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LIC में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, 6.5% OFS आज से खुला, जानिए निवेशकों के लिए कितना बड़ा मौका
इस OFS के जरिए सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. साथ ही, इससे LIC को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए होने वाली इस हिस्सेदारी बिक्री का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू आज (4 अगस्त) से खुल गया है, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त को बोली लगा सकेंगे. इस OFS के जरिए सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. साथ ही, इससे LIC को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलेगी.
दो चरणों में होगी हिस्सेदारी की बिक्री
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के मुताबिक, सरकार पहले चरण में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. इसके साथ 4 फीसदी का ग्रीन शू विकल्प भी रखा गया है. यदि निवेशकों की मांग मजबूत रही तो कुल 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी. इस तरह सरकार 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बाजार में उतारेगी.
382 रुपये रखा गया फ्लोर प्राइस
OFS के लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो सोमवार को बीएसई पर LIC के 424.35 रुपये के बंद भाव से करीब 10 फीसदी कम है. नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए इश्यू 4 अगस्त को खुला है, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त को इसमें भाग ले सकेंगे.
सरकार को मिल सकते हैं 31,000 करोड़ रुपये
अगर पूरा OFS सफल रहता है और सभी शेयर फ्लोर प्राइस पर बिक जाते हैं तो सरकार को करीब 31,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. यह विनिवेश कार्यक्रम सरकार के पूंजी जुटाने और सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.
क्यों जरूरी है यह OFS?
वर्तमान में LIC में सरकार की 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है. सेबी ने LIC को 16 मई 2027 तक न्यूनतम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) हासिल करने की छूट दी है. यह OFS उसी लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
2022 के IPO के बाद दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री
LIC का ऐतिहासिक IPO मई 2022 में आया था, जब सरकार ने 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. अब करीब चार साल बाद सरकार एक बार फिर OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी घटाने जा रही है. इससे बाजार में LIC के शेयरों की उपलब्धता बढ़ेगी और शेयर की लिक्विडिटी में सुधार होगा.
निवेशकों और शेयर पर क्या होगा असर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े OFS के दौरान शेयरों की अतिरिक्त सप्लाई के कारण अल्पावधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, लंबी अवधि में इससे शेयर की लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेशकों के लिए ट्रेडिंग आसान होती है. 382 रुपये का फ्लोर प्राइस उन निवेशकों के लिए भी आकर्षक अवसर हो सकता है, जो अब तक LIC के शेयर में निवेश नहीं कर पाए हैं.
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