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जिस FATF से कांपता है पाकिस्तान, क्या आप उसके बारे में जानते हैं?

जिसका जिक्र होते ही पाकिस्तान कांपने लगता है? यदि नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

अभिषेक मेहरोत्रा 3 years ago

 

यदि आप पाकिस्तान से जुड़ी खबरें पढ़ते हैं, तो आपने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा. लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि आखिर  FATF ऐसी क्या बला है, जिसका जिक्र होते ही पाकिस्तान कांपने लगता है? यदि नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

क्या है FATF?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की स्थापना 1989 में G7 देशों द्वारा की गई थी. यह एक अंतर-सरकारी निकाय है. इसका काम है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और टेरर फंडिंग पर निगाह रखना. सदस्य देशों की बात करें, तो FATF के कुल 39 सदस्य देश और क्षेत्रीय संगठन हैं. FATF की सिफरिशों को 1990 में पहली बार लागू किया था.

क्या है FATF का मकसद?

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को साफ-सुथरा रखना, आतंकियों को पालने-पोसने, उनके संरक्षण के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखना इस एजेंसी का मुख्य मकसद है. साथ ही FATF अपने सदस्य देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्र‍िंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकता है. FATF के निर्णय लेने वाले निकाय को FATF प्लेनरी कहा जाता है, इसकी बैठक एक साल में तीन बार होती है.

कैसे करता है कार्रवाई?

FATF टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो तरह की कार्रवाई करता है. इसके तहत संबंधित देश को 'ग्रे लिस्ट' या 'ब्लैक लिस्ट' में डाला जाता है. पहले बात करते हैं ग्रे लिस्ट की. इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का जोखिम सबसे ज्यादा होता है. लेकिन ये देश इसे रोकने के लिए FATF के साथ मिलकर काम करने की इच्छा दर्शाते हैं. हालांकि, यदि FATF यह पाता है कि संबंधित देश सुधार को लेकर गंभीर नहीं है या उसकी सिफारिशों पर अमल नहीं कर रहा है, तो उसे ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी दी जाती है.

ग्रे लिस्ट का नुकसान: पाकिस्तान इस समय ग्रे लिस्ट में है और इस लिस्ट वाले देशों को किसी भी इंटरनेशनल मॉनेटरी बॉडी जैसे कि IMF, वर्ल्ड बैंक से कर्ज मिलने में दिक्कत आती है. यदि कर्ज मिलता भी है तो उसकी शर्तें बेहद कड़ी होती हैं. इसके अलावा, उन्हें व्यापार में भी परेशानी उठानी पड़ती है.

ब्लैक लिस्ट

ब्लैक लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है, जो न किसी सुधार के लिए तैयार होते हैं और न ही यह साबित करते हैं कि उन पर लगे टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप बेबुनियाद हैं. FATF ऐसे देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों का समर्थन करने वाले देश के रूप में देखता है और इसी अनुरूप करवाई होती है. इस लिस्ट में ईरान और नार्थ कोरिया को रखा जा चुका है.


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