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बैंक में रखते हैं 5 लाख से ज्यादा, तो जरूर शेयर करें ये काम की खबर
इस पत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के ग्राहकों के हित में वित्त मंत्री को कुछ सुझाव दिए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः वॉयस ऑफ बैंकिंग के संस्थापक अश्विनी कुमार राणा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के ग्राहकों के हित में वित्त मंत्री को कुछ सुझाव दिए गए हैं. वॉइस ऑफ बैंकिंग आगामी बजट में बैंकों के ग्राहकों के संबंध में निम्नलिखित सुझावों पर विचार कराना चाहता है.
5 लाख से ज्यादा जमा राशि के लिये भी डिपॉजिट बीमा की सुविधा:
सरकार ने बैंक ग्राहकों के लिए जमा राशि की सुरक्षा को 1 लाख से बढ़कर 5 लाख कर दिया था. इससे बैंकों के ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है और वह अपने को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. बैंकों के अनुसार 98.3% ग्राहक इस सुरक्षा कवच में आ जाते हैं, लेकिन जिन ग्राहकों की जमा राशि 5 लाख से अधिक है और उनको लगता है कि उनकी बैंकों में जमा राशि सुरक्षित नहीं है. उनके लिए एक विशेष डिपॉजिट बीमा की शुरुआत करनी चाहिए जिसके द्वारा ग्राहक 5 लाख से अधिक की अपनी जमा राशि को कुछ प्रीमियम देकर सुरक्षित रख सकते हैं. सरकार के इस कदम से ग्राहकों को राहत महसूस होगी वहीं बैंकों से ग्राहक अपनी जमापूंजी दूसरी जगह जेसे चिटफंड, क्रिप्टो करेंसी, शेयर मार्किट या ऐसे अन्य जगह पर इन्वेस्ट नहीं करेंगे.
एकीकृत शिकायत पोर्टल:
रिजर्व बैंक को ग्राहकों की सुविधा के लिए एकीकृत शिकायत पोर्टल को सभी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के ग्राहकों की सभी तरह की शिकायतों के लिए भी शुरू करना चाहिए. अभी किसी भी तरह की शिकायत के लिए ग्राहक सम्बंधित बैंक में अपनी शिकायत करता है, ज्यादातर ग्राहक अपनी शिकायत को बैंक की शाखा, ग्राहक शिकायत केन्द्र, क्षेत्रीय कार्यालय, अंचल कार्यालय, प्रधान कार्यालय और बैंकों के चेयरमैन तक को अलग अलग कर देते हैं, जिससे एक ही शिकायत पर सभी जगहों पर अलग अलग कार्यवाही शुरू हो जाती है और एक ही शिकायत के लिए बैंकों की मैनपावर का नुक्सान होता है.
यदि बैंकों के लिए भी एकीकृत शिकायत पोर्टल की शुरुआत होती है तो ग्राहक किसी भी बैंक की शिकायत एक पोर्टल पर करेगा और उस पोर्टल से शिकायत को सम्बंधित बैंक को भेज दिया जायेगा और ग्राहकों को शिकायत के लिय अलग अलग अधिकारीयों और कार्यालयों को भेजना नहीं पड़ेगा. इससे बैंकों की कार्यक्षमता में भी लाभ होगा. इस एकीकृत शिकायत पोर्टल में शिकायत दर्ज होने के बाद यदि एक निश्चित समय में शिकायत का समाधान नहीं होता तो ऐसी शिकायत अपने आप भारतीय रिजर्व बैंक की एकीकृत लोकपाल योजना के पोर्टल पर चली जाएगी. जिससे ग्राहक को 30 दिनों में शिकायत का समाधान न होने की स्थिति में अलग से शिकायत नहीं करनी पड़ेगी.
बैंकों में एक दिन में सैकड़ों शिकायतें आती हैं और अलग-अलग जगहों जैसे बैंक की शाखा, ग्राहक शिकायत केन्द्र, क्षेत्रीय कार्यालय, अंचल कार्यालय, प्रधान कार्यालय और बैंकों के चेयरमैन को भेजने से सेंकडों शिकायतें हजारों में तबदील हो जाती हैं. एकीकृत शिकायत पोर्टल से जहां कम कर्मचारियों के साथ बैंक शिकायतों का समाधान कर सकेंगे वहीं ग्राहक पोर्टल के द्वारा अपनी शिकायत की स्थिति की जानकारी भी ले सकेंगे.
वॉयस ऑफ बैंकिंग ने बजट 2023 के लिए बैंकों के ग्राहकों के हितों से जुड़े सुझाव वित्त मंत्री जी को एक पत्र के द्वारा भेजे हैं.
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