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BW Class: क्या होती है चुनाव आचार संहिता? जानें नियम, शर्तें और पाबंदियां

चुनाव तारीखों की घोषणा से ही आदर्श आचार संहिता को लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है. लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में लागू होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

चुनाव आयोग जैसे ही 'चुनावी महाकुंभ' की तारीखों का ऐलान करता है उसके साथ ही देशभर में आचार संहिता लागू हो जाती है, जो चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगी. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने कुछ नियम बनाए हैं. उसे ही आचार संहिता कहा जाता है. इसके लागू होते ही कई बदलाव हो जाते हैं. सरकार के कामकाज में भी कई अहम बदलाव हो जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं क्या होती है चुनाव आचार संहिता?
 
क्या होती है आचार संहिता?

चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए कई नियम बनाता हैं. आचार संहिता भी उन्हीं नियमों का एक हिस्सा है. जिसके तहत चुनाव में भाग लेने वाली पार्टी और उम्मीदवारों के लिए गाइडलाइंस होती है. इसके तहत कुछ नियम होते हैं, जिन्हें इसका पालन करना होता है. अगर इसका उल्लंघन होता है तो चुनाव आयोग एक्शन ले सकता है.

आचार संहिता कब तक रहती है लागू?

चुनाव आयोग जब चुनाव की तारीखों की घोषणा करता है. उसी के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है. आचार संहिता निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहती है. या दूसरे शब्दों में कहें तो आचार संहिता चुनावी परिणाम आने तक लागू रहती है. चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही आचार संहिता समाप्त हो जाती है. 

क्या हैं चुनाव आचार संहिता के नियम?

चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं. इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता. सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा, सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा, किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा, किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी, किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे.

आम आदमी के लिए क्या है नियम?

कोई आम आदमी भी इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर भी आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी. इसका मतलब यह है कि यदि आप अपने किसी नेता के प्रचार में लगे हैं, तब भी आपको इन नियमों को लेकर जागरूक रहना होगा. कोई राजनेता आपको इन नियमों के इतर काम करने के लिए कहता है तो आप उसे आचार संहिता के बारे में बताकर ऐसा करने से मना कर सकते हैं. क्योंकि ऐसा करते पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई होती है. उल्लंघन करने पर आपको हिरासत में भी लिया जा सकता है.

आचार संहिता के उल्लंघन पर क्या होगा?

अगर कोई प्रत्याशी आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो उसके प्रचार करने पर रोक लगाई जा सकती है. आचार संहिता के उल्लंघन पर 1860 का भारतीय दंड संहिता, 1973 का आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1951 का लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम प्रयोग में लाया जा सकता है. प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. इतना ही नहीं, जेल जाने का प्रावधान भी है. इसके अलावा इलेक्शन कमीशन के पास 1968 के चुनाव चिन्ह आदेश के पैराग्राफ 16ए के तहत किसी पार्टी की मान्यता को निलंबित करने या वापस लेने का अधिकार है.

कब हुई थी आचार संहिता की शुरुआत?

चुनाव संहिता की शुरुआत साल 1960 में केरल में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान हुई थी, जब प्रशासन ने राजनीतिक दलों के लिए एक आचार संहिता बनाने की कोशिश की थी. चुनाव संहिता पहली बार भारत के चुनाव आयोग द्वारा न्यूनतम आचार संहिता के शीर्षक के तहत 26 सितंबर, 1968 को मध्यावधि चुनाव 1968-69 के दौरान जारी की गई थी. इस संहिता को 1979, 1982, 1991 और 2013 में संशोधित किया गया.
 


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