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रियल एस्टेट में नया बिजनेस मॉडल: ₹6,300 करोड़ के नेट-जीरो प्रोजेक्ट्स के साथ बूट्स की एंट्री

बूट्स की दीर्घकालिक परिकल्पना ‘आत्मनिर्भर आवास’ की है, जहां घर बाहरी बिजली, पानी और सीवर प्रणालियों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ काम कर सकें.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

नेट-जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी कंपनी बूट्स ने अब औपचारिक रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रख दिया है. कंपनी ने ₹6,300 करोड़ से अधिक की इन्वेंट्री के साथ अपने रियल्टी वर्टिकल की शुरुआत की घोषणा की है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश के प्रमुख शहर वायु प्रदूषण, जल संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

पारंपरिक रियल एस्टेट से अलग होगा बूट्स का मॉडल

अब तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में हाई-परफॉर्मेंस और नेट-ज़ीरो इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम कर चुकी बूट्स, अपने इंजीनियरिंग अनुभव को सीधे आवासीय विकास में लागू कर रही है. कंपनी का कहना है कि उसका रियल एस्टेट मॉडल केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मापने योग्य जीवन गुणवत्ता सुधार पर आधारित है.

स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और कम ऊर्जा खपत पर जोर

बूट्स के प्रबंध निदेशक दीपक राय के अनुसार, कंपनी शहरी जीवन की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखकर आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इनडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहे और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नियंत्रित बना रहे.

जल सुरक्षा के लिए परियोजनाओं में लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो पानी की शुद्धता, प्रवाह और उपयोग की दक्षता पर लगातार नजर रखेंगे. वहीं ऊर्जा के मोर्चे पर, केंद्रीकृत और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के जरिए बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाने का दावा किया गया है.

नोएडा, अलवर और वृंदावन से शुरुआत

रियल एस्टेट क्षेत्र में बूट्स ने अपनी शुरुआत नोएडा, अलवर और वृंदावन से की है. पहले चरण में कंपनी 60 लाख वर्ग फुट से अधिक का सेलएबल एरिया विकसित कर रही है. नोएडा के ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 76 में प्रीमियम हाई-राइज़ आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें 4 बीएचके फ्लैट और डुप्लेक्स पेंटहाउस शामिल होंगे. इन परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-आधारित डिजाइन और स्वास्थ्य-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है.

अलवर में शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत

अलवर में बूट्स ने एक ऐसी परियोजना शुरू की है, जिसे शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत के रूप में चिन्हित किया जा रहा है. इसमें 2 और 3 बीएचके आवास उपलब्ध होंगे. इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा, स्वच्छ इनडोर वातावरण और ऊर्जा दक्षता को प्रमुख आधार बनाया गया है.

देश के कई शहरों में विस्तार की तैयारी

आगामी वर्षों में बूट्स मुंबई, लखनऊ, अयोध्या, देहरादून, कुरुक्षेत्र, झांसी, चित्रकूट और प्रयागराज जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रही है. कंपनी का फोकस मुख्य रूप से एंड-यूजर डिमांड पर रहेगा, न कि केवल निवेश आधारित विकास पर. इसके साथ ही विभिन्न शहरों में दोहराए जा सकने वाले आवासीय मॉडल विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है.

पहले भी कर चुकी है नेट-ज़ीरो परियोजनाएं पूरी

इंजीनियरिंग और सस्टेनेबिलिटी आधारित संगठन के रूप में बूट्स इससे पहले झांसी की दुनिया की पहली नेट-जीरो लाइब्रेरी और कुरुक्षेत्र के नेट-जीरो म्यूजियम जैसी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है. कंपनी का मानना है कि भारतीय आवास क्षेत्र का भविष्य केवल दिखावटी लग्जरी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्वास्थ्य, दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे ठोस मानकों पर आधारित होना चाहिए.

 


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