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बिना निवेशकों से मिले दो बहनों ने जुटाए 91 हजार डॉलर, क्राउडफंडिंग से लिखी सफलता की नई कहानी
लखनऊ की दो बहनों ने बिना किसी निवेशक से मुलाकात किए और बिना इक्विटी छोड़े अपने स्टार्टअप Mithrasa के लिए Kickstarter के जरिए 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों से 91,960 डॉलर जुटाए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
महिला उद्यमियों के लिए पूंजी जुटाना आज भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, लेकिन लखनऊ की दो बहनों, मृणालिनी और न्योनिका मित्रा ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया. दोनों ने बिना किसी निवेशक से मुलाकात किए और बिना इक्विटी छोड़े अपने स्टार्टअप Mithrasa के लिए Kickstarter के जरिए 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों से 91,960 डॉलर जुटाए. उनकी यह सफलता महिला उद्यमिता और क्राउडफंडिंग की ताकत का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है.
फंडिंग नहीं, ग्राहकों के भरोसे बनाई कंपनी
महिला उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर आइडिया नहीं, बल्कि पूंजी, नेटवर्क और भरोसे तक पहुंच होती है. दुनियाभर में महिलाओं को संस्थागत निवेश का केवल एक छोटा हिस्सा ही मिलता है. रचनात्मक व्यवसायों को निवेशक अक्सर शौक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और यदि स्टार्टअप किसी बड़े स्टार्टअप हब की बजाय लखनऊ जैसे शहर से हो, तो यह चुनौती और बढ़ जाती है.
मल्टीमीडिया नैरेटिव स्टूडियो Mithrasa की सह-संस्थापक मृणालिनी और न्योनिका मित्रा ने इन चुनौतियों के बावजूद सीधे वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने का फैसला किया और निवेशकों के बजाय बाजार से अपनी पहचान बनाई.
Kickstarter पर लक्ष्य से 29 गुना ज्यादा फंडिंग
दोनों बहनों का पहला टेबलटॉप कार्ड गेम 'One More Page' Kickstarter पर लॉन्च हुआ. उन्होंने 3,108 डॉलर का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभियान के अंत तक 91,960 डॉलर जुटा लिए. यानी लक्ष्य का करीब 2,900 प्रतिशत.
इस अभियान को अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत 40 से अधिक देशों के 1,267 समर्थकों का साथ मिला. लेट प्लेज पूरे होने के बाद कुल फंडिंग 1 लाख डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है. सबसे खास बात यह रही कि न उन्होंने किसी निवेशक के सामने प्रेजेंटेशन दिया और न ही कंपनी की कोई इक्विटी छोड़ी.
ग्राहकों ने किया फैसला, निवेशकों ने नहीं
मृणालिनी मित्रा कहती हैं कि अमेरिकी और यूरोपीय स्टूडियो के दबदबे वाले क्षेत्र में पहली बार काम करने वाले क्रिएटर के रूप में उन्होंने सीखा कि आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण चीज उत्पाद की गुणवत्ता होती है. उनके मुताबिक, महिला उद्यमी होने के कारण उन्हें ऐसे पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ा, जहां कुछ लोगों की क्षमता को आसानी से स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि महिलाओं की योग्यता पर सवाल उठाए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने अपने काम को इतना बेहतर बनाया कि उस पर सवाल उठाने की गुंजाइश ही न रहे. हर कार्ड हाथ से तैयार किया गया और हर छोटे-बड़े पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया. उनका कहना है कि दुनिया भर के करीब 1,300 समर्थकों में से किसी ने यह नहीं पूछा कि वे कहां से हैं या कंपनी महिलाओं ने बनाई है. ग्राहकों ने केवल उत्पाद को देखा.
गेमिंग इंडस्ट्री में नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की कमी
कंपनी में ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस संभालने वाली न्योनिका मित्रा का मानना है कि गेमिंग और स्टोरीटेलिंग इंडस्ट्री में नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की भागीदारी अभी भी बेहद कम है. उनके अनुसार, महिलाएं कलाकार, लेखक और कम्युनिटी मैनेजर जैसी रचनात्मक भूमिकाओं में तो बड़ी संख्या में हैं, लेकिन संस्थापक, ऑपरेशनल लीडर और बजट व वितरण जैसे निर्णय लेने वाले पदों पर उनकी मौजूदगी काफी सीमित है.
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन में काम करते हुए उन्होंने बहुत कम महिलाओं को इन भूमिकाओं में देखा है. उनके मुताबिक, समस्या प्रतिभा की नहीं बल्कि अवसरों की है.
महिलाओं के लिए क्या होना चाहिए बदलाव
न्योनिका का मानना है कि लड़कियों को डिजाइन और स्टोरीटेलिंग के साथ-साथ यूनिट इकोनॉमिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और लाइसेंसिंग जैसी व्यावसायिक बुनियादी बातें भी सिखाई जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि क्राउडफंडिंग को वैकल्पिक नहीं, बल्कि मुख्य फंडिंग रणनीति के रूप में अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे महिला उद्यमियों को पारंपरिक निवेशकों की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ता.
उनका यह भी कहना है कि मीडिया को महिला उद्यमियों की कहानियां भी उसी तरह कवर करनी चाहिए, जैसे पुरुष उद्यमियों की होती हैं, जहां चर्चा उनके कारोबार, मार्जिन, सप्लाई चेन और बाजार हिस्सेदारी पर हो.
बहनों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां बनी ताकत
Mithrasa में दोनों बहनों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा है. मृणालिनी डिजाइन, ब्रांड और कहानी की दुनिया तैयार करती हैं, जबकि न्योनिका ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस संभालती हैं.
दोनों का कहना है कि बहनों के रूप में साथ काम करने का सबसे बड़ा फायदा आपसी भरोसा रहा. उनके अनुसार, स्टार्टअप्स में अक्सर सह-संस्थापकों के बीच विवाद बड़ी वजह बनते हैं, लेकिन उनके बीच अधिकारों का बंटवारा पूरी तरह स्पष्ट है और कोई भी दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करता.
मां के इलाज के दौरान जन्मा था Mithrasa
Mithrasa की शुरुआत उनकी मां के कैंसर उपचार के दौरान हुई. उस कठिन दौर में पूरा परिवार हर रविवार बोर्ड गेम खेलकर साथ समय बिताता था. दोनों बहनों का कहना है कि इसी अनुभव ने उनके पहले गेम 'One More Page' को जन्म दिया, जो प्यार और रिश्तों पर आधारित है. उन्होंने यह भी तय किया कि कंपनी अपने मुनाफे का 2 प्रतिशत भारत के पशु आश्रयों को दान करेगी. गेम में मौजूद 'बो' नाम की गाय उनके रेस्क्यू लैब्राडोर से प्रेरित है.
सफलता की सबसे बड़ी कहानी 'शून्य' में छिपी है
BW के पाठकों के लिए मृणालिनी और न्योनिका मित्रा की सफलता केवल 2,900 प्रतिशत फंडिंग हासिल करने तक सीमित नहीं है. इस कहानी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने शून्य इक्विटी छोड़ी, शून्य निवेशकों से मंजूरी ली और शून्य निवेशक बैठकों के बावजूद वैश्विक बाजार में छह अंकों की फंडिंग हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत उत्पाद और ग्राहकों का भरोसा किसी भी स्टार्टअप की सबसे बड़ी पूंजी हो सकता है.
ओजस्विता त्रिवेदी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में ट्रेनी संवाददाता हैं.)
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