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अभी तो पूरी नहीं होगी Tesla वाले Musk की मुराद, यह खबर जानकर पकड़ लेंगे माथा! 

सरकार ने बिना नाम लिए ये साफ कर दिया है कि टेस्ला को कोई खास रियायत नहीं दी जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

टेस्ला (Tesla) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) अपनी इलेक्ट्रिक कारों को भारत में दौड़ते देखने के लिए बेताब हैं. बीच में कई ऐसे खबरें भी आईं कि मस्क ने मोदी सरकार को विशेष रियायत के लिए मना लिया है और जल्द ही उनकी भारत में एंट्री हो सकती है. हालांकि, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नीति नहीं बनाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोयल ने कहा कि हम ऐसी पॉलिसी नहीं लाएंगे, जिससे किसी एक कंपनी को फायदा हो.

प्लांट का किया था दौरा
पियूष गोयल ने कहा कि हम भारत के कानून और टैरिफ नियम को ऐसा बनाएंगे, जो सभी कंपनियों को एक-समान मौके दें और वे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित हों. केंद्रीय मंत्री ने टेस्ला का नाम लिए बगैर कहा कि सरकार किसी एक कंपनी या उसके हितों के लिए नीति नहीं बनाती. हर कोई अपनी मांग रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप जो मांग करते हैं, सरकार उसी के आधार पर फैसला लेगी. बता दें कि गोयल ने पिछले साल नवंबर में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा भी किया था.

चल रही है बातचीत 
उन्होंने आगे कहा कि सरकार एक मजबूत ईवी-इकोसिस्टम की जरूरत को समझती है, क्योंकि बैटरी से चलने वाले वाहनों के अधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन के साथ-साथ कच्चे तेल के आयात बिल में भी कमी आएगी. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी नीतियां नहीं बनाएगी, जो किसी एक कंपनी के लिए फायदेमंद हो, बल्कि ऐसी नीतियां तैयार की जाएंगी, जो दुनिया के सभी इलेक्ट्रिक वाहन र्माताओं को भारत में आने के लिए प्रोत्साहित करें. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस संबंध में कई पहल पर काम जारी है. यूरोप, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और दुनियाभर के संभावित निवेशकों के साथ बातचीत चल रही है.  

Musk ने की है ये मांग
दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी की टेस्ला भारत में आने से पहले शुरुआती शुल्क रियायत मांग रही है. जिससे वह 40,000 डॉलर से कम दाम वाली कारों के लिए 70% और इससे अधिक कीमत वाली कारों के लिए 100% सीमा शुल्क की भरपाई कर सके. टेस्ला का कहना था कि यह रियायत मिलने के बाद ही वह भारत में अपना प्लांट लगाएगी. पिछले साल खबर आई थी कि सरकार भारत में निवेश और विनिर्माण के लिए प्रतिबद्ध वाहन निर्माताओं के लिए 100% EV आयात शुल्क को कम करके 15% तक लाने की प्रस्तावित नीति पर काम कर रही है. टेस्ला को इससे बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से उसकी कारों की कीमतों में इजाफा नहीं होगा. मौजूदा वक्त में कई विदेशी कंपनियां अपनी EV को भारत में इसलिए लेकर नहीं आतीं, क्योंकि 100 इम्पोर्ट ड्यूटी से उनकी कारें इतनी महंगी हो जाएंगी कि उनके खरीदार नहीं मिलेंगे.

इन्होंने जताई थी नाराजगी  
माना जा रहा है कि टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों के विरोध के चलते सरकार Tesla को खास तवज्जो देने के मूड में नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स एक अनुसार, Tata Motors और Mahindra ने मुख्यतौर पर आयात शुल्क कम करने के प्रस्ताव का विरोध किया था. दोनों का कहना है कि इससे स्थानीय वाहन निर्माता प्रभावित होंगे. उनका ये भी कहना है कि इसके बजाये सरकार को स्थानीय EV निर्माताओं को प्रोत्साहित करना चाहिए. इस विरोध के चलते ही सरकार आयात शुल्क में कटौती के प्रस्ताव पर फैसला नहीं ले पाई है.  पिछले साल यह खबर सामने आई थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय (PMO) और अन्य विभागों के साथ बैठकों में टाटा ने आयात शुल्क कम करने की योजना का विरोध किया था. टाटा सहित घरेलू कंपनियों को लगता है कि इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी के चलते टेस्ला जैसे इंटरनेशनल प्लेयर सस्ते में अपनी कारें लॉन्च कर सकेंगे, जिससे उनके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी.  


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