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आसमान से बरसती आग से क्या झुलसेगी भारत की अर्थव्यवस्था, रफ्तार में लग सकता है ब्रेक?

भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है. इस झुलसा देने वाली गर्मी का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. ये गर्मी भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में बाधा बन सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

उत्तर भारत में आसमान से 'आग' बरस रही है. चिलचिलाती धूप में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. दिल्ली में शुक्रवार को गर्मी ने 80 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के नजफगढ़ में तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जिससे यह देश का सबसे गर्म स्थान बन गया. हीटवेव बढ़ने के साथ ही भारत में अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और पावर ग्रिड को काफी चुनौती मिल रही है. इससे देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ने की आशंका ज्यादा है. आइए जानते हैं कैसे झुलसाती गर्मी आर्थिक रफ्तार में बाधा बन रही है.

अर्थव्यवस्था में बाधा बन सकती है गर्मी

भीषण गर्मी भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी बाधा बन सकती है. इसका असर भारत की तेजी से बढ़ती जीडीपी पर देखने को मिल सकता है. आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए ये अच्छी खबर नहीं है. जानकारों के मुताबिक, भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या काम करने में आएगी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अभी 10 फीसदी से भी कम भारतीय घरों में एसी हैं. जलवायु परिवर्तन ने दक्षिण एशिया में 30 दिनों की गर्मी की लहर को 45 गुना ज्यादा गर्म बना दिया है. इसका असर फसलों पर भी देखने को मिलेगा. ये तेजी से बढ़ता तापमान दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा है, लेकिन भारत में कुछ कारण इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं. इसमें कृषि, खनन, निर्माण और परिवहन आदि शामिल हैं, और यह जीडीपी के 150-250 बिलियन डॉलर को प्रभावित कर सकता है.

हीटवेव बढ़ने से पड़ेगा असर

भारत भीषण गर्मी के प्रति जितना संवेदनशील है उससे देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ने की आशंका ज्यादा है. इसका असर गरीबों पर ज्यादा पड़ेगा और वही इसका अधिकतम नुकसान भी झेलेंगे. एक रिसर्च बताती है कि गर्मी और उमस की परिस्थितियों की वजह से दुनियाभर में मजदूरों की कमी होगी और भारत इस मामले में शीर्ष 10 देशों में शामिल होगा जिसके चलते उत्पादकता पर असर भी पड़ेगा. भारत में काम करने वाले कामगारों का तीन चौथाई हिस्सा भीषण गर्मी वाले सेक्टर में काम करते हैं जिनका कि देश की कुल जीडीपी में आधे का योगदान होता है. 

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गर्मी से बढ़ेंगी चुनौतियां

गर्मी बढ़ने पर भारत के लिए चुनौतियां और बढ़ जाएंगी. मौजूदा समय में करीब 10% भारतीय घरों में एयर कंडीशनर हैं, जो 2037 तक केवल 40% तक बढ़ने का अनुमान है. ऐसी स्थिति में, भारत को गर्मी की लहर के दौरान जनता के लिए कोल्ड शेल्टर तैयार करने पड़ सकते हैं. वहीं भीषण गर्मी की वजह से निर्माण कार्य शाम को करने पड़ सकते हैं. ऐसे में गर्मी के असर को कम करने के लिए भारत को कुछ कदम उठाने होंगे. इसमें सबसे आसान उपाय पेड़ों की संख्या बढ़ाना है. हालांकि एक अच्छी बात यह है कि चूंकि भारत में अभी भी बहुत ज़्यादा निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए नियोजन और डिजाइन में जलवायु जोखिम को कम करने का अवसर है.

फसलों का होता है नुकसान

भीषण गर्मी की वजह से खेती से होने वाली आमदनी में कमी आती है. ऐसा गरीब किसान के साथ ज्यादा होता है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भीषण गर्मी के दिनों में गैर गरीब किसान के मुकाबले गरीब किसान परिवारों की आमदनी में 2.4 प्रतिशत का नुकसान होता है, जो उनकी फसलों से होने वाली आय का 1.1 प्रतिशत और गैर कृषि आय का 1.5 प्रतिशत होता है. FAO की यह रिपोर्ट भारत सहित दुनिया के 23 निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों (LMIC) में एक लाख से अधिक परिवारों के सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है.

क्या प्रभावी हो सकता है HAP?

भारत की केंद्र सरकार हीटवेव से प्रभावित 23 राज्यों के और 130 शहरों और जिलों के साथ मिलकर देशभर में हीट एक्शन प्लान HAP लागू करने का काम कर रही है. पहला हीट एक्शन प्लान साल 2013 में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने लॉन्च किया था और आगे चलकर इस क्षेत्र में यही टेम्पलेट बन गया. HAP अहम भूमिका निभाते हैं ताकि व्यक्तिगत और समुदाय के स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके और हीटवेव की स्थिति में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सही सलाह दी सके. इसमें, कम समय और ज्यादा समय के एक्शन का संतुलन रखा जाता है. कम समय वाले HAP प्राथमिक तौर पर हीटवेव के प्रति तात्कालिक उपाय देते हैं और भीषण गर्मी की स्थिति में त्वरित राहत दिलाते हैं.

तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर भारत

भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में अभी 5वें नंबर पर है. आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक 2027 तक भारत टॉप तीन में पहुंच सकता है. जापान और जर्मनी आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं जबकि भारत की इकॉनमी रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही है. पिछले साल भारत की इकॉनमी सबसे तेजी से बढ़ी थी और आईएमएफ के मुताबिक अगले दो साल भी ऐसा ही अनुमान है.
 


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