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RBI की स्वैप योजना का असर, FCNR(B) जमा बढ़ते ही बैंकों की CD पर निर्भरता घटी
FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा में तेज बढ़ोतरी का असर अब बैंकों की फंडिंग रणनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रियायती स्वैप सुविधा के बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने पर जोर दिया, जिससे सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) के जरिए धन जुटाने की जरूरत कम हो गई. इसी का नतीजा है कि जुलाई में बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने CD के जरिए करीब 95,000 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि जून में यह आंकड़ा 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. बढ़ी हुई नकदी के चलते CD की ब्याज दरों में भी 70 आधार अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई.
जून के मुकाबले जुलाई में आधा रह गया CD जुटाव
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में बैंकों ने CD के जरिए 45,700 करोड़ रुपये जुटाए थे. यह आंकड़ा मई में बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये और जून में 1.8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. उस समय जमा की तुलना में ऋण वितरण तेज रहने और नकदी की जरूरत बढ़ने के कारण बैंकों को CD बाजार का अधिक सहारा लेना पड़ा था.
RBI की स्वैप सुविधा से बढ़ा FCNR(B) जमा
जून की शुरुआत में RBI ने रियायती स्वैप सुविधा शुरू की थी, जिसके बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ा दी. रिजर्व बैंक के अनुसार, 31 जुलाई तक बैंकों ने इस सुविधा के तहत करीब 41 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिनमें 36.7 अरब डॉलर नई FCNR(B) जमा के जरिए आए हैं. इससे बैंकों को घरेलू बाजार के बजाय विदेशी स्रोतों से अपेक्षाकृत सस्ती फंडिंग मिलने लगी.
सस्ती फंडिंग से CD दरों में भी आई गिरावट
FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब बैंकों को कम लागत पर विदेशी मुद्रा में फंड मिल रहा है, तो उन्हें घरेलू बाजार से महंगी उधारी लेने की जरूरत कम पड़ रही है.
क्या कहते हैं बैंकिंग विशेषज्ञ?
एक वरिष्ठ बैंकर के मुताबिक, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी के बाद CD पर निर्भरता कम होना स्वाभाविक है. RBI की स्वैप योजना ने बैंकों को सस्ती फंडिंग का विकल्प दिया है, जिससे घरेलू बाजार से धन जुटाने की आवश्यकता घटी है. वहीं, दूसरे वरिष्ठ बैंकर का कहना है कि पहली तिमाही में फंडिंग की मांग असामान्य रूप से अधिक थी, जबकि वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद आमतौर पर CD दरों में नरमी देखने को मिलती है.
क्या होता है सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD)?
सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) बैंकों द्वारा जारी किया जाने वाला एक अल्पकालिक वित्तीय साधन है, जिसकी अवधि आमतौर पर 7 दिन से लेकर 1 वर्ष तक होती है. बैंक इसका उपयोग नकदी प्रबंधन, परिसंपत्ति और देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा फंडिंग के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के लिए करते हैं.
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