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तेल कंपनियों पर सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स
सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के बाद लिया गया है. हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 59 minutes ago
केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है. नए फैसले के तहत डीजल, पेट्रोल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर टैक्स बढ़ा दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के बाद लिया गया है. हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन निर्यात करने वाली निजी रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है.
डीजल, पेट्रोल और ATF पर कितना बढ़ा टैक्स?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 3 अगस्त से डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं, ATF के निर्यात पर यह शुल्क 14.5 रुपये से बढ़कर 22 रुपये प्रति लीटर हो गया है. पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स भी 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों या रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी के कारण तेल कंपनियों को अप्रत्याशित (Windfall) मुनाफा होता है, तब सरकार उस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वसूलती है. इस टैक्स का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और कंपनियों को केवल ऊंचे मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करने से रोकना है.
सरकार ने क्यों बढ़ाया निर्यात शुल्क?
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार ने मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था, जबकि मई से पेट्रोल भी इसके दायरे में आ गया. सरकार हर पखवाड़े वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के आधार पर इस टैक्स में बदलाव करती है. ताजा बढ़ोतरी भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है.
किन कंपनियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस फैसले का सबसे अधिक असर उन निजी रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ सकता है, जो अपने उत्पादों का बड़ा हिस्सा विदेशों में बेचती हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी जैसी कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर इसका दबाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर, इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि उनका अधिकांश उत्पादन घरेलू बाजार में ही खपता है.
क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी का असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ेगा. यह टैक्स केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लगाया जाता है. इसलिए देशभर के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल किसी बदलाव की संभावना नहीं है.
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