होम / BW क्लास / IPO क्या होता है, कंपनियां क्यों लाती हैं IPO, आसान भाषा में समझिए

IPO क्या होता है, कंपनियां क्यों लाती हैं IPO, आसान भाषा में समझिए

IPO एक जरिया है कंपनियों के लिए शेयर बाजार से पैसे जुटाने का, जिसमें वो अपने शेयरों को पब्लिक में बेचकर पैसे जुटाती हैं. ये एक काफी लंबी प्रक्रिया होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

IPO क्या होता है
Initial Public Offer यानी IPO, जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट से यानी शेयर बाजार से पैसे जुटाना चाहती है तो उसके पास बहुत से तरीके होते हैं. उसी में से एक तरीका होता है  IPO. जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक में बेचने के लिए ऑफर करती है, तो उसे Initial Public Offer या IPO कहते हैं. ये शेयर BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों की खरीद के लिए रखे जाते हैं. जब ये शेयर निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं तो वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाती है और प्राइवेट से पब्लिक लिस्टेड कंपनी बन जाती है.
 
IPO कंपनी क्यों लाती है
जब कोई कंपनी शुरू होती है तो उसके पास कई निवेशक होते हैं जो उसमें पैसा डालते हैं, लेकिन एक समय के बाद कंपनी को जब अपना विस्तार करना होता है तो उसे बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है. पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी के पास कई तरीके होते हैं, कंपनी चाहे तो बैंक से लोन भी ले सकती है, लेकिन ये तरीका कंपनी को थोड़ा महंगा पड़ता है क्योंकि इसमें कंपनी को ब्याज चुकाना होता है और समय पर लोन का भुगतान भी करना होता है. दूसरा तरीका IPO का है, जिसमें कंपनी अपना कुछ हिस्सा पब्लिक को बेचकर पैसा जुटाती है. इसमें कंपनियों को न तो कोई ब्याज देना होता है और न ही पैसे लौटाने होते हैं. लोगों को शेयर जारी करके वो कंपनी में उन्हें अपना हिस्सेदार बना लेती है. लेकिन IPO लाने के बाद कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. उन्हें कंपनी से जुड़े फैसलों के लिए शेयरधारकों की मंजूरियां लेनी होती हैं. वो कोई भी फैसला ऐसे नहीं कर सकतीं जिससे कंपनी के शेयरों में गिरावट आए और निवेशकों को नुकसान हो. 

IPO 2 तरह के होते हैं 
IPO दो तरह के होते हैं, 1- फिक्स प्राइस IPO और 2- बुक बिल्डिंग IPO आइए इसको एक-एक करके समझते हैं

फिक्स प्राइस IPO
जब कोई कंपनी IPO लाना चाहती है तो सबसे ज्यादा माथापच्ची उसके इश्यू प्राइस को लेकर होती है. इसके सिरदर्दी आमतौर पर कंपनियां खुद नहीं लेती हैं, किसी इनवेस्टमेंट बैंक को ये काम सौंपा जाता है. जो ये तय करता है कि IPO का प्राइस क्या होना चाहिए. जब शेयरों का एक प्राइस तय कर दिया जाता है तो उसे फिक्स प्राइस कहते हैं. निवेशकों को आईपीओ में पैसा डालने से पहले पता होता है कि एक शेयर की कीमत क्या है. निवेशक उसी कीमत पर शेयरों को सब्सक्राइब करना शुरू कर देते हैं.  

बुक बिल्डिंग IPO 
इसमें IPO के प्राइस को फिक्स नहीं किया जाता है, बल्कि एक प्राइस बैंड तय कर दिया जाता है. ये प्राइस बैंड निवेशकों के डिमांड को देखते हुए तय किया जाता है. कंपनियां IPO लाने से आमतौर पर दो दिन पहले ही प्राइस बैंड का ऐलान करती हैं. इसके बाद निवेशक इस प्राइस बैंड में बिडिंग करते हैं, अंत में जब बिडिंग प्रक्रिया खत्म हो जाती है तो कट ऑफ प्राइस का ऐलान होता है. जिन निवेशकों को शेयर मिलते हैं उन्हें शेयर अलॉट कर दिए जाते हैं और जिन्हें नहीं मिलते उनके पैसे वापस कर दिए जाते हैं.

फिक्स प्राइस IPO और बुक बिल्डिंग IPO में एक बड़ा अंतर ये होता है कि बुक बिल्डिंग IPO में शेयर प्राइस का खुलासा शुरू में नहीं किया जाता है, ये डिमांड को देखते हुए तय होता है, लेकिन फिक्स प्राइस IPO में ये पहले ही तय कर दिया जाता है.  
 
IPO सब्सक्राइब 
IPO लाने वाले कंपनी निवेशकों के लिए इसे 3 से 10 दिनों तक के लिए ओपन करती है, ताकि निवेशक इसमें पैसा लगा सकें. IPO में लोग कितना पैसा लगा रहे हैं, ये डाटा स्टॉक एक्सचेंज पर अपडेट होता रहता है. IPO कितना भरा यानी सब्सक्राइब हुआ, इससे ये पता चलता है कि लोग इसमें पैसा लगा भी रहे हैं या नहीं. अगर IPO पूरा सब्सक्राइब हो गया मतलब ये कि लोगों ने IPO के लिए रखे गए सभी शेयरों के लिए बोली लगा दी है. मतलब अगर कंपनी ने 1000 शेयर बेचने के लिए रखे थे, तो पूरे शेयर बिक चुके हैं. 

VIDEO: पाकिस्तान में चलते थे भारत में छपे नोट, आरबीआई गवर्नर के होते थे हस्ताक्षर


टैग्स
सम्बंधित खबरें

क्या है Digital Arrest जिसको लेकर PM Modi ने जताई चिंता, कैसे इससे बचा जा सकता है?

ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे के बीच आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं जिसमें लोग मिनटों में अपनी जीवन की जमा-पूंजी गंवा दे रहे हैं.

28-October-2024

क्या है BRICS करेंसी जिसको बताया जा रहा डॉलर का विकल्प, ऐसा हुआ तो क्या होगा बदलाव?

दुनिया की इन 3 महाशक्तियों के अलावा ब्रिक्‍स समूह में शामिल 7 अन्‍य देशों ने आपसी व्‍यापार में स्‍थानीय मुद्रा के इस्‍तेमाल पर सहमति जताई.

25-October-2024

BW Class: क्या होता है फ्रंट रनिंग, जिसके फेर में फंस गईं फिर कुछ कंपनियां?

फ्रंट रनिंग घोटाले में तीन कंपनियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. इन कंपनियों के नाम आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC, फर्स्टक्राई और PNB हाउसिंग फाइनेंस हैं.

09-September-2024

BW Class: आखिर क्या होता है FPO और IPO? दोनों में क्या है अंतर? यहां जानें सब कुछ

क्या आप जानते हैं कि FPO और IPO क्या होता है और कोई कंपनी इसे क्यों लेकर आती है? साथ ही, FPO और इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में फर्क क्या है? आइए आज इसी को समझते हैं.

13-April-2024

BW Class: UPI जानते हैं, PPI के बारे में पता है कुछ. इसका कैसे होता है इस्‍तेमाल?

RBI द्वारा थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स को पीपीआई से लिंक करने का प्रस्ताव दिया गया है. यूपीआई ट्रांजैक्शन के बारे में तो सब जानते लेकिन PPI के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है.

06-April-2024


बड़ी खबरें

लगातार चार दिन की तेजी के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

सोमवार को सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 390.70 अंक यानी 1.60 फीसदी उछलकर 24,774.30 के स्तर पर पहुंच गया.

2 hours ago

LIC में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, 6.5% OFS आज से खुला, जानिए निवेशकों के लिए कितना बड़ा मौका

इस OFS के जरिए सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. साथ ही, इससे LIC को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलेगी.

2 hours ago

तेल कंपनियों पर सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स

सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के बाद लिया गया है. हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा.

2 hours ago

RBI की स्वैप योजना का असर, FCNR(B) जमा बढ़ते ही बैंकों की CD पर निर्भरता घटी

FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं.

2 hours ago

भारत की फैक्ट्री ग्रोथ पड़ी धीमी, जुलाई में PMI फिसलकर 53.5 पर पहुंचा

नए ऑर्डर और भर्ती में सुस्ती, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

20 hours ago