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भारत के PHWR विनिर्माण ढांचे से छोटे मॉड्यूलर रिऐक्टर कार्यक्रम को गति मिलने की उम्मीद
लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि PHWR के लिए विशेष उपकरण सप्लाई करने वाले उद्योग बड़े SMR सिस्टम बनाने की क्षमता रखते हैं और कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ इस प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत का लंबे समय से विकसित प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिऐक्टर (PHWR) विनिर्माण इकोसिस्टम अब देश के छोटे मॉड्यूलर रिऐक्टर (SMR) कार्यक्रम की रीढ़ बनने की ओर बढ़ रहा है. केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि PHWR सप्लायर नए SMR तकनीक के लिए आवश्यक कई प्रमुख घटकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि PHWR के लिए विशेष उपकरण सप्लाई करने वाले उद्योग बड़े SMR सिस्टम बनाने की क्षमता रखते हैं और कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ इस प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि SMR विनिर्माण का स्थानीयकरण 'मेक इन इंडिया' के उद्देश्य के अनुरूप है, जो सामरिक तकनीकों में घरेलू भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है. PHWR में उपयोग होने वाली कई भारी इंजीनियरिंग क्षमताएँ — जैसे विशेष स्टील, प्रेशर वेसल के लिए बड़े फोर्जिंग, प्राइमरी कुलेंट पंप, हीट एक्सचेंजर, कंट्रोल रॉड ड्राइव असेंबली, इंस्ट्रुमेंटेशन और कंट्रोल सिस्टम — SMR की आवश्यकताओं के लिए अनुकूलित की जा सकती हैं. इस बदलाव के दौरान उद्योगों को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है.
रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी SMR संयंत्रों के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से बढ़ सकती है. सिंह ने कहा कि यह मॉडल कंपोनेंट निर्माण से लेकर प्लांट कंस्ट्रक्शन और दीर्घकालिक सर्विसिंग तक एक समग्र घरेलू इकोसिस्टम विकसित करेगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया में अर्जित विशेषज्ञता भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर भी प्रदान कर सकती है, क्योंकि कई देश SMR तैनाती योजनाओं पर काम कर रहे हैं.
BARC पहले ही प्रेसराइज्ड वाटर रिऐक्टर (PWR) तकनीक पर आधारित दो SMR मॉडल विकसित कर रहा है. इनमें 200 मेगावॉट इलेक्ट्रिकल ‘भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिऐक्टर’ और 55 मेगावॉट इलेक्ट्रिकल रिऐक्टर शामिल है, जिसे कोयला आधारित बिजलीघरों के पुनर्प्रयोग, ऊर्जा-गहन उद्योगों और दूरस्थ ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए विकसित किया जा रहा है.
मंत्री ने कहा कि SMR अभी डिजाइन चरण में हैं और 200 मेगावॉट मॉडल के विस्तृत इंजीनियरिंग कार्य के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) से संपर्क किया गया है. न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) BARC के साथ तकनीकी दस्तावेज़ीकरण पर काम कर रहा है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार जल्द ही ‘एटॉमिक एनर्जी बिल 2025’ पेश करने की तैयारी कर रही है, जो भारत के परमाणु विनिर्माण ढांचे में होने वाले आगामी बदलावों का मार्ग प्रशस्त करेगा.
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