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ऐसे अमीरों पर है मेटावर्स कंपनियों की नज़र, तैयार कर रहीं ‘खास’ प्रोडक्ट
मेटावर्स कंपनियों की नजर ज्यादा कमाने वाले ऐसे लोगों पर है, जिनकी लाइफ में स्ट्रेस काफी ज्यादा है और उन्हें सुकून की तलाश है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रियल लाइफ जैसी वर्चुअल लाइफ का अहसास कराने वाली टेक्नोलॉजी 'मेटावर्स' का क्रेज बढ़ता जा रहा है. कंपनियों में इसमें एक ऐसा बाजार नज़र आ रहा है, जिसमें मोटा मुनाफा मौजूद है. यही वजह है कि इस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जुलाई तक करीब 200 कंपनियां मेटावर्स पर काम कर रही थीं, लेकिन आज ये संख्या बढ़कर 500 हो गई है. मेटावर्स कंपनियां खासतौर पर ऐसे लोगों पर फोकस कर रही हैं, जो अमीर हैं, लेकिन तनाव में घिरे हुए हैं.
नया हेडसेट आया बाजार में
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मेटावर्स कंपनियों की नजर ज्यादा कमाने वाले ऐसे लोगों पर है, जिनकी लाइफ में स्ट्रेस काफी ज्यादा है और उन्हें सुकून की तलाश है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए हेडफोन लॉन्च किए गए हैं, जिसकी कीमत 40 हजार से शुरू होती है. इन हेडफोन के जरिए आभासी दुनिया में खोने के साथ-साथ वर्चुअल मीटिंग भी की जा सकती हैं. इससे पहले 2020 में हेडसेट क्वेस्ट-2 लॉन्च किया गया था, जिसके अब तक डेढ़ करोड़ हेडसेट बिक चुके हैं. दरअसल, मेटावर्स कंपनियां इस धारणा को बदलना चाहती हैं कि ये टेक्नोलॉजी केवल गेमिंग के लिए है. इसलिए वो हर दिन कुछ नया करने पर ध्यान दे रही हैं.
खेलेंगे और काम भी करेंगे
फेसबुक से Meta हुई कंपनी के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि मेटावर्स इंटरनेट का वो एडिशन है, जिस पर अंत में लोग खेलेंगे भी और काम भी करेंगे. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाला समय मेटावर्स का ही है. याजी वजह है कि कंपनियों ने इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. वो ऐसे प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं, जिन्हें सुकून की तलाश करने वाले अमीर लोग आसानी से खरीद सकें.
क्या है मेटावर्स
Metaverse दो शब्दों से मिलकर बना है, Meta और Verse, जिसमें Meta का मतलब ग्रीक में होता है Beyond या परे या बाहर या आगे की चीज और verse का मतलब यूनिवर्स से है. यानी ऐसी दुनिया जो यूनिवर्स से परे हो. अगर एक लाइन में कहें तो मेटावर्स एक ऐसी आभासी दुनिया है जहां पर आपको शरीर के साथ मौजूद होने की जरूरत नहीं, आप टेक्नोलॉजी की मदद से वहां मौजूद रहते हैं. इंटरनेट के जमाने में जैसे हम आजकल फोन पर बात करते हैं, वीडियो कॉल करते हैं और जूम कॉन्फ्रेंस कॉल करते है. Metaverse इससे आगे की टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में हम महसूस करते हैं कि हम जिनसे बात कर रहे हैं, हम उनके साथ वहीं मौजूद हैं, उन्हें ऐसे देख पाते हैं जैसे वो हमारे सामने ही बैठे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो मेटावर्स वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी से तैयार की गई ऐसी जगह है, जिस पर दुनियाभर के लोग आपस में मिल सकते हैं.
किसने रखा मेटावर्स का नाम?
मेटावर्स का नाम किसी वैज्ञानिक, किसी लेखक या राजनीतिज्ञ ने नहीं बल्कि नोबल पुरस्कार विजेताओं के एक समूह ने रखा है. हालांकि मेटावर्स कोई नया नाम नहीं है, नील स्टीफेंसन ने 1992 में अपने एक उपन्यास "स्नो क्रैश" में मेटावर्स का जिक्र किया था. इसमें मेटावर्स को एक ऐसी दुनिया के रूप में पेश किया गया था, जिसमें लोग किसी गैजेट जैसे VR- वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट की सहायता से एक दूसरे से जुड़ते थे. इसी तरह साल 2003 में लॉन्च हुए 'Second Life' को मेटावर्स का पूर्व वर्जन मान सकते हैं जो कि मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म है.
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