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80 साल के इस व्यक्ति की ये कहानी आपको रुला देगी, 3 महीने में एक बार मिलती है 4500 की पेंशन

बिशन सिंह की कहानी ऐसी है जिसे पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. इनकी गुजर बसर भी सरकार द्वारा 3 महीने में एक बार भी मिलने वाली पेंशन से होती है.

अभिषेक शर्मा 4 years ago

नई दिल्लीः सरकारी स्कीमें और मदद खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली आम जनता तक क्यों नहीं पहुंचती है इसकी मिसाल है हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की पोंटा साहिब तहसील से 30 किमी दूर गांव में रहने वाले 80 साल के बिशन सिंह. बिशन सिंह की कहानी ऐसी है जिसे पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. इनकी गुजर बसर भी सरकार द्वारा 3 महीने में एक बार भी मिलने वाली पेंशन से होती है.

अकेले ही एक टूटे घर में रहते हैं बिशन सिंह

सिंह, अपनी पीली आंखों और झुकी कमर के साथ, ज्यादा काम नहीं कर सकते हैं लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है क्योंकि वह अकेले रहते हैं. घर मिट्टी से बना है और वो अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित है क्योंकि मानसून आ रहा है जिससे उनका 10 साल पुराना घर ढह सकता है.

वोट देते हैं लेकिन नहीं मिलता है सरकारी योजनाओं का लाभ

सिंह, जो पंचायत, राज्य और आम चुनाव में वोट भी डालते हैं, उनके पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. जब BW Businessworld उसके घर पहुंचा, तो वह लकड़ी के खुरदुरे और असमान फर्श पर लेटे हुए थे. तब उन्होंने कहा कि "यह मैं हूं, मैं ऐसे ही रहता हूं. जरा मुझे देखो, मेरा कमजोर शरीर और ये सारे गंदे कपड़े. मैं समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं, कैसे आगे बढ़ूं. मेरे घर की भी हालत खराब है. मेरी कोई मदद भी नहीं करता है, सिर्फ 4500 रुपये की पेंशन मिलती है वो भी 3 से चार महीने में एक बार."

सिंह ने बताया कि कैसे कुछ साल पहले उनका एक्सीडेंट हो गया था और इस त्रासदी के दौरान किसी ने भी उनकी मदद नहीं की. “मैंने दो बड़ी दुर्घटनाओं का सामना किया है और मुझे खुद ही भुगतान करना पड़ा. मैं एक किसान हूं और मेरे पास अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा भी नहीं है.“

राज्य या केंद्र की किसी स्कीम का नहीं मिला है लाभ

सिंह को पीएम जनआरोग्य योजना, पीएम आवास योजना या फिर हिमाचल प्रदेश की हिमकेयर स्कीम जैसी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है. 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि "डबल-इंजन' सरकार आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं और गरिमा के जीवन से जोड़ने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रही है ." मोदी ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा पिछले 8 वर्षों में बनाई गई योजनाओं में इस भावना को प्राथमिकता दी गई है कि वे समाज के सभी वर्गों और सभी क्षेत्रों को छूएं और पहुंचें. 

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि ग्रामीण विकास को अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए हमें गांवों में रहने वाले लोगों को ग्रामीण विकास के माध्यम से समृद्धि की ओर ले जाने की जरूरत है, ऐसा किए बिना हमारा देश कभी भी आत्मनिर्भर नहीं हो सकता. शाह ने दावा किया था कि गांवों में बिजली नहीं थी, क्योंकि ग्रामीण आबादी शहरों की ओर पलायन करती थी, लेकिन आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हर गांव में बिजली पहुंचाई है और इससे गांव भी आत्मनिर्भर हो रहे हैं.

1 किमी दूर से लेकर आते हैं पीने का पानी, बिजली भी नहीं

हालांकि, सिंह की कहानी कुछ और ही कह रही है. “मैं हर बार पीने के पानी के स्रोत के लिए लगभग 1 KM जाता हूं, आप मेरा घर और मेरे रहने की स्थिति देख सकते हैं. 75 साल से अधिक समय हो गया है, मेरे छोटे से घर में बिजली नहीं है, अन्य सुविधाओं की तो बात ही छोड़ दीजिए.

प्रधान, खंड विकास अधिकारी से किया संपर्क

इस बीच, बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड ने पंचायत प्रधान रीना देवी से संपर्क किया और उन्हें इस व्यक्ति के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी. हालांकि उन्होंने कहा कि वह इस मामले को देखेंगे. "मैं आज उनके घर का दौरा करने जा रहा हूं और इस मामले को देखूंगा क्योंकि मुझे इस पूरी स्थिति की जानकारी नहीं थी."

सिंह अपने कार्यालय से मुश्किल से चार से पांच किलोमीटर दूर रहती हैं.

पांवटा साहिब के खंड विकास अधिकारी रवि प्रकाश जोशी ने कहा, "यह एक बहुत ही दुर्लभ मामला है क्योंकि कई लोग हैं जो सरकारी नीतियों से लाभान्वित हो रहे हैं. मैं पूरी स्थिति की जांच करने के लिए स्वयं साइट का दौरा करूंगा. मैं समझता हूं कि यह एक  दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है."

प्रधान को लगाई फटकार

जोशी ने प्रधान को फोन किया और लापरवाही के लिए उन्हें फटकार लगाई और उन्हें टीम के साथ साइट पर आने के लिए कहा. प्रधान को इन सब बातों की जानकारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम स्थिति पर नजर रखने और शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए नियमित रूप से फील्ड का दौरा करते हैं. 

पीएम आवास योजना के बारे में बात करते हुए जोशी ने कहा कि नाम पंचायत स्तर पर चुने जाते हैं और पैसा सीधे केंद्र सरकार से आता है. सीएम आवास योजना के लिए हमें केवल 20 घरों के लिए सहायता मिली और मैं 45 पंचायतों की देखभाल करता हूं. 

हिमाचल प्रदेश में कई ग्रामीण परिवारों को कई सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं है. जागरूकता की कमी के बारे में बात करते हुए, विशेषज्ञों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें अक्सर योजनाओं के तहत नागरिकों के अधिकारों और अधिकारों को संप्रेषित करने में विफल रहती हैं. 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

बोर्नाली भंडारी, सीनियर फेलो, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने कहा कि "जागरूकता की कमी के कई कारण हो सकते हैं-जानकारी की कमी, पूरी जानकारी की कमी, कम शिक्षा, डिजिटल डिवाइड, जानकारी का पता नहीं होना, योग्य नहीं पता, अंतिम छोर पर भ्रष्टाचार आदि. हालांकि, उपरोक्त सभी चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकारी प्राधिकरण लाभ और योजनाओं के वितरण का प्रयास कर सकते हैं." 

कुछ महीने पहले, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करते हुए, बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड ने पाया कि ग्रामीण बहुत से लोग इस नवीनतम योजना से अवगत नहीं हैं. इसके लिए वे स्थानीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हैं.


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