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कैरेट से शुद्धता का क्या है रिश्ता, कौनसा सोना है सबसे खरा; जान लें सबकुछ
धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, ऐसे में इस बार रिकॉर्ड बिक्री की उम्मीद की जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हो चुकी है और इसी के साथ बाजारों में भीड़ उमड़ रही है. धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, ऐसे में इस बार रिकॉर्ड बिक्री की उम्मीद की जा रही है. सोना लोग कई वजह से खरीदते हैं. जैसे, पर्सनल इस्तेमाल या निवेश के लिए. वजह चाहे कोई भी हो गोल्ड में इन्वेस्ट करते समय उसकी शुद्धता सहित कई बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. क्योंकि यदि सोना खरा नहीं होगा, तो न आपको उसे बेचने पर अच्छा भाव मिलेगा और नहीं आप उसे गिरवी रखकर लोन ले पाएंगे.
कैरेट और शुद्धता
सोने की शुद्धता को कैरेट के हिसाब से परखा जाता है और उसके अनुसार कीमत में भी अंतर होता है. उदाहरण के तौर पर, 24 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत में अमूमन 25% का अंतर होता है. 24 कैरेट का मतलब होता है 99.9% शुद्धता. इसी तरह, 23 कैरेट का 95.8%, 22 कैरेट का 91.6%, 21 कैरेट का 87.5%, 18 कैरेट का 75% और 17 कैरेट का मतलब होता है 70.8% शुद्धता.
इन बातों का रखें ध्यान
गोल्ड को हमेशा ही निवेश का सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. ऐसे लोगों की संख्या काफी ज्यादा है जो स्टॉक मार्केट में पैसा लगाने के बजाए सोने में निवेश को तवज्जो देते हैं. ऐसे में यहां हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं, जिनका सोना खरीदते समय ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. याद रखें कि जिस गोल्ड को आप खरीद रहे हैं वो ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड हो. इसके अलावा, प्यूरिटी कोड, टेस्टिंग सेंटर मार्क, ज्वेलर का मार्क और मार्किंग की डेट भी जांच लें.
कीमत क्रॉस चेक करें
सोने का सही वजन और जिस दिन आप खरीदारी कर रहे हैं उस दिन उसकी कीमत कई स्रोतों, जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट आदि, से क्रॉस चेक करें. सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है, लिहाजा उसकी जानकारी रखकर उसकी अनुसार भुगतान करें. सोना खरीदते समय नकद यानी कैश पेमेंट से बचें. UPI और डिजिटल बैंकिंग के जरिए पेमेंट अच्छा ऑप्शन है. अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते, तो फिर डेबिट या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं. खरीदारी के बाद पक्का बिल लेना न भूलें.
ऐसे ज्वेलर्स के पास जाएं
सोना खरीदना कोई 100-200 रुपए का इन्वेस्टमेंट नहीं है, इसलिए हमेशा भरोसेमंद ज्वेलर से पास ही जाएं. इसकी दो बड़ी वजह हैं, पहली- बड़े-नामी ज्वेलर्स टैक्स जैसे वैधानिक अनिवार्यता का सही तरीके से पालन करते हैं. दूसरी- उन्हें पता होता है कि चूक या गलती के चलते उनकी ब्रैंड वैल्यू गिर सकती है. यदि आपने सोना निवेश के उद्देश्य से लिया है, तो आपको सोने की रिसेल वैल्यू के बारे में पूरी जानकारी होना चाहिए. कई ज्वेलर्स के पास बायबैक पॉलिसी भी होती है, इसके बारे में भी जानकारी हासिल कर लें. इसके अलावा, बनवाई या मेकिंग चार्ज का जरूर ध्यान रखें. मशीन से तैयार गहनों का मेकिंग चार्ज 3-25% होता है. जबकि शुद्ध सोने के सिक्कों का मेकिंग चार्ज सबसे कम होता है.
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