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लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां क्या होती हैं, आसान भाषा में समझिए

कोई कंपनी कब लार्जकैप, कब मिडकैप और कब स्मॉलकैप कही जाएगी, इंटरनेट पर इसे लेकर कई तरह की परिभाषाएं हैं, SEBI ने इसकी तस्वीर साफ की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

मुंबई: हम शेयर बाजार में स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप शेयरों के बारे में सुनते रहते हैं. आखिर ये क्या होते हैं, ये कैसे तय होता है कौन सा शेयर शेयर स्मॉल कैप है या लार्ज कैप, चलिए समझते हैं. 

मार्केटकैप क्या होता है?

आगे बढ़ने से पहले सबसे पहले आपको किसी कंपनी के मार्केट कैप के समझना होगा. किसी कंपनी का मार्केट कैप निकालने के लिए उसके एक शेयर का प्राइस और कुल शेयरों की संख्या को गुणा करके जो भी आएगा उसे मार्केट कैप कहते हैं. 

जैसे - मान लीजिए किसी कंपनी ABC Ltd. के एक शेयर की कीमत 100 रुपये है, और उस कंपनी के पास कुल 20 करोड़ शेयर हैं. तो कंपनी का मार्केट कैप होगा 100x20 करोड़ = 2000 करोड़ रुपये.  

कोई कंपनी कब लार्जकैप, कब मिडकैप और कब स्मॉलकैप कही जाएगी, इंटरनेट पर इसे लेकर कई तरह की परिभाषाएं हैं, कहीं लिखा है कि 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मार्केट कैप वाली कंपनी लार्जकैप है, तो कहीं 2 हजार करोड़ लिखा मिलेगा, इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप के लिए भी अलग अलग मार्केटकैप बताया गया है. अब इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 6 अक्टूबर 2017 को स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप स्टॉक को परिभाषित किया था. सेबी ने सभी लिस्टेड कंपनियों को उनके मार्केट कैप के हिसाब से बांट दिया. सेबी के मुताबिक मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 1 से 100 तक की कंपनियों को लार्ज कैप कहा जाएगा, टॉप 101 से लेकर 250 तक की कंपनियों को मिडकैप और इसके बाद 251 से नीचे वाली कंपनियों को मिडकैप कंपनियां कहा जाएगा. 

टॉप 1-100 कंपनियां           - लार्जकैप 
टॉप 101-250 कंपनियां        - मिडकैप
251 और उसके बाद           -  स्मॉलकैप 

इन तीनों कैप वाली कंपनियों की लिस्ट निफ्टी की वेबसाइट पर मौजूद है, जैसे लार्जकैप स्टॉक्स की पूरी लिस्ट NIFTY 100 इंडेक्स में मिल जाएगी, मिडकैप स्टॉक्स की पूरी लिस्ट NIFTY MIDCAP 150 इंडेक्स में मिल जाएगी और स्मॉलकैप इंडेक्स की पूरी लिस्ट आपको NIFTY SMALLCAP 250 इंडेक्स में मिल जाएगी. 

लार्जकैप स्टॉक क्या होते हैं 
इन कंपनियों को ब्लू चिप कंपनियां भी कहा जाता है, ये कंपनियां काफी बड़ी होती है, इसलिए ये ज्यादा रिटर्न नहीं दे पाती हैं, क्योंकि इनके लिए नए बिजनेस खोजना और विस्तार करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन इन कंपनियों के शेयरों में रिस्क बहुत कम होता है, क्योंकि इन कंपनियों के डूबने या बर्बाद होने के चांस कम होते हैं. Reliance, TCS, Infosys और HDFC जैसी कंपनियां लार्जकैप कंपनियां हैं. NSE पर कुल मार्केट कैप में लार्जकैप कंपनियों का हिस्सा 76 परसेंट से भी ज्यादा है. यानी बाकी के 25 परसेंट में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का मार्केटकैप है. 

मिडकैप स्टॉक क्या होते हैं 
मिडकैप शेयरों में रिटर्न और रिस्क दोनों ही लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा होते हैं, ये कंपनियां आगे बढ़ना चाहती हैं, विस्तार करना चाहती हैं इसलिए इसमें रिटर्न ज्यादा होता है. लेकिन ये कंपनियां साइज में छोटी होती हैं तो इनके बिजनेस पर असर पड़ने का भी खतरा ज्यादा रहता है. NSE के कुल मार्केट कैप में NIFTY Midcap 150 Index कुल हिस्सा 12.9% है. 

स्मॉलकैप स्टॉक क्या होते हैं 
इसमें रिटर्न और रिस्क दोनों ही मिडकैप और लार्जकैप से काफी ज्यादा होता है. ये वो कंपनियां होती हैं जिन्होंने अपना कारोबार नया-नया शुरू किया होता है, इसलिए इनके तेजी से बढ़ने की संभावना भी ज्यादा रहती है जिससे रिटर्न भी काफी ऊंचा रहता है, लेकिन अगर कोई कंपनी आगे नहीं बढ़ पाई और बिजनेस में उसको नुकसान हो गया तो उसके डूबने का खतरा भी ज्यादा रहता है. इसलिए रिस्क भी ज्यादा होता है. NSE की कुल मार्केट कैप में NIFTY Smallcap 250 Index का हिस्सा 6.4% है. 

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