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खत्म हो सकता है GST का यह स्लैब, लगेगा महंगाई का एक और तगड़ा झटका

फिलहाल मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) ने इस स्लैब को खत्म करने के लिए सिफारिश कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में जल्द ही 12 फीसदी वाले स्लैब को खत्म किया जा सकता है. इसका फैसला जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में हो सकता है. फिलहाल मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) ने इस स्लैब को खत्म करने के लिए सिफारिश कर दी है. इससे महंगाई का एक और झटका जल्द लगने की तैयारी है. 

स्लैब से नहीं हो रही है ज्यादा आय

इस स्लैब से सरकारों को ज्यादा आय नहीं हो रही है. इसलिए मंत्रियों के समूह ने 12 फीसदी को खत्म करके केवल 5, 18 और 28 फीसदी का स्लैब रखने की वकालत की है. 12 फीसदी वाले स्लैब से कुल कमाई केवल 8 फीसदी ही होती है. 

यह प्रोडक्ट आते हैं दायरे में 

फिलहाल मक्खन, घी, फलों का रस, बादाम, ₹1,000 तक के जूते, प्रोसेसड फूड, सोलर वॉटर हीटर और होटल में 1000 रुपये तक के कमरे सहित अन्य कुछ प्रोडक्ट 12 फीसदी टैक्स के दायरे में आते हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह को टैक्स रेट को सही करने, स्लैब के विलय, छूट वाली सूची की समीक्षा और सही शुल्क उलटने का सुझाव देने का काम सौंपा गया है. समूह को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए जून में तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था. 

जून में बढ़ाया गया था स्लैब

जून में चंडीगढ़ में हुई 47वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में टेट्रा पैक, प्रिंटिंग, राइटिंग या ड्रॉइंग इंक, कटिंग ब्लेड वाले चाकू, पेपर चाकू, पेंसिल शार्पनर और ब्लेड, चम्मच, कांटे, करछुल, स्किमर्स, डेयरी मशीनरी, पावर पंप सहित कई वस्तुओं के स्लैब में परिवर्तन किया गया था और एलईडी लैंप को 12% से 18% स्लैब में लाया गया है. 

इन चार स्लैब से होती है सरकार को कमाई

जीएसटी, जिसमें कई राज्य और केंद्रीय टैक्स शामिल हैं के चार स्लैब हैं- 5%, 12%, 18% और 28%. चार प्रमुख स्लैबों के अलावा, कटे हुए हीरे और आभूषण व कीमती धातुओं पर क्रमशः 1.5% और 3% सेस लगता है. इसके अलावा ऑटोमोबाइल जैसी चुनिंदा वस्तुओं पर टॉप-अप क्षतिपूर्ति सेस भी लगता है. आवश्यक वस्तुओं पर 5% जीएसटी लगता है और Sin Goods पर 28% की दर लगती है. 

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