भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा. इसी बहस के बीच अश्विनी वैष्णव ने सरकारी प्रोत्साहन के बदले मिले राजस्व और पैदा हुए रोजगार का हिसाब साझा किया.
₹19,000 करोड़ की सब्सिडी, ₹3 लाख करोड़ का GST
अश्विनी वैष्णव के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल PLI स्कीम के तहत सरकार अब तक कंपनियों को ₹19,000 करोड़ का इंसेंटिव दे चुकी है. इसके मुकाबले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स मिला है. इसके अलावा, इस सेक्टर से ₹3 लाख करोड़ का GST राजस्व प्राप्त हुआ है.
इन आंकड़ों के जरिए मंत्री ने यह रेखांकित किया कि सरकारी प्रोत्साहन के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से टैक्स के रूप में भी बड़ा राजस्व हासिल हुआ है. हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में पूरी योजना की लागत और लाभ का आकलन नहीं हैं, लेकिन सरकार की ओर से इन्हें स्कीम के आर्थिक योगदान के तौर पर पेश किया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की उपलब्धियों में रोजगार को भी अहम बताया गया है. अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कुल 25 लाख लोगों को रोजगार दिया है. इनमें से 12 लाख लोगों को अकेले मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों में काम मिला है.
इस तरह मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रोजगार सृजन का एक बड़ा हिस्सा बनकर उभरी है. सरकार की ओर से साझा किए गए ये आंकड़े इस क्षेत्र के विस्तार और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों को रेखांकित करते हैं.
भारत में बढ़ रहा आईफोन निर्माण
भारत में आईफोन का बढ़ता उत्पादन देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विस्तार को दिखाता है. हालांकि, इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता का आकलन करने के लिए घरेलू स्तर पर पुर्जों के निर्माण, आयात पर निर्भरता, स्थानीय कंपनियों की भागीदारी और उत्पादन से मिलने वाले आर्थिक लाभ जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी होगा.
फिलहाल, सामने आए आंकड़ों के जरिए सरकार ने मोबाइल PLI स्कीम के पक्ष में अपना आर्थिक तर्क रखा है. इस बहस का केंद्र यही है कि सरकारी प्रोत्साहन से बढ़े उत्पादन का लाभ टैक्स राजस्व, रोजगार और देश में विकसित हो रही मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के रूप में किस हद तक मिल रहा है.
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