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Cow Dung: कुवैत के ऑर्डर से बदल सकती है इस सेक्टर की दशा

कुवैत से जो ऑर्डर आया है, उसकी पहली खेप राजस्थान और उत्तर प्रदेश से रवाना हुई है. यदि भविष्य में मांग बनी रहती है,

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

भारतीय संस्कृति में गाय के गोबर का एक अलग ही महत्व है. हालांकि, पिछले कुछ सालों में इस महत्व में कमी आई है. लेकिन हाल ही में कुवैत से गाय के गोबर का जो ऑर्डर मिला है, उसके बाद शायद स्थिति कुछ हद तक बदले. ये ऑर्डर गोबर के निर्यात को बढ़ावा देने वाला भी साबित हो सकता है. भारत में बड़े पैमाने पर गाय के गोबर का उत्पादन होता है, ऐसे में अगर इसका निर्यात बढ़ता है, तो मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है. इससे गाय पर निर्भर रहने वाले लोगों के साथ-साथ गायों की दशा में भी सुधार संभव है.

पहली बार मिला बड़ा ऑर्डर

कुवैत से जो ऑर्डर आया है, उसकी पहली खेप राजस्थान और उत्तर प्रदेश से रवाना हुई है. यदि भविष्य में मांग बनी रहती है, तो अन्य राज्यों भी शामिल किया जाएगा. पहली खेप में 192मीट्रिक टन गोबर की आपूर्ति की जा रही है. यह पहली बार है, जब भारत को गाय के गोबर का इतना बड़ा ऑर्डर मिला है.

दोनों को होगा फायदा

एक अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 30 करोड़ मवेशी हैं और उनसे रोजाना बड़े पैमाने पर गोबर का उत्पादन होता है. हमारे यहां गोबर के उपले बनाकर उन्हें ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही गोबर का इस्तेमाल खाद के रूप में भी होता है. गाय दूध और गोबर देकर दो तरह से फायदा पहुंचाती है, लेकिन इसके बावजूद इसकी दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है. जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तो उसकी स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. ऐसे में विदेशों से गोबर के ऑर्डर गाय और उसके पालने वाले दोनों के दिन बदल सकते हैं.

ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की मांग बढ़ी

2020-21 में भारत से एनिमल प्रोडक्ट के रूप में 27155 करोड़ रुपए से ज्यादा का निर्यात किया गया है. इसके अलावा, विदेशों में भारत के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का मार्केट बढ़ रहा है. कुवैत की तरह ही कुछ अन्य देश भी मानते हैं कि गाय के गोबर से ना सिर्फ फसल की उपज बढ़ती है, बल्कि ये कई अन्य तरीकों से भी फायदेमेंद है. कुवैत के कृषि वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में पाया है कि पाउडर के रूप में गाय के गोबर का उपयोग कर खजूर की फसल को बेहतर बनाया जा सकता है. इसीलिए भारत को गाय के गोबर के निर्यात का ऑर्डर दिया गया.


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