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पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के नाते हमारी जिम्‍मेदारी भी बड़ी है :भूपेन्‍द्र यादव 

केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि अगर हमने अपने जीने के तरीके को लेकर बदलाव नहीं किया तो हमारे लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा. उन्‍होंने ये भी कहा कि हमें प्रकृति को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा.

ललित नारायण कांडपाल 2 years ago

 बिजनेस वर्ल्‍ड BW Sustainable World Conclave 2023 में अपनी बात रखते हुए केन्‍द्रीय श्रम, रोजगार, और पर्यावरण मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कई अहम बातें कही. उन्‍होंने कहा कि आज भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था और तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था है. ऐसे में पर्यावरण को लेकर हमारी जिम्‍मेदारी भी ज्‍यादा हो जाती है. सबसे महत्‍वपूर्ण बात उन्‍होंने ये भी कही हमें प्रकृति के संसाधनों के इस्‍तेमाल को लेकर अपनी अप्रोच को बदलना होगा. इस कार्यक्रम में बिजनेस वर्ल्‍ड के एडिटर-इन-चीफ और समाचार4मीडिया के फाउंडर अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे. 

पिछले कुछ समय में मीडिया में बढ़ा है फोकस 
केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि पिछले कुछ समय में सस्‍टेनेबिलिटी को लेकर जिस तरह से मीडिया का फोकस बड़ा है उससे लगता है कि अब ये लक्ष्‍य दूर नहीं है.  हमारी सरकार इस बारे में जनता के प्‍वाइंट ऑफ व्‍यू को मोबिलाइज कर रही है और उस पर एक नजरिया बनाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में मैं बिजनेस वर्ल्‍ड की टीम को बधाई देता हूं कि उन्‍होंने ऐसे महत्‍वपूर्ण विषय को चुना, जो आज की सबसे बड़ी जरुरतों में एक है.
हम आज सस्‍टेनेबिलिटी पर इसलिए चर्चा कर रहे हैं क्‍योंकि यही हमारा भविष्‍य है. इतनी बात साफ है कि अगर हमने अपने लाइफस्‍टाइल के तरीके को और चीजों को खर्च करने की प्रवृति को नहीं बदला तो ये धरती ये प्‍लेनेट ज्‍यादा समय तक नहीं रह पाएंगे. मुझे लगता है कि अगर एक बार दुनिया इस समस्‍या को समझ जाएंगी तो फिर हम समस्‍या की जड़ से दूर नहीं रह पाएंगे.

बिना समस्‍या जाने कोई नहीं दे सकता हल 
 केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि ऐसा कोई जीनियस नहीं है जो बिना समस्‍या को समझे इसका हल बता सकता है. मैं इस समस्‍या को आपके सामने विस्‍तार से कहना चाहता हूं. इसके दो पहलू हैं. इनमें पहला पहलू ये है कि आज इसे लेकर दो तरह के सोचने वाले हमारे सामने आते हैं, इनमें एक वो हैं जो कैटेस्‍टोफिजम पर विश्‍वास रखते हैं. जो ये मानते हैं कि ये दुनिया जल्‍द ही खत्‍म होने वाली है और दूसरे वो हैं जो टेक्‍नोआप्‍टिमिस्टिक हैं. जो ये मानते हैं कि समूची अर्थ में कई तरह की संभावना हैं.  

जो मानते हैं कि इंसान किसी भी तरह की समस्‍या से लड़ सकता है. आज इंसान अपनी जरूरत के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है. इंसानों को लगता है कि उनकी समझदारी प्रकृति को पीछे कर सकती है. हमें इस बात को समझना होगा कि इस प्‍लेनेट पर हमारे सर्वाइव करने के चांस तभी बढ़ेंगे जब हम अपने तानाशाही रवैये को पीछे छोड़ेगें. अमेरिकी वैज्ञानिक और इकोलॉजिस्‍ट एल्‍डो ल्‍यूपड इसे लैंड एथेनिक धरती और इंसानों के बीच के संबंध को इंटरवाइन कहते हैं. हमारे मंत्रालय का भी मोटो वाक्‍य है प्रकृति: रक्षित: रक्षत: जब आप प्रकृति की रक्षा करते हैं तभी वो आपकी रक्षा करती है.   हमारे पास प्रकृति को ओवरपावर करने की क्षमता नहीं है.

जी 20 में भारत निभा रहा है अहम भूमिका
केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि जी 20 की अध्‍यक्षता के बीच पीएम मोदी के नेतृत्‍व में भारत इसे पूरी दुनिया के संज्ञान में लाने की कोशिश कर रहा है. जी-20 वर्किंग ग्रुप की मीटिंग में इसे लेकर कई विषयों पर बात हुई है. इसमें जिन मुददों पर बात हुई वो है लैंड डिग्रेडेशन, एक्‍सीलेटिंग इकोनोमिक डिग्रेडेशन एंड एनरिचिंग बॉयोडॉयवर्सिटी. दूसरा प्रमोटिंग सस्‍टेनेबल एंड क्‍लाइमेट ब्‍लू इकोनॉमी सहित कई ऐसे विषय हैं जिनको भारत ने विश्‍व के देशों के सामने रखा है. आप लोगों में  से ज्‍यादातर ये जानना चाहते होंगें कि हम मिशन लाइफ का हिस्‍सा कैसे बन सकते हैं. मैं आप लोगों को सुझाव देना चाहूंगा कि अगर आपका एक्‍शन पर्यावरण की इंटीग्रेटी , स्‍टेबिलिटी और ब्‍यूटी को बढ़ाता है तो आप इसे अपनी जिंदगी का हिस्‍सा बना सकते हैं. दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था और तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था में हमारी जिम्‍मेदारी और बढ़ जाती है. 


 


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