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1 अक्टूबर से 135 साल पुराने कानून की जगह लेगा नया एक्ट, डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड होंगे मान्य

नए कानून में कागजी रिकॉर्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड पर मौजूद बैंकिंग डेटा को भी कानूनी साक्ष्य के तौर पर मान्यता दी जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के तौर पर पेश करने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार 1 अक्टूबर 2026 से बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 लागू करेगी. यह 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा. नए कानून का मकसद बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक के अनुरूप कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना है.

डिजिटल और क्लाउड रिकॉर्ड भी दायरे में

वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए कानून के तहत बैंकर्स बुक्स की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है. अब इसमें केवल कागजी या लिखित रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, ऑफसाइट और क्लाउड पर सुरक्षित बैंकिंग डेटा भी शामिल होगा. इस बदलाव से डिजिटल बैंकिंग के दौर में तैयार होने वाले रिकॉर्ड को अदालत में कानूनी साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए स्पष्ट आधार मिलेगा.

रिकॉर्ड के प्रमाणन की प्रक्रिया होगी आसान

नए कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड के सत्यापन और प्रमाणन की प्रक्रिया को भी सरल और मानकीकृत किया गया है. रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाणपत्रों को मैनुअल के साथ-साथ डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए भी प्रमाणित किया जा सकेगा. इससे बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है.

डिजिटल रिकॉर्ड के लिए साइबर सुरक्षा जरूरी

किसी इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किए जाने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी. इनमें संबंधित कंप्यूटर सिस्टम का सही तरीके से काम करना, अधिकृत तरीके से डेटा दर्ज किया जाना, रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव से सुरक्षा और सुरक्षित डेटा ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. यानी डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित करना जरूरी होगा.

बैंक अधिकारी और मूल रिकॉर्ड पेश करने पर भी नियम

नए कानून में बैंक अधिकारियों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. अगर किसी कानूनी मामले में बैंक खुद पक्षकार नहीं है, तो उसके अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाने या मूल बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा. हालांकि, अगर अदालत को रिकॉर्ड की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह हो, नियमित रिकॉर्ड-कीपिंग में कोई बाधा आई हो या बैंक ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया हो, तो विशेष कारण दर्ज करने के बाद ऐसा आदेश दिया जा सकता है.

अन्य वित्तीय संस्थाएं भी आ सकती हैं दायरे में

केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार इस कानून के प्रावधानों को कुछ अन्य वित्तीय संस्थानों या संस्थानों की विशेष श्रेणियों पर भी लागू कर सकेगी. इसके लिए सरकार अलग से शर्तें, अपवाद या जरूरी बदलाव अधिसूचित कर सकती है.

1891 के कानून की जगह लेगा नया एक्ट

नया कानून बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त कर देगा. हालांकि, पुराने कानून के तहत पहले से बने अधिकारों और देनदारियों के साथ-साथ जांच और कानूनी कार्यवाहियों को सुरक्षित रखा जाएगा.

नए कानून को बैंकिंग व्यवस्था में तकनीकी बदलावों के अनुरूप कानूनी ढांचे को अपडेट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में डिजिटल डेटा के इस्तेमाल के लिए ज्यादा स्पष्ट और आधुनिक कानूनी व्यवस्था उपलब्ध होगी.
 


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