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2025 में भारतीय रियल एस्टेट: ऊंची लागत के दबाव के बीच प्रीमियम डिमांड और निवेश ने संभाला बाजार

2025 में भारतीय रियल एस्टेट ने ऊंची लागत और ब्याज दरों की चुनौतियों के बावजूद प्रीमियम डिमांड, मजबूत निवेश और नीति समर्थन के दम पर स्थिरता बनाए रखी और 2026 के लिए सस्टेनेबल ग्रोथ की मजबूत नींव तैयार की.

रितु राणा 4 months ago

जैसे-जैसे वर्ष 2025 अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र ने तेज प्रगति और सुदृढ़ीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाया. उच्च ब्याज दरों, निर्माण लागत में वृद्धि और महंगाई ने बाजार पर दबाव डाला, लेकिन प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बाहरी‑घरेलू निवेश ने सेक्टर की स्थिति को संतुलित रखा. 2025 में देश के प्रमुख 7 शहरों में कुल रेजिडेंशियल बिक्री का कुल मूल्य ₹6 लाख करोड़ पार हुआ, जबकि यूनिट‑लेवल बिक्री में हल्की गिरावट देखी गई, जो बाजार की स्थिरता और निवेश आकार को दर्शाती है.

ब्याज दरें, निर्माण लागत और मांग पर असर

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज दरों में उतार‑चढ़ाव और महंगाई ने होम लोन महंगा किया, जिससे कुछ खरीदार निर्णय लेने में देरी कर रहे हैं. इससे विशेषकर मिड‑इनकम सेगमेंट में डिमांड दबाव महसूस हुआ, लेकिन प्रीमियम हाउसिंग जैसे ₹1 करोड़ से ऊपर वाली संपत्तियों में 107% तक की सालाना वृद्धि ने दिखाया कि उच्च‑एंड डिमांड अभी भी मजबूत है.

सेक्टर‑वार डिमांड और सप्लाई

रेजिडेंशियल हाउसिंग में लक्जरी और प्रीमियम सेगमेंट ने साल 2025 में बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मिड‑इनकम और अफोर्डेबल हाउसिंग ने स्थिर मांग दिखाई. सरकारी नीतियां, RERA के नियम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश ने सेक्टर को सहारा दिया.

कमर्शियल और ऑफिस स्पेस में हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण IT और GCC कंपनियों ने अपने ऑफिस स्पेस को ग्रेड‑A, क्लस्टर्ड और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस में बदलने की दिशा में निवेश बढ़ाया.

टियर‑2 और टियर‑3 शहरों में भी प्रीमियम सेगमेंट की मांग बढ़ी, जबकि सप्लाई और यूनिट‑बेस्ड बिक्री में गिरावट देखी गई. गोवा, विशेष रूप से साउथ और नॉर्थ गोवा, निवेशकों के लिए गंभीर एंड-यूजर और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मार्केट के रूप में उभर रहा है.

सरकारी नीतियां और भरोसा

RERA और स्मार्ट सिटी पहल, साथ ही सपोर्टिव मॉनेटरी और फिस्कल नीतियों ने सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बढ़ाया है. इन सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और हाउसिंग सप्लाई चेन को मजबूत किया.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अपेक्षित ब्याज दर स्थिरता से आवासीय मांग और निवेश में सुधार की उम्मीद है. प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट मजबूत रहेगा, जबकि टियर‑2 मार्केट में संतुलित ग्रोथ दिखाई देगी.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर-स्ट्रेटजी सुदीप भट्ट ने बताया "2025 भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक बदलाव वाला दौर रहा, क्योंकि ग्रोथ को तेज़ करने के लिए सपोर्टिव मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी एक साथ आईं. RBI द्वारा रेपो रेट में लगातार और सोच-समझकर की गई कमी से होम लोन की अफोर्डेबिलिटी में काफी सुधार हुआ, जिससे सभी सेगमेंट में खरीदारों का भरोसा और डिमांड बढ़ी. GST 2.0 ने टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाया, इनपुट कॉस्ट कम की और डेवलपर्स के लिए कंप्लायंस एफिशिएंसी बढ़ाई, जिससे ज़्यादा कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग का रास्ता खुला. RERA के मज़बूत नियमों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया, जबकि बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने नए रेजिडेंशियल और कमर्शियल कॉरिडोर खोले, खासकर NCR और उभरते टियर 2 मार्केट में, कुल मिलाकर, इन उपायों ने न केवल मार्केट की गति को फिर से जिंदा किया, बल्कि रियल एस्टेट को भारत के सबसे मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार सेक्टर्स में से एक के रूप में स्थापित किया, जिससे सस्टेनेबल ग्रोथ और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा मिला. 2025 में NCR में कुल निवेश लगभग ₹22,000 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 18% अधिक है."

एम3एम इंडिया के प्रेसिडेंट रॉबिन मंगला ने कहा "जैसे-जैसे वर्ष 2025 अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र तेज प्रगति और सुदृढ़ीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है. इसमें बेहतर होती मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, महंगाई में नरमी और घर खरीदने की मांग में निरंतर वृद्धि का अहम योगदान रहा है. मेट्रोपॉलिटन बाजारों ने इस वृद्धि का नेतृत्व जारी रखा है, जिसे तेजी से पूरी हो रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, मजबूत रोजगार इकोसिस्टम और आवासीय व वाणिज्यिक दोनों सेगमेंट में बढ़ते निवेशक विश्वास का समर्थन मिला. इस व्यापक गति के बीच, एनसीआर क्षेत्र ने एक निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसमें नोएडा विशेष रूप से सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे बाजारों में से एक के रूप में उभरकर सामने आया है. बेहतर कनेक्टिविटी, सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे का विस्तार, तथा मजबूत होती आर्थिक आधारशिला ने एंड-यूजर्स और दीर्घकालिक निवेशकों, दोनों के बीच नोएडा की आकर्षण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है. NCR में 2025 में कुल रेजिडेंशियल बिक्री लगभग ₹1.2 लाख करोड़ रही, जो बाजार की स्थिरता और निवेशक रुचि को दर्शाती है."

प्रॉपर्टी मास्टर के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर गोल्डी अरोड़ा ने कहा "ब्याज दरों और महंगाई के असर से बाजार की गति कुछ समय के लिए धीमी हुई है, लेकिन इससे रियल एस्टेट की बुनियाद कमजोर नहीं हुई है. निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद डेवलपर्स ने क्वालिटी और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने पर फोकस बनाए रखा है. प्रीमियम सेगमेंट में यूनिट‑लेवल बिक्री 2025 में 107% बढ़ी, जो यह दर्शाता है कि उच्च‑एंड डिमांड अभी भी मजबूत है. खरीदार अब ज्यादा जागरूक होकर निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिर और टिकाऊ मांग बन रही है. आने वाले समय में जैसे ही ब्याज दरों में स्थिरता आएगी, रियल एस्टेट सेक्टर फिर से तेज रफ्तार पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है" 

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन ने कहा "2025 को उस साल के तौर पर याद किया जाएगा जब भारतीय रियल एस्टेट, खासकर दिल्ली NCR में, पॉलिसी में स्थिरता और मार्केट के भरोसे का मेल हुआ. RBI के स्थिर इंटरेस्ट रेट के रुख ने खरीदारों का भरोसा बहाल किया, अफोर्डेबिलिटी में सुधार किया, और एंड-यूजर्स को मजबूती से मार्केट में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया. साथ ही, GST 2.0 ने बहुत जरूरी क्लैरिटी और कंप्लायंस एफिशिएंसी लाई, जिससे इनपुट क्रेडिट आसान हुआ और डेवलपर्स के लिए टैक्सेशन को सुव्यवस्थित किया गया. NCR में, इसका नतीजा यह हुआ कि प्रोजेक्ट तेज़ी से पूरे हुए, घरों की मांग फिर से बढ़ी, और कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट में मजबूत तेजी आई. कुल मिलाकर, इन सुधारों ने एक ऐसा अनुकूल माहौल बनाया जहाँ पारदर्शिता, लिक्विडिटी और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ एक साथ आए."

रियलिस्टिक रियलटर्स के रीजनल डायरेक्टर मोहित बत्रा ने कहा "यह सच है कि बढ़ती ब्याज दरों, निर्माण लागत और महंगाई ने रियल एस्टेट सेक्टर पर कुछ दबाव बनाया है. होम लोन महंगे होने से खरीदार निर्णय लेने में थोड़ा समय ले रहे हैं, वहीं कच्चे माल और लेबर की लागत बढ़ने से डेवलपर्स की लागत जरूर बढ़ी है. हालांकि, यह भी साफ है कि घर की जरूरत एक बुनियादी मांग है. संगठित और विश्वसनीय डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स में एंड-यूजर की रुचि बनी हुई है. बेहतर प्लानिंग, लागत नियंत्रण और समय पर डिलीवरी के जरिए सेक्टर इस चुनौती को अवसर में बदल रहा है. NCR में कुल प्रोजेक्ट डिलीवरी का 65% समय पर पूरा हुआ है, जो सेक्टर की स्थिरता को दर्शाता है."

बिगटेक के सीओओ राज कुमार सिसोदिया के अनुसार "2025 में हाइब्रिड वर्क मॉडल के चलते IT और टेक्नोलॉजी कंपनियों में ऑफिस स्पेस का स्वरूप बदल रहा है. अब अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए आधुनिक और क्लस्टर्ड वर्कस्पेस को तरजीह दी जा रही है. भले ही वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प जारी हो, लेकिन बड़े टेक समूह और GCCs अभी भी ग्रेड-A ऑफिस स्पेस और वर्कस्पेस इनोवेशन में निवेश कर रहे हैं, ताकि टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और टीम कोलैबोरेशन मजबूत बना रहे. दिल्ली NCR में ग्रेड-A ऑफिस स्पेस का रिकवरी रेट 78% तक पहुँच गया है, जो 2024 की तुलना में 15% अधिक है."

GHD ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भारत ठाकरान ने कहा "2026 में रियल एस्टेट निवेश के नज़रिए से अगर किसी राज्य ने सबसे ज़्यादा मजबूती दिखाई है, तो वह गोवा है, जहाँ साउथ और नॉर्थ गोवा दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मजबूत माइक्रो-मार्केट्स के रूप में उभर रहे हैं. आज गोवा सिर्फ़ टूरिज़्म या वेकेशन होम डेस्टिनेशन नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर एंड-यूजर और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मार्केट बन चुका है. साउथ गोवा में मडगांव और उसके आसपास के क्षेत्र बेहतर प्लानिंग, कम भीड़ और मजबूत सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण स्थिर रिटर्न और बेहतर लाइफस्टाइल वैल्यू ऑफर कर रहे हैं. वहीं नॉर्थ गोवा में पोर्वोरिम और थिवीम जैसे इलाके बेहतर कनेक्टिविटी, उभरते रेजिडेंशियल क्लस्टर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते निवेशकों के लिए आकर्षक बनते जा रहे हैं. 2025 में गोवा में रियल एस्टेट निवेश लगभग ₹6,500 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 20% अधिक है."

एलांते ग्रुप के एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ कमर्शियल सेल्स हेनम खनेजा ने कहा "जैसा कि हम सभी जानते हैं, यह साल खत्म होने वाला है, और 2025 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बदलाव वाला साल रहा है. स्थिर ब्याज दरें, बढ़ती इनकम का भरोसा, और क्वालिटी-ड्रिवन डेवलपमेंट की तरफ साफ बदलाव, इन सभी ने मिलकर रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेक्टर में हमने जो मजबूत डिमांड देखी, उसमें योगदान दिया. आज के खरीदार ज़्यादा जानकार हैं और इंटीग्रेटेड लिविंग, सस्टेनेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म वैल्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं. टियर-2 मार्केट में भी तेजी आई क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हाइब्रिड वर्किंग मॉडल ने नए ग्रोथ पॉकेट बनाए. साल 2026 में, उम्मीद है कि मार्केट काफी हद तक संतुलित रहेगा, कुछ जगहों पर खरीदारों की तरफ थोड़ा झुकाव रहेगा क्योंकि इन्वेंट्री धीरे-धीरे बढ़ेगी. मॉर्गेज दरें स्थिर हो सकती हैं, जिससे खरीदने की क्षमता में सुधार होगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा. प्रीमियम और लग्ज़री सेगमेंट मजबूत बना रहेगा, जिसे ऐसे महत्वाकांक्षी और ज्यादा नेट-वर्थ वाले खरीदार चलाएंगे जो लाइफस्टाइल, डिजाइन और लॉन्ग-टर्म वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं. 2025 में टियर-2 शहरों में प्रीमियम प्रोजेक्ट की डिलीवरी लगभग 72% समय पर हुई है, जो सेक्टर की तेजी को दिखाता है."

 


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