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एक नहीं अनेक FDs में करें इन्वेस्ट, इस तरह उठाएं बेहतर रिटर्न्स का फायदा!

इस वक्त देश के विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा FD (Fixed Deposit) 7% से 8% इंटरेस्ट रेट प्रदान किए जा रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जहां एक तरफ ग्लोबल इकॉनमी में अस्थिरता बनी हुई है वहीं दूसरी तरफ भारत की इकॉनमी में वृद्धि जारी है. हाल ही में भारत के केंद्रीय बैंक RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने भारत की GDP की वृद्धि दर और विकास दर को लेकर डाटा जारी किया था और भारत की इकॉनमी ने केंद्रीय बैंक द्वारा लगाए गए अनुमानों को गलत साबित कर दिया है.
 

FD पर मिल रहे हैं अच्छे रिटर्न्स
भारतीय इकॉनमी के प्रदर्शन को देखते हुए ही RBI ने पॉलिसी रेट बढ़ाने की प्रक्रिया पर भी विराम लगा दिया है और इस वक्त देश के विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा FD (Fixed Deposit) 7% से 8% इंटरेस्ट रेट प्रदान किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं कुछ छोटे फाइनेंस बैंकों द्वारा FD पर 8.5% जितना शानदार इंटरेस्ट रेट भी प्रदान किया जा रहा है. इस वक्त बहुत से इन्वेस्टर्स द्वारा अपने अतिरिक्त फंड्स को FD में इन्वेस्ट करने के बारे में सोचा जा रहा है. अगर आप भी FD में इन्वेस्ट करने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले एक बार इन फैक्टर्स के बारे में जरूर सोच लें.

1.    अनेक FDs मतलब बेहतर रिटर्न्स: बेहतर रिटर्न्स प्राप्त करने के लिए आप अपनी इन्वेस्टमेंट्स को विभिन्न मैच्योरिटी डेट वाले विभिन्न FD फंड्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं. इस तरीके से आप बिना अपनी पूरी इन्वेस्टमेंट को खत्म किए ही अपने फंड्स का भी सही रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए मान लीजिये कि आपके सेविंग्स अकाउंट में 5 लाख रूपए हैं तो आप इन पैसों को एक बार में जमा करवा सकते हैं लेकिन ऐसे में आपको एक रेट पर एक निश्चित अवधि तक ही पैसे जमा करने का विकल्प मिलता है और इस विकल्प को चुनने का मतलब होगा कम रिटर्न्स का चुनाव करना. दूसरी तरफ अगर आप अपने पैसों को पांच अलग-अलग फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं में अलग-अलग रेट पर जमा करते हैं तो हर डिपॉजिट सालाना, 2 सालों में एक बार, 3 सालों में एक बार, 4 सालों में एक बार, या फिर 5 सालों में एक बार रिन्यू होता रहेगा जिससे आपको औसत स्तर पर बेहतर रिटर्न्स की प्राप्ति होगी. 

 

2.    सिर्फ 5 लाख तक की है अनुमति: DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन), एक अकाउंट होल्डर को एक बैंक में प्रिंसिपल और इंटरेस्ट समेत केवल 5 लाख तक का इंश्योरेंस जमा करवाने की अनुमति देता है. इसीलिए अगर आप 5 लाख से ज्यादा बड़ी रकम को इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो आपको अपनी राशी, विभिन्न बैंकों में बांट देनी चाहिए. विभिन्न बैंकों में बहुत सारी FD होने से आपकी इन्वेस्टमेंट पर रिस्क भी कम हो जाता है. अगर एक बैंक भी असफल हो जाता है तो आपकी इन्वेस्टमेंट पर उसका प्रभाव कम हो जाता है. 


3.     FD की प्रीमैच्योर निकासी पर लगती है पेनल्टी: FD में आपको प्रीमैच्योर निकासी का विकल्प भी मिलता है लेकिन ऐसा करने पर बैंकों द्वारा पेनल्टी शुल्क भी लगाया जाता है. आमतौर पर बैंकों द्वारा लगाया जाने वाला पेनल्टी शुल्क इंटरेस्ट रेट के 0.5% से 1% के बीच होता है. जब आप समय पूरा होने से पहले ही अपनी FD तुड़वा लेते हैं तो आप वह पैसा भी खो देते हैं जो शायद आप इंटरेस्ट रेट के रूप में इकट्ठा कर सकते थे. HDFC जैसे कुछ प्रमुख बैंकों द्वारा FD की प्रीमैच्योर निकासी पर इंटरेस्ट रेट का 1% जितनी रकम पेनल्टी शुल्क के रूप में लगाई जाती है. दूसरी तरफ ICICI बैंक द्वारा इंटरेस्ट रेट का 0.5% से 1% और SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) द्वारा 0% से 0.5% जितना शुल्क पेनल्टी के रूप में लगाया जाता है. 

फिर भी समय से पहले तोड़नी हो FD तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान
अगर आपकी FD योजना काफी नई है और योजना की मैच्योरिटी में एक साल से ज्यादा समय बचा है और आपको किसी अन्य FD योजना पर पहले वाली FD योजना के मुकाबले 1% या उससे ज्यादा का इंटरेस्ट रेट प्रदान किया जा रहा है तो बेहतर यही होगा कि आप अपनी FD को तुड़वा लें और ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाली अन्य किसी FD योजना में इन्वेस्ट करें. लेकिन दूसरी तरफ ऐसे लोग जिनके पास बैंक अकाउंट में अतिरिक्त फंड्स मौजूद हैं उन्हें किसी एक FD योजना में इन्वेस्ट करके उछ इंटरेस्ट रेट्स का फायदा उठाना चाहिए. 

FD पर लगने वाले टैक्स को अच्छे से समझ लें
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 194A के अंतर्गत किसी भी बैंकिंग कंपनी, पोस्ट ऑफिस या फिर बैंकिंग बिजनेस वाली किसी को-ऑपरेटिव सोसायटी द्वारा 40,000 रूपए से ज्यादा के इंटरेस्ट रेट का भुगतान करने पर 10% के रेट से TDS की कटौती की जाती है. 
    TDS की कटौती इंटरेस्ट रेट की कुल राशि पर की जाएगी
    वरिष्ठ नागरिकों के लिए TDS की कटौती की शुरुआत 50,000 रुपयों से होती है.
    अगर आपको इस टैक्स कटौती से बचना है तो आपको हर एक FD में सिर्फ 4 लाख से 5 लाख रूपए तक की इन्वेस्टमेंट ही करनी चाहिए. 
 

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