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शेयर बाजार का मजबूत सहारा बने म्युचुअल फंड, इक्विटी निवेश 50 लाख करोड़ के पार
एसआईपी के जरिए लगातार आ रहा निवेश और लंबी अवधि के नजरिए ने म्युचुअल फंडों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
साल 2025 म्युचुअल फंड उद्योग के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद म्युचुअल फंडों ने इक्विटी में निवेश के नए रिकॉर्ड बनाए. घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और एसआईपी के जरिए लगातार आ रहे पैसे के दम पर म्युचुअल फंडों की शुद्ध इक्विटी खरीद पहली बार 4.9 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, वहीं इक्विटी होल्डिंग भी 50 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने में सफल रही.
2025 में टूटा इक्विटी खरीद का पुराना रिकॉर्ड
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2025 में म्युचुअल फंडों की शुद्ध इक्विटी खरीद 13 फीसदी बढ़कर 4.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यह आंकड़ा 2024 में दर्ज 4.3 लाख करोड़ रुपये के पिछले उच्चतम स्तर से भी ज्यादा है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई जब शेयर बाजार में कई मौकों पर सुस्ती और अस्थिरता देखने को मिली.
लगातार पांचवें साल पॉजिटिव रही खरीदारी
म्युचुअल फंडों की इक्विटी खरीद पिछले पांच सालों से लगातार सकारात्मक बनी हुई है. साल 2022 में जहां शुद्ध खरीद 1.9 लाख करोड़ रुपये रही थी, वहीं 2023 में यह घटकर 1.7 लाख करोड़ रुपये रही. इसके बाद 2024 में म्युचुअल फंडों का निवेश दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया और 2025 में यह नए शिखर पर पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा और नियमित निवेश प्रवाह इसकी सबसे बड़ी वजह है.
एसआईपी और खुदरा निवेशकों का बड़ा योगदान
बाजार की अस्थिरता के बावजूद म्युचुअल फंड योजनाओं में लगातार निवेश आता रहा. खास तौर पर व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी ने पूरे साल फंड हाउसों को मजबूत सहारा दिया. खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और अनुशासित निवेश की आदत ने म्युचुअल फंडों की खरीदारी को बनाए रखा, जिससे बाजार में स्थिरता भी देखने को मिली.
एफपीआई की बिकवाली के बीच डीआईआई बने सहारा
म्युचुअल फंडों का मजबूत निवेश शेयर बाजार के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभा रहा है. खासकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की बिकवाली के दौर में घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार के लिए ढाल बने. घरेलू म्युचुअल फंड, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड जैसे डीआईआई ने मिलकर शेयर बाजार में 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है.
इक्विटी होल्डिंग पहली बार 50 लाख करोड़ के पार
लगातार खरीदारी का असर म्युचुअल फंडों की इक्विटी होल्डिंग पर भी साफ दिखा. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 के अंत तक म्युचुअल फंडों की इक्विटी परिसंपत्तियां बढ़कर 50.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गईं. यह स्तर दो साल से थोड़े अधिक समय में दोगुना हुआ है, जो घरेलू निवेशकों के भरोसे और म्युचुअल फंड उद्योग की मजबूती को दर्शाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एसआईपी और घरेलू निवेश का यही रुझान बना रहता है, तो आने वाले वर्षों में म्युचुअल फंड शेयर बाजार में और भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. यह न सिर्फ बाजार को स्थिरता देगा, बल्कि लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न की संभावनाएं भी मजबूत करेगा.
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