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लड़की ने जन्मे जुड़वां बच्चे, लेकिन दोनों के पिता निकले अलग-अलग; दिलचस्प है कहानी
DNA टेस्ट से पता चला कि दोनों बच्चों में से केवल एक का ही डीएनए उसके पिता से मिलता है, हालांकि, दोनों बच्चे दिखने में बिल्कुल एक जैसे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
यूरोपीय देश पुर्तगाल से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया है. यहां एक 19 साल की लड़की ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. जब बच्चों का डीएनए टेस्ट किया गया, तो उसका रिजल्ट देखकर सबके होश उड़ गए. टेस्ट से पता चला कि दोनों बच्चों के पिता अलग-अलग हैं. मेडिकल साइंस की इस दुर्लभ घटना ने लड़की के परिवार को भी हिलाकर रख दिया है. वह शुरू से यही मानकर चल रहे थे कि दोनों बच्चों का पिता एक ही व्यक्ति है, मगर बच्चों के 8 महीने का होने के बाद जब DNA टेस्ट किया गया, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई.
दो पुरुषों से बनाए थे संबंध
DNA टेस्ट से पता चला कि दोनों बच्चों में से केवल एक का ही डीएनए उसके पिता से मिलता है, हालांकि, दोनों बच्चे दिखने में बिल्कुल एक जैसे हैं. पुर्तगाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला गोइया राज्य के छोटे शहर माइनिरोस का है. बच्चों की मां ने बताया कि प्रेग्नेंट होने से पहले उसने कुछ घंटों के अंतराल में दो पुरुषों के साथ संबंध बनाए थे. जब एक बच्चे का DNA अपने पिता से नहीं मिला, तो उस दूसरे व्यक्ति को बुलाया गया और उसका डीएनए सटीक मैच हो गया. दोनों बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र पर पिता के रूप में एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज है, लेकिन डीएनए टेस्ट के आधार पर उसमें बदलाव किया जाएगा.
डॉक्टर ने समझाई वजह
असामान्य गर्भावस्था के तरीके का अध्ययन करने वाले डॉ टुलियो जॉर्ज फ्रेंको ने इस दुर्लभ घटना को समझाने का प्रयास किया है. उन्होंने बताया कि ऐसी घटना को मेडिकल साइंस की भाषा में हेटेरोपेरेंटल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है. यह पूरी दुनिया मे हेटेरोपेरेंटल सुपरफेकंडेशन का केवल 20वां ज्ञात मामला है. डॉक्टर के अनुसार, ऐसी गर्भावस्था तब होती है जब एक ही मां के दो अंडे अलग-अलग पुरुषों से निषेचित होते हैं. बच्चे मां की जेनेटिक मेटेरियल को साझा करते हैं, लेकिन वे अलग-अलग प्लेसेंटा में बढ़ते हैं.
सामने नहीं आते मामले
डॉ टुलियो ने कहा कि लड़की गर्भावस्था बिना किसी परेशानी के बहुत सामान्य तरीके से हुई. दोनों बच्चे स्वस्थ पैदा हुए थे और उन्हें अब तक कोई हेल्थ इशू नहीं है. यह बेहद दुर्लभ है, ऐसा लाखों में एक बार होता है. सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने जीवन में ऐसा कुछ देखूंगा. उन्होंने ने यह भी बताया कि कई बार तो महिलाएं ऐसी परिस्थितियों में परिवार या समाज के तानों से बचने के लिए टेस्ट ही नहीं करवाती हैं. ऐसे में हेटेरोपेरेंटल सुपरफेकंडेशन के मामले सामने नहीं आ पाते.
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