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इन्फ्रा पुश + हाउसिंग बूम: बजट 2026 से रियल एस्टेट को क्या उम्मीदें?

बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश, हाउसिंग इंसेंटिव और नीतिगत स्पष्टता की बड़ी उम्मीद है.

रितु राणा 3 months ago

यूनियन बजट 2026 से पहले भारत का रियल एस्टेट सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है. बीते कुछ वर्षों में सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए भारी निवेश ने हाउसिंग डिमांड, प्राइस ट्रेंड और निवेश के पैटर्न को साफ तौर पर प्रभावित किया है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, स्मार्ट सिटी, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अर्बन मोबिलिटी जैसे प्रोजेक्ट्स अब केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत के रियल एस्टेट मैप को दोबारा गढ़ने का काम कर रहे हैं. ऐसे में बजट 2026 को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश और हाउसिंग बूम के बीच निर्णायक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगा रियल एस्टेट का स्वरूप

एसीई–एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड के सीएफओ राजन लूथरा कहते हैं, “बजट 2026 के पास भारत के शहरी और बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देने का बड़ा मौका है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरों में अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाओं पर लगातार जोर देने से न सिर्फ निर्माण गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि देश के रियल एस्टेट का स्वरूप भी बदलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी के चलते अब मांग सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से नए आवासीय और व्यावसायिक विकास केंद्र के रूप में उभर रहे हैं.”

वे आगे कहते हैं कि निर्माण उपकरण उद्योग के लिए परियोजनाओं का तेजी से आवंटन और समय पर पूरा होना बेहद अहम है. निजी निवेश को बढ़ाने के लिए जीएसटी को सरल बनाना, ऋण की आसान उपलब्धता और कम ब्याज दरें जरूरी होंगी. यदि बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और एक संतुलित व टिकाऊ रियल एस्टेट विकास चक्र तैयार होगा.

ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ का आधार

जे इन्फ्राटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित जांदू का मानना है, “बड़े स्तर का ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है और बजट 2026 इस रफ्तार को बनाए रखने में मदद कर सकता है. राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है ताकि माल ढुलाई की दक्षता बढ़े, लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और क्षेत्रीय जुड़ाव मजबूत हो.”

उनके अनुसार, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से छोटे शहरों और प्रमुख कॉरिडोर के आसपास हाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और कमर्शियल हब की मांग बढ़ेगी. डिजिटल प्लानिंग, अनुमोदन और एसेट मैनेजमेंट की दिशा में मजबूत कदम परियोजनाओं के निष्पादन को तेज करेंगे और विकास को अधिक संतुलित बनाएंगे.

अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग पर बजट से सबसे बड़ी उम्मीदें

क्रेडाई वेस्ट यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ी उम्मीद अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग को लेकर है. उन्होंने कहा कि होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने, आयकर की धारा 80सी और 24(बी) में राहत देने तथा स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स के लिए आसान और सस्ती फंडिंग व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही सेक्टर को एक संगठित उद्योग के रूप में मान्यता देने की दिशा में ठोस पहल और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस को लेकर स्पष्ट नीति बनने से निवेश का माहौल बेहतर होगा. विकास प्राधिकरणों के लंबित बकाया के समाधान से भी रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है.

टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव से रियल एस्टेट को मिलेगा मजबूती का आधार

शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप के अनुसार यूनियन बजट में प्रमोटरों और घर खरीदारों के लिए क्रमशः टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो रियल एस्टेट सेक्टर की मज़बूत रीढ़ हैं. टैक्स को आसान बनाना, रेगुलेटरी क्लैरिटी, रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेटस, परियोजना से जुड़े अप्रूवल का सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और निर्माण सामग्री पर इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे लंबे समय से रुके हुए सुधार सभी कैटेगरी में प्रोजेक्ट डेवलपमेंट को काफी बढ़ावा दे सकते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट एक-दूसरे से गहरा जुड़ाव रखते हैं, इसलिए योजनाबद्ध निवेश और उसके साथ सामाजिक तथा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी लोकेशन पर हाउसिंग और कमर्शियल ग्रोथ को तेज़ करने के लिए जरूरी है.

उद्योग का दर्जा और होम लोन ब्याज में बड़ी राहत की अपेक्षा

सुरेश गर्ग, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, निराला वर्ल्ड के अनुसार हर साल की तरह, इस साल भी हमें बजट से कुछ अपेक्षाएँ हैं. हम आशा करते हैं कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा प्रदान करे. इसके अलावा, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार होम लोन ब्याज कटौती की सीमा को वर्तमान 2 लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये कर दे. 100% कटौती होना तो और भी बेहतर होगा. इनके अलावा, हमें बजट से कोई अन्य अपेक्षा नहीं है.

टियर-2 शहरों में बिक्री का मजबूत संकेत

युगेन इंफ्रा के एमडी शीशराम यादव कहते हैं कि यूनियन बजट 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर नीति निरंतरता और बेहतर इम्प्लीमेंटेशन को लेकर आशावादी है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास खासतौर पर मेट्रो रेल, हाईवे और स्मार्ट सिटी ने 2025 से ही रेजिडेंशियल डिमांड को नया आकार देना शुरू कर दिया है.

वे बताते हैं कि Q1 2025 में भारत के टॉप 15 टियर-2 शहरों में घरों की बिक्री का कुल मूल्य सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर ₹40,443 करोड़ पहुंच गया. लखनऊ में यूनिट सेल्स 25 प्रतिशत और वैल्यू 48 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कोयंबटूर में 50 प्रतिशत से अधिक की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की गई. गांधीनगर, मोहाली, गोवा, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और कोच्चि जैसे शहरों में भी सकारात्मक ग्रोथ देखने को मिली.

उनके अनुसार, यह ट्रेंड होम बायर्स की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है. बजट 2026 से ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, अफोर्डेबल हाउसिंग इंसेंटिव, आसान हाउसिंग फाइनेंस और टैक्सेशन में स्पष्टता की उम्मीद है. साथ ही वे लक्ज़री हाउसिंग पर जीएसटी घटाने की भी मांग करते हैं.

लाइफस्टाइल और सेकेंड-होम हाउसिंग को मिलेगा बढ़ावा

ALYF के फाउंडर और सीईओ सौरभ वोहरा कहते हैं, “बजट 2026 से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक बनने की उम्मीद है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हाउसिंग डिमांड को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है. मेट्रो, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स टियर-2 और टियर-3 शहरों को रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के अगले ग्रोथ इंजन में बदल रहे हैं.”

उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते खरीदार अब बड़े शहरों से बाहर बेहतर जीवन गुणवत्ता और दीर्घकालिक मूल्य वाले घरों की तलाश कर रहे हैं. दो सेल्फ-ऑक्यूपाइड घरों पर नोटियोनल रेंटल इनकम की छूट ने सेकेंड-होम ओनरशिप को और व्यवहार्य बना दिया है.

नोएडा और एनसीआर में हाई-ग्रोथ कॉरिडोर

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं, “जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब आ रहे हैं, नोएडा का रियल एस्टेट मार्केट एक अहम मोड़ पर है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार ने इस इलाके को हाई-ग्रोथ रेजिडेंशियल और कमर्शियल कॉरिडोर बना दिया है.”

वे मानते हैं कि सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को ₹5 लाख तक बढ़ाने से डिमांड को मजबूती मिलेगी. मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट, रेंटल हाउसिंग और लास्ट-माइल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने वाली नीतियां नोएडा को एक आत्मनिर्भर अर्बन इकॉनमी बना सकती हैं.

स्टार्टअप्स, एमएसएमई और टेक्नोलॉजी पर फोकस

वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन गौरव सिंह कहते हैं कि बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई डेवलपर्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है. नियमों और मंजूरियों को आसान करने, होम और बिजनेस लोन को सुलभ बनाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने से प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे और लागत घटेगी. उनके अनुसार, ग्रीन बिल्डिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी और आर एंड डी के लिए प्रोत्साहन से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और सेक्टर की दीर्घकालिक प्लानिंग आसान होगी.

रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों पर नजर

एलांते ग्रुप की एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट हेनाम खनेजा कहती हैं, “यूनियन बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को ऐसे उपायों की उम्मीद है जो रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की डिमांड को मज़बूत करें. होम लोन इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स छूट मौजूदा ऊंची ब्याज दरों के बीच खरीदारों को राहत देगी.” वे ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट के लिए इंसेंटिव की जरूरत पर भी जोर देती हैं.

टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम डिमांड

रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल कहते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी और बदलती जीवनशैली के कारण टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम खरीदारों की रुचि तेजी से बढ़ रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, सरल मंजूरी प्रक्रियाएं और मजबूत शहरी नीतियां इन शहरों में मांग और कीमतों दोनों को टिकाऊ रूप से बढ़ा सकती हैं.

स्थिर मांग और चुनिंदा प्राइस ग्रोथ

उमिया बिल्डकॉन लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी अनिरुद्ध मेहता कहते हैं, “मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे और शहरी पुनर्विकास में हो रहा निवेश कनेक्टिविटी के साथ-साथ दीर्घकालिक संपत्ति मूल्यों को भी आकार दे रहा है.” उनके अनुसार, अच्छी कनेक्टिविटी वाले माइक्रो-मार्केट्स में चुनिंदा मूल्य वृद्धि की संभावना बनी हुई है, खासकर प्रीमियम और हाई-एंड सेगमेंट में.

बजट 2026 को “निर्णायक क्षण”

टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर के सीईओ अक्षय तनेजा कहते हैं, “भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब एक इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन हाउसिंग बूम में प्रवेश कर रहा है, जिससे बजट 2026 एक निर्णायक क्षण बन गया है क्योंकि यह नया कर व्यवस्था लागू होने से पहले अंतिम नीतिगत संकेत देगा (1 अप्रैल से लागू). दिल्ली मेट्रो का सोनीपत विस्तार, द्वारका एक्सप्रेसवे, कुंडली–मानेसर–पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे, यूईआर-2 और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स एनसीआर के बाहरी इलाकों और टियर-2 शहरों को आत्मनिर्भर रिहायशी और लक्जरी हाउसिंग हब में बदल रहे हैं, और भारत के स्मार्ट सिटी विजन को आगे बढ़ा रहे हैं.”

वे आगे कहते हैं सेक्टर को नीति स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जिनमें सस्ती हाउसिंग की कैप को ₹45 लाख से बढ़ाकर ₹70–75 लाख करना, उद्योग का दर्जा देना और हाउसिंग को राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में मान्यता देना शामिल है.

अक्षय तनेजा का कहना है कि इससे संस्थागत और वैश्विक पूंजी आकर्षित होगी, रोजगार बढ़ेगा और रियल एस्टेट का जीडीपी में 7–8% योगदान और मजबूत होगा. वे यह भी कहते हैं कि सरल कर संरचना, अनुक्रमणिका सहित पूंजीगत लाभ का पुनर्गठन, जीएसटी और स्टांप ड्यूटी की समानता, बेहतर होम लोन लाभ, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और मजबूत पीएमएवाई अर्बन 2.0 से अफोर्डेबिलिटी बढ़ेगी, प्रोजेक्ट डिलीवरी तेज होगी और अगले दशक के लिए भारत की रियल एस्टेट तस्वीर बदल जाएगी.

संरचनात्मक बदलाव और उभरते शहरों का नया रोल

प्रॉपर्टी पिस्टल के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष नारायण अग्रवाल का मानना है कि, “टियर-2 और टियर-3 शहरों में बूम भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जहां विकास अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आत्मनिर्भर शहरी अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है. इंदौर, सूरत, जयपुर, लखनऊ, कोयंबटूर, त्रिची और मोहाली जैसे शहर तेजी से उभर रहे हैं, जहां अफोर्डेबिलिटी, बेहतर जीवनशैली और मजबूत निवेश संभावनाएं एक साथ देखने को मिल रही हैं.”

वे आगे कहते हैं कि एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार, एयरपोर्ट, वंदे भारत ट्रेन और आईटी पार्क, जीसीसी तथा इंडस्ट्रियल क्लस्टर के जरिए रोजगार का विकेंद्रीकरण इन शहरों में हाउसिंग डिमांड को मजबूती दे रहा है. आंकड़ों का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि सस्ती हाउसिंग का हिस्सा 2021 में 37 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 18 प्रतिशत रह गया है, जबकि ₹1.5 करोड़ से ऊपर के लक्ज़री होम्स का शेयर बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया है. यह ट्रेंड कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और प्रीमियम डिमांड को दर्शाता है. बजट 2026 से सेक्टर को कर संरचना में सुधार, जीएसटी में कमी, स्टांप ड्यूटी में समानता और पहली बार खरीदारों के लिए बेहतर लाभ की उम्मीद है.

ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम डेवलपमेंट पर जोर

ब्राह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस आशीष शर्मा कहते हैं, “बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर में बनी हुई गति को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. हमें उम्मीद है कि बजट ऐसे कदम उठाएगा जो बुनियादी ढांचे के विकास को तेज करें, दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुंच आसान बनाएं और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल करके परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में मदद करें.”

उनके अनुसार, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी में लगातार पूंजी निवेश मेट्रो शहरों के साथ-साथ उभरते शहरों में भी आवास और ऑफिस स्पेस की मांग को बढ़ाता रहेगा. इसके अलावा, ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम निर्माण के लिए कर नियमों और प्रोत्साहनों में स्पष्टता से न केवल लागत दक्षता बढ़ेगी, बल्कि संपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक वैल्यू भी मजबूत होगी. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भविष्य के लिए तैयार शहरी वातावरण विकसित होगा.

फाइनेंसिंग और मांग आधारित ग्रोथ की उम्मीद

अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल का कहना है कि, “बजट 2026 से पहले हमें ऐसे कदमों की उम्मीद है जो उपभोक्ता-आधारित विकास को मजबूत करें, निवेशकों का भरोसा बढ़ाएं और आवासीय तथा कमर्शियल रियल एस्टेट में वित्तपोषण तक पहुंच को आसान बनाएं.”

वे बताते हैं कि सेक्टर को ऐसी पहलों की जरूरत है जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को तेज करें, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और खासकर उभरते शहरी बाजारों में परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करें. उनके अनुसार, मांग पक्ष पर ध्यान और शहरी बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश बाजार की गति बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. बजट 2026 यदि कुशल वित्तपोषण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाता है, तो यह पूरे देश में आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा दे सकता है.

नीतिगत संतुलन और निवेश योग्य इकोसिस्टम

लैंडमार्क ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन संदीप छिल्लर कहते हैं, “बजट 2026 से पहले हमारी उम्मीद है कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी. व्यक्तियों के लिए टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने से हाउसिंग डिमांड को मजबूती मिल सकती है, जबकि तर्कसंगत टैक्सेशन और नीतिगत स्पष्टता से ऑफिस और रिटेल डेवलपमेंट की व्यवहार्यता बढ़ेगी.”

वे आगे कहते हैं कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिए तेज़ मंजूरी प्रक्रिया लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याओं को कम कर सकती है. उनके अनुसार, ऐसा बजट जो खरीदारों की सामर्थ्य, प्रोजेक्ट निष्पादन की दक्षता और लॉन्ग-टर्म कैपिटल डिप्लॉयमेंट के बीच संतुलन बनाए, वह न केवल डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट को व्यवहार्य बनाएगा, बल्कि घरेलू और संस्थागत निवेश को भी आकर्षित करेगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर बना आर्थिक विकास की रीढ़

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रास का कहना है, “इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भारत की आर्थिक ग्रोथ की रीढ़ बना हुआ है और देश को मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण इनेबलर है. बजट 2026 से पूरी उम्मीद है कि सरकार नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसी प्रमुख पहलों को और गति देगी.”

वे बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर आवंटन न केवल बनाए रखना, बल्कि उसे बढ़ाना भी जरूरी है, क्योंकि इसका रोजगार, औद्योगिक विकास और शहरी विकास पर मल्टीप्लायर प्रभाव साबित हो चुका है. ट्रांसपोर्टेशन, एनर्जी, पानी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ा हुआ निवेश, स्मार्ट सिटी, अफोर्डेबल हाउसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस के साथ, भारत की ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा. साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीति में स्पष्टता और सहयोग को वे बेहद जरूरी मानते हैं.

अगला विकास चरण: नियोजित शहरीकरण और मिक्स्ड-यूज टाउनशिप

M3M नोएडा के डायरेक्टर यश गर्ग ने कहा  केंद्रीय बजट से पहले, हमें उम्मीद है कि नोएडा जैसे क्षेत्रों पर मजबूत नीतिगत फोकस देखने को मिलेगा, जो जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर और तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के चलते परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी ने नोएडा के रियल एस्टेट परिदृश्य को काफी हद तक नया आकार दिया है, और विकास के अगले चरण को नियोजित शहरीकरण, एकीकृत टाउनशिप और सुव्यवस्थित मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट्स के जरिये आगे बढ़ाया जाना चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि बजट में उभरते कॉरिडोर्स में घर खरीदारों के लिए बेहतर टैक्स लाभ पेश किए जाएंगे और रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा, जिससे दीर्घकालिक फाइनेंसिंग तक पहुंच संभव हो सकेगी और समग्र निवेशक भरोसा मजबूत होगा. मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और सतत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश से नोएडा एक आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शहरी गंतव्य के रूप में विकसित हो सकेगा.

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा और नीति में स्थिरता बनी रही, तो यह रियल एस्टेट को एक संतुलित, टिकाऊ और निवेश-आकर्षक इकोसिस्टम में बदलने का काम करेगा. इस तरह बजट 2026 भारत के रियल एस्टेट मैप को नए शहरों, नए कॉरिडोर और नए निवेश मॉडल के साथ फिर से लिख सकता है.


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