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वो समानता और सहानुभूति नहीं चाहते हैं, वो इक्विटी चाहते है : CEC राजीव कुमार 

CEC राजीव कुमार ने कहा कि मैं मानता हूं कि जो डिसेबल लोग हैं उन्‍हें कई हर रोज कई तरह के चैलेंज का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिजिकल डिसेबिलिटी को डिफाइन नहीं किया जा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

बिजनेस वर्ल्‍ड के BW People Disability positive Summit & Awards 2023 के मुख्‍य अतिथि मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त राजीव कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कई अहम बातें कहीं. उन्‍होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मैं एक ऐसे कार्यक्रम में मौजूद हूं जहां दिव्‍यांगों से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा हो रही है. दुनिया में जिन लोगों ने उस सक्‍सेस को अचीव किया जिसके कारण आज हम उन्‍हें जानते हैं अब वो भले ही अल्‍बर्ट आइंसटाइन हों, एडीशन हों, जॉन नैश, रोनॉल्‍डो द विंशी, स्‍टीफन हॉकिंग्‍स उन्‍होंने कभी भी अपनी डिसेबिलिटी को अपनी सफलता के बीच में कभी नहीं आने दिया. इससे पहले मैं फाइनेंस सेक्रेट्री था, तब सरकारी कार्यक्रमों के बाहर नहीं जाता था, अब जब से मैं CEC बना हूं तब से मैं आज तक सिर्फ दो कार्यक्रमों में शामिल हुआ हूं. पहला कार्यक्रम भी दिव्‍यांगों से जुड़ा हुआ था और दूसरा कार्यक्रम भी आज दिव्‍यांगों से जुड़ा हुआ है. मैं ऐसी किसी जगह नहीं जाता जहां मेरा दिल नहीं कहता है.

नेशनल ऑइकॉन वो होता है जो कुछ हासिल करता है
 मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त राजीव कुमार ने कहा कि डॉ. नीरू कुमार जो कि हमारी नेशनल आईकॉन हैं, नेशनल आईकॉन को हम हर क्षेत्र में नियुक्‍त करते हैं, इनमें खेल, शिक्षा, ट्रांसजेंडर, दिव्‍यांग जैसे क्षेत्र शामिल हैं. हम उन्‍हें नियुक्‍त करते हैं क्‍योकि उन्‍होंने जीवन में कुछ हासिल किया है. हर आदमी के पास कुछ ऐसा है जो किसी के पास नहीं है. कोई भी आदमी परफेक्‍ट नहीं है. क्‍योकि जैसे ही आप परफेक्‍ट बन जाते हो आप वैसे ही भगवान बन जाते हो. ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पांचों सेंस पूरी तरह से काम करते हैं और लेकिन उनको जो मानसिक और जो फिजिकल और एटीट्यूडनल डिसेबिलिटी हैं, वो उस डिसेबिलिटी से कहीं ज्‍यादा हैं. वो लोग किसी इंसान के अंदर की रीदम को नहीं सुन सकते हैं वो उस लाइट को देखने में भी सक्षम नहीं हैं.

मैंने एक बार नीरू जी से सीखा था, जिसे मैं बड़ी खुशी से शेयर करता हूं, वो लोग न तो इक्वैलिटी चाहते हैं और न ही सहानुभूति चाहते हैं, वो इक्विटी चाहते हैं, और इक्विटी क्‍या है, अगर वो कुछ नहीं बोल पा रहा है तो मैं उसे समझू और उसमें उसकी मदद करूं. आप उसे अपने साथ लेकर चलें ऐसा कोई नहीं चाहता है उनकी जो डिसेबिलिटी है आप उसका सम्‍मान करें. इसके अलावा वो और कुछ नहीं चाहता है.

जब हम कर सकते हैं और क्‍यों नहीं कर सकते  
मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त राजीव कुमार ने चुनाव से जुड़े कुछ आंकड़े बताते हुए कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों में 95 करोड़ लोग वोटर हैं. बाकी लोग जो हैं वो 18 साल से नीचे हैं. अब आप इन 95 करोड़ लोगों के बारे में जानिए, इसमें 49 % महिलाएं हैं. 2 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्‍होंने अभी कुछ दिन पहले 12 वीं की है और वो पहली बार वोटर बने हैं. अब आपको 80 साल से ज्‍यादा के लोगों के बारे में बताता हूं वो भी कोई 2 करोड़ से ज्‍यादा हैं. अब आपको देश में 100 प्‍लस लोगों के बारे में बताता हूं, वो 2.9 लाख हैं. दिव्‍यांग कोई 1 करोड़ लोग हैं.

मैं हर प्रेस कांफ्रेंस में ये बात कहने की कोशिश करता हूं कि जब वोटिंग होती है, अगर हम लाइन में लगे हर शख्‍स को जागरूक करेंगें कि डिसेबल आदमी के लिए सेपरेट एंट्री है, उसके लिए एक सेपरेट वॉलंटियर है, हर आदमी के लिए एक सेपरेट एप्‍लीकेशन जिसकी वो मांग करता है, उनके लिए रैंप की व्‍यवस्‍था हो, ईवीएम में ब्रेन लिपी लगाना हो, हम अपने 70 से 80 करोड़ पोलिंग बूथों के लिए के जरिए ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं हम उन्‍हें लेकर बहुत संवेदनशील हैं. हम अपने इन प्रयासों के जरिए अपने आब्‍जेक्टिव को अचीव करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर हम कर सकते हैं तो कॉरपोरेट क्‍यों नहीं कर सकते हैं. 

उन्‍हें हर वक्‍त खुद को साबित करना पड़ता है 
CEC राजीव कुमार ने कहा कि अगर उन्‍हें मौका मिले तो वो बेटर परफॉर्म कर सकते हैं. उन्‍हें हर वक्‍त ये प्रूव करना पड़ता है कि वो बराबर हैं. जब हम उन्‍हें संवेदनशीलता का टच देते हैं तो उनकी परफॉरमेंस बेहतरीन हो जाती है. आप जानते हैं कि हिमांचल में सबसे ज्‍यादा हाई एल्‍टीटयूड पर पोलिंग बूथ मौजूद हैं और आप जानते हैं वहां कितनी वोटिंग होती है 98 से 99 प्रतिशत और शहरों में मात्र 50 प्रतिशत वोट होती है. हम अभी तक देश में 400 विधानसभा के चुनाव पूरे करा चुके हैं. 
 


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