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FY26 में MECs का आउटलुक स्थिर, लेकिन टैरिफ जोखिम और ग्लोबल दबाव से चुनौतियां बरकरार: Ind-Ra रिपोर्ट

एजेंसी ने बताया कि उसने अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए उन कंपनियों पर नकारात्मक रेटिंग कार्रवाई की है, जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल और तरलता में गिरावट की आशंका थी. हालांकि, ऐसी कार्रवाई का दायरा सीमित रहा है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडियम एंड इमर्जिंग कॉरपोरेट्स (MECs) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में रेटिंग आउटलुक स्थिर बना हुआ है, लेकिन कुछ सेक्टर टैरिफ जोखिम और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण दबाव में हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पतले मार्जिन पर काम करने वाली कंपनियां अप्रत्याशित झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनी हुई हैं.

Ind-Ra द्वारा MECs पर किए गए छमाही अध्ययन में संकेत दिया गया है कि FY26 में इन कंपनियों की राजस्व वृद्धि और लाभप्रदता समग्र स्तर पर टिकाऊ रहने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट मेट्रिक्स भी स्थिर रहने की उम्मीद है. “हालांकि आउटलुक स्थिर है, लेकिन तरलता से जुड़े जोखिमों और वैश्विक चुनौतियों के बीच लाभप्रदता और क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखना MECs के लिए अहम होगा,” Ind-Ra में इमर्जिंग कॉरपोरेट्स के सीनियर डायरेक्टर अभाष शर्मा ने कहा.

एजेंसी ने बताया कि उसने अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए उन कंपनियों पर नकारात्मक रेटिंग कार्रवाई की है, जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल और तरलता में गिरावट की आशंका थी. हालांकि, ऐसी कार्रवाई का दायरा सीमित रहा है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि FY26 के लिए कई MECs के मीडियन लीवरेज अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया गया है.

मांग के प्रति अनिश्चितता और वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए कई कंपनियां पूंजीगत निवेश को लेकर सतर्क हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मीडियन कैपेक्स इंटेंसिटी में अनुमानित गिरावट दर्शाती है कि नए निवेश मुख्य रूप से मजबूत खिलाड़ियों तक सीमित रह सकते हैं, जबकि अन्य कंपनियां तरलता के दबाव और मार्जिन में कमी के कारण अपने विस्तार योजनाओं को टाल सकती हैं या छोटा कर सकती हैं. इससे सेक्टर में तेज़ी से कंसोलिडेशन बढ़ने की संभावना है.

Ind-Ra ने अनुमान लगाया है कि FY26 में MECs की राजस्व वृद्धि 8.6 प्रतिशत YoY रहेगी, जो FY25 के 9 प्रतिशत से थोड़ी कम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ उतार-चढ़ाव और वैश्विक विकास में सुस्ती का प्रभाव MECs पर बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक पड़ेगा, क्योंकि उनकी प्राइसिंग पावर कम होती है, वित्त पोषण तक पहुंच सीमित रहती है और वे अक्सर एक ही निर्यात बाज़ार पर निर्भर होते हैं.


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