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जानिए सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले को लेकर रक्षा मंत्रालय पर जताई नाराजगी?

SC में OROP पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सहित तीन जजों की बेंच ने सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को वन रैंक वन पेंशन एरियर के भुगतान में देरी के लिए रक्षा मंत्रालय को फटकार लगाई है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

देश के हजारों पेंशनभोगी सैन्‍यकर्मियों से जुड़े OROP (ओआरओपी) के एक मामले की सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से उनकी पेंशन की एरियर अवधि बढ़ाने को लेकर जवाब मांगा है. इस मामले की सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने की. उन्‍होंने सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को OROP एरियर के भुगतान में देरी के लिए रक्षा मंत्रालय को फटकार लगाई. पीठ ने रक्षा मंत्रालय को यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि इस साल मार्च में भुगतान करने के निर्देर्शों के बीच बकाये के भुगतान की समय सीमा क्यों बढ़ाई गई? 


रक्षा मंत्रालय के पास नहीं है ये अधिकार 
इस मामले की सुनवाई में सेवानिवृत्त कर्मियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी पेश हुए और कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश को संशोधित करने का अधिकार विभाग के पास कैसे हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस अवधि के दौरान 4 लाख पेंशनभोगियों की मृत्यु हो चुकी है और वे पेंशन का दावा नहीं कर सकते हैं.

अदालत हुई सख्‍त 
रक्षा मंत्रालय के इस कदम पर सीजेआई ने रक्षा मंत्रालय पर भारी पड़ते हुए टिप्पणी की कि अगर वे अपने घर की चीजों को ठीक नहीं कर सकते हैं तो अदालत रक्षा मंत्रालय को अवमानना नोटिस जारी करेगी. इस मामले में पीठ ने रक्षा मंत्रालय के सचिव से जवाब मांगने के लिए एक आदेश पारित किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित एकतरफा निर्णय के बावजूद ये आदेश क्यों पारित किए थे ? सीजेआई ने यह भी कहा कि 15 मार्च के बाद 9% की दर से ब्याज देने का निर्देश दिया जाएगा जिसे वह फिलहाल नहीं जोड़ रहे हैं और हलफनामा दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले पर होली की छुट्टियों के बाद सुनवाई होगी.

आखिर क्‍या था OROP मामला 
इस मुद्दे की पृष्ठभूमि को समझने के लिए, केंद्र सरकार ने 7 नवंबर, 2015 को एक अधिसूचना के माध्यम से OROP योजना की शुरुआत की थी. शीर्ष अदालत ने मार्च 2022 के महीने में एक निर्णय दिया जहां उसने केंद्र की OROP योजना को बरकरार रखा और बकाया राशि का भुगतान 3 महीने के भीतर करने का निर्देश दिया. लेकिन रक्षा मंत्रालय ने बाद में बकाया भुगतान की तिथि में बार-बार बदलाव किया और सितंबर 2022 और फिर जनवरी 2023 तक बढ़ा दिया गया. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मार्च 2023 के बीच तक बकाया भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया था. लेकिन जनवरी में रक्षा मंत्रालय द्वारा एकतरफा आदेश पारित किया गया था, जिसने समय सीमा को और बढ़ा दिया और जारी किया कि भुगतान चार समान, त्रैमासिक किश्तों में किया जाएगा.



 


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