होम / रियल एस्टेट / अमेरिकी टैरिफ के साइड इफेक्ट : किफायती घरों पर संकट, MSME सेक्टर की मुश्किलें बढ़ीं

अमेरिकी टैरिफ के साइड इफेक्ट : किफायती घरों पर संकट, MSME सेक्टर की मुश्किलें बढ़ीं

2025 की पहली छमाही में टॉप 7 शहरों में किफायती घरों की हिस्सेदारी घटकर 18% पर आई. MSME वर्ग पर टैरिफ का सीधा असर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार तनाव और 50% टैरिफ की घोषणा अब केवल व्यापारिक अड़चनें नहीं रह गई हैं. यदि समय रहते इन पर कोई नरमी नहीं लाई गई, तो ये भारत के किफायती आवास क्षेत्र को गहरे संकट में डाल सकते हैं, जो पहले से ही अस्थिर जमीन पर खड़ा है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट दर्शाती है कि 2025 की पहली छमाही में किफायती घरों की बिक्री में तेज गिरावट दर्ज की गई है – जो स्पष्ट संकेत है कि यह टैरिफ सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि आम भारतीयों के घरों के सपनों पर भी चोट कर रहा है.

भारत के किफायती आवास क्षेत्र की प्रमुख मांग सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे उद्यमों (SME) से आती है. ये उद्योग भले ही आकार में छोटे हैं, लेकिन भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. इनके श्रमिक ही किफायती घरों के सबसे बड़े खरीदार होते हैं.

ANAROCK के आंकड़ों के अनुसार, H1 2025 तक टॉप 7 शहरों में बेचे गए 1.90 लाख यूनिट्स में से केवल 34,565 यूनिट्स (18%) ही किफायती श्रेणी में थीं. जबकि 2019 में इनकी हिस्सेदारी 38% थी. यानी मांग में बड़ी गिरावट आई है.

महामारी के बाद किफायती आवास की मांग में आई गिरावट ने इस सेगमेंट में नए प्रोजेक्ट लॉन्च को भी प्रभावित किया है, जिससे देश की 1.46 अरब आबादी के करीब 17.76% हिस्से पर असर पड़ा है. 2019 में जहां कुल लॉन्च का 40% हिस्सा किफायती आवास का था, वहीं H1 2025 में यह घटकर सिर्फ 12% रह गया है.

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ये जीडीपी में लगभग 30% और निर्यात में 45% का योगदान देते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, MSMEs ने पिछले चार वर्षों में जबरदस्त विकास किया है – 2020-21 में जहां 52,849 MSMEs निर्यात में शामिल थे, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.73 लाख से अधिक हो गया.

MSME और SME क्षेत्रों में औपचारिक और अनौपचारिक रूप से 26 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं, विशेष रूप से वस्त्र, इंजीनियरिंग, ऑटो पार्ट्स, रत्न और आभूषण तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों में, जो भारत की आर्थिक रीढ़ माने जाते हैं.

अब तक, वैश्विक बाजार MSMEs के लिए एक सुनहरा अवसर था, वे नई निर्यात संभावनाएं तलाश सकते थे, आपूर्ति श्रृंखलाएं बना सकते थे, और राजस्व के नए स्रोत खोज सकते थे. लेकिन अब अमेरिका द्वारा लगाया गया नया टैरिफ इस राजमार्ग पर एक अवरोध बन गया है और उस किफायती आवास की गाड़ी को रोक रहा है, जो भारत की सबसे बड़ी आबादी को गृहस्वामित्व का सपना दिखाती है.

ANAROCK ग्रुप के कार्यकारी निदेशक (रिसर्च एंड एडवाइजरी) डॉ. प्रशांत ठाकुर ने कहा, “INR 45 लाख या उससे कम कीमत वाले इस श्रेणी के घर पहले ही कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए थे और अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं. ट्रम्प के टैरिफ इस क्षेत्र की बची-खुची उम्मीद को भी खत्म कर सकते हैं.”

डॉ. ठाकुर कहते हैं, “टैरिफ के कारण इस बड़े श्रमबल की भविष्य िीाो3ोकी आय में व्यवधान आ सकता है, जिससे किफायती आवास की मांग पटरी से उतर सकती है. इससे न केवल बिक्री प्रभावित होगी, बल्कि डेवलपर्स द्वारा नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग भी घट सकती है. इसके अलावा, महामारी के बाद से निर्माण लागत में भारी वृद्धि पहले ही डेवलपर्स के लिए चुनौतियां पैदा कर रही है.”

ऐसे में, जो आवास वित्त संस्थान इस वर्ग को ऋण उपलब्ध कराते हैं, वे नए जोखिमों का सामना कर सकते हैं – जैसे कि लोन डिफॉल्ट का खतरा या मांग घटने से ऋण वितरण में कमी.

संक्षेप में कहें, तो भारत के किफायती आवास क्षेत्र का भविष्य अधर में लटका है. अब यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार समन्वित नीतियों, वित्तीय सुरक्षा उपायों और खरीदार-केंद्रित सहायता योजनाओं के माध्यम से इस संकट का समाधान करती है.

कभी भारत की चुनावी राजनीति की केंद्रबिंदु रही यह आवास योजना – और हर नागरिक के आर्थिक सुरक्षा के सपने की प्रतीक – अब अमेरिका के टैरिफ युद्ध में अप्रत्यक्ष ‘कोलेटरल डैमेज’ बनती दिख रही है.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

फेस्टिव क्वार्टर में कमर्शियल रियल एस्टेट की बदलती तस्वीर, ऑफिस से रिटेल तक लीजिंग में क्यों आती है तेजी?

त्योहारी सीजन में कंपनियां नए ऑफिस, रिटेल स्टोर और बेहतर कमर्शियल लोकेशन पर तेजी से लेती हैं फैसले, 2025 में ऑफिस और रिटेल दोनों सेगमेंट में मजबूत लीजिंग दर्ज

3 days ago

UP-RERA का बड़ा फैसला, नोएडा-गाजियाबाद में ₹472 करोड़ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

UP-RERA के अनुसार, गाजियाबाद में करीब ₹286 करोड़ की लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है. इनमें दो कमर्शियल और एक रेसिडेंशियल परियोजना शामिल है.

4 days ago

द्वारका एक्सप्रेसवे ने बदला गुरुग्राम के लग्जरी रियल एस्टेट का नक्शा, 5 साल में 135% बढ़े घरों के दाम

एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वारका एक्सप्रेसवे अब गुरुग्राम के स्थापित लग्जरी इलाकों को दे रहा चुनौती, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स से बढ़ी मांग

1 week ago

घर महंगे होते गए, खरीदारों की रफ्तार थमी, NCR की बिक्री में 27% गिरावट: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बाजारों ने कीमतों की इस तेजी में अहम भूमिका निभाई.

22-August-2026

भारत में सीनियर लिविंग का बाजार रफ्तार पकड़ रहा, 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान

वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी और आधुनिक, सुरक्षित व हेल्थकेयर सुविधाओं से लैस घरों की मांग बढ़ा रही बाजार का आकार, करीब ₹13,000 करोड़ के निवेश की भी तैयारी

19-August-2026


बड़ी खबरें

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

1 hour ago

नेस्ले इंडिया के खिलाफ FSSAI ने दर्ज किए 3 केस, फॉर्मूला फूड के प्रचार और पोषण मानकों पर उठे सवाल

FSSAI के मुताबिक, Nestlé India के दो उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे पाए गए जिन्हें संबंधित नियमों का उल्लंघन माना गया. इनमें NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 शामिल हैं.

34 minutes ago

आंध्र प्रदेश में बनेगा 12 लाख ग्रॉस टनेज क्षमता वाला मेगा शिपयार्ड, ₹15 हजार करोड़ निवेश

इस पूरे क्लस्टर के लिए आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी ने मिलकर NSHIP-AP नाम की विशेष कंपनी बनाई है. इस परियोजना के लिए MDL को एंकर शिपयार्ड के तौर पर चुना गया है.

1 hour ago

प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹12.12 लाख करोड़ के पार, STT से सरकार की कमाई 53% बढ़ी

17 सितंबर तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13% बढ़ा, एडवांस टैक्स में भी 16.18% की तेज वृद्धि

18 hours ago

Infosys के सीनियर VP बोले, सेमीकंडक्टर में भारत के लिए ‘Invent in India’ का बड़ा मौका

Semicon India 2026 में मेघल ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की पारंपरिक सप्लाई चेन और डिजाइन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो रहा है. खासकर AI आधारित वर्कलोड यह तय कर रहे हैं कि चिप्स को किस तरह डिजाइन किया जाए.

16 hours ago